अदालत से धोखाधड़ी पर बार को भी जवाबदेह ठहराया, बरेली के दो वकीलों का लाइसेंस निरस्त
बरेली विकास प्राधिकरण की भूमि अधिग्रहण मामले में विपक्षी वकीलों ने अदालत के साथ धोखाधड़ी की, जिसके परिणामस्वरूप इलाहाबाद हाई कोर्ट ने उनके लाइसेंस निरस्त करने का निर्देश दिया है। इसके अलावा, अदालत ने गलत दर से भुगतान की वसूली का निर्देश दिया है और रजिस्ट्रार जनरल को संबंधित मजिस्ट्रेट कोर्ट में शिकायत दर्ज करने के लिए कहा है।

सौजन्य से:- Jagran
Allahabad HC की बड़ी कार्रवाई, अदालत से धोखाधड़ी करने वाले दो वकीलों का लाइसेंस निरस्त करने का निर्देश
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने अदालत से धोखाधड़ी करने वाले दो वकीलों के लाइसेंस रद्द करने का निर्देश दिया है। बरेली विकास प्राधिकरण के भूमि अधिग्रहण मामले में ...और पढ़ें
HighLights
- हाई कोर्ट ने कहा- अधिक मुआवजे की वसूली राजस्व प्रक्रिया अपनाकर की जाए
- BDA की पुनर्विलोकन अर्जी की सुनवाई में विपक्षी वकीलों द्वारा अदालत से धोखाधड़ी
विधि संवाददाता, जागरण, प्रयागराज। इलाहाबाद हाई कोर्ट में बरेली विकास प्राधिकरण की पुनर्विलोकन अर्जी की सुनवाई के दौरान विपक्षी वकीलों द्वारा अदालत के साथ धोखाधड़ी की बात सामने आई है। न्यायमूर्ति अतुल श्रीधरन और न्यायमूर्ति क्षितिज शैलेंद्र की खंडपीठ ने इस पर कड़ा रुख अपनाते हुए उक्त वकीलों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई करने का निर्देश दिया है।
कोर्ट ने कहा- जानबूझकर की गई बेइमानी
प्रतिवादी वकीलों द्वारा मांगी गई माफी को ठुकराते हुए कोर्ट ने कहा है कि यह टाइपिंग की गलती नहीं बल्कि जानबूझकर की गई बेईमानी थी। सच्चा पश्चाताप अलग चीज है और पकड़े जाने के डर से मांगी गई माफी अलग। माफी केवल इसलिए आई क्योंकि झूठ पकड़ा गया।
बरेली विकास प्राधिकरण की भूमि अधिग्रहण मामला
प्रकरण दोहनिया गांव की भूमि (खसरा नं. 135) के अधिग्रहण से जुड़ा है। बरेली विकास प्राधिकरण (BDA) ने यह अधिग्रहीत की थी। भूमि अधिग्रहण अधिनियम 1894 के तहत शुरू हुई प्रक्रिया का अवार्ड (मुआवजा) 26 अप्रैल 2016 को नए भूमि अधिग्रहण अधिनियम 2013 के तहत घोषित हुआ।रामपाल व अन्य विपक्षियों ने भुगतान में देरी के लिए ब्याज के लिए याचिका दाखिल की।
प्राधिकरण ने रिकार्ड जांचे तो धोखाधड़ी सामने आई
मूल अवार्ड में केवल ‘नियमानुसार ब्याज देय होगा’ लिखा था, जबकि याचिका के साथ संलग्न टाइप की गई प्रति में यह जोड़ दिया गया कि पहले वर्ष नौ और उसके बाद 15 प्रतिशत वार्षिक ब्याज देय होगा। छेड़छाड़ से तैयार इस प्रति पर भरोसा करते हुए कोर्ट ने 24 मई 2024 को आदेश दिया कि प्राधिकरण इस ब्याज दर से भुगतान करे। प्राधिकरण ने रिकार्ड जांचे तो धोखाधड़ी सामने आई और उसने आदेश के पुनर्विलोकन के लिए अर्जी दाखिल की। दूसरी तरफ प्रतिवादियों ने अवमानना याचिका दाखिल कर प्राधिकरण पर दबाव बनाया, इसलिए प्राधिकरण ने विवादित दर पर भुगतान कर दिया।
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गलत दर से भुगतान की वसूली का निर्देश
अदालत ने वकालत के पेशे की गरिमा पर भी टिप्पणी करते हुए कहा कि आम नागरिक मजबूरी में वकीलों के पास जाता है और उन पर पूरा भरोसा करता है। ऐसे में यदि दोषियों को हल्के में छोड़ा गया तो बार में गलत संदेश जाएगा। कोर्ट ने 24 मई 2024 का अपना आदेश रद करते हुए प्राधिकरण को निर्देश दिया कि जिन लाभार्थियों को गलत दर पर भुगतान हुआ, उनसे यह राशि राजस्व बकाया के रूप में वसूल करने की कार्रवाई तुरंत शुरू करे।
रजिस्ट्रार जनरल को कोर्ट का निर्देश
रजिस्ट्रार जनरल को निर्देश दिया कि वे धारा 340 दंड प्रक्रिया संहिता के तहत जांच कर संबंधित मजिस्ट्रेट कोर्ट में भारतीय दंड संहिता क धारा 199 (झूठा साक्ष्य गढ़ना, धारा 193 के तहत दंडनीय) के तहत शिकायत दर्ज कराएं। साथ ही बार काउंसिल ऑफ इंडिया और बार कौंसिल आफ यूपी में इन वकीलों (शिवकांत मिश्रा व कृष्ण कांत मिश्रा) का लाइसेंस रद करने के लिए शिकायत भेजें। कोर्ट ने 66 दिन की देरी से दाखिल समीक्षा याचिका को परिस्थितियों को देखते हुए स्वीकार कर लिया। याची की तरफ से अधिवक्ता धर्मेंद्र सिंह चौहान ने बहस की।
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