AIMPLB ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के हिजाब निर्णय पर सुप्रीम कोर्ट में चुनौती का इरादा जताया
ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के हालिया हिजाब फैसले को एकतरफा और मनमाना कहा और बताया कि इस निर्णय में इस्लाम की धार्मिक मान्यताओं को नजरअंदाज किया गया है। बोर्ड ने कानूनी अध्ययन के बाद सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने का निर्णय लेने का वचन दिया है।

सौजन्य से:- ABP News
हिजाब मामले में AIMPLB की एंट्री, SC में चुनौती की तैयारी
इलाहाबाद हाईकोर्ट के हिजाब फैसले का मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने विरोध किया है. बोर्ड सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने की तैयारी कर रहा है.
हिजाब को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट के हालिया फैसले के बाद विवाद बढ़ता जा रहा है. अब ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने भी इस फैसले का विरोध किया है. बोर्ड का कहना है कि कोर्ट का फैसला एकतरफा और मनमाना है. साथ ही इसमें इस्लाम की धार्मिक मान्यताओं और मूल सिद्धांतों को नजरअंदाज किया गया है. बोर्ड की ओर से कहा गया है कि फैसले का कानूनी अध्ययन कराया जा रहा है. इसके बाद इसे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने को लेकर फैसला लिया जाएगा.
ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की सदस्य डॉ. समरा सुल्ताना ने कहा कि बोर्ड इस फैसले से पूरी तरह असहमत है. उन्होंने बताया कि फैसले का फिलहाल लीगल ऑब्जरवेशन किया जा रहा है.
बोर्ड की बैठक में जल्द ही इस मामले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने को लेकर औपचारिक फैसला लिया जाएगा. बैठक में फैसला होने के बाद इसकी जानकारी मीडिया के माध्यम से सार्वजनिक की जाएगी.
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डॉ. समरा सुल्ताना का कहना है कि हिजाब को लेकर इस तरह के विवाद और फैसले लगातार इस्लाम धर्म को निशाना बनाने की कोशिश के तौर पर देखे जा रहे हैं. उनका कहना है कि भारत का संविधान नागरिकों को धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार देता है. ऐसे में अगर किसी अदालत की ओर से यह कहा जाता है कि हिजाब इस्लाम का जरूरी हिस्सा नहीं है तो इस पर सवाल उठना स्वाभाविक है.
धार्मिक मान्यताओं और कुरान की कही बात
उन्होंने कहा कि इस तरह का फैसला देने से पहले इस्लाम धर्म की धार्मिक मान्यताओं और पवित्र ग्रंथ कुरान का भी अध्ययन किया जाना चाहिए था. उनके मुताबिक, इस्लाम में महिलाओं के पहनावे और पर्दे को लेकर स्पष्ट धार्मिक मान्यताएं हैं. इसी आधार पर उनका दावा है कि हिजाब मुस्लिम महिलाओं के लिए धार्मिक रूप से अहम और जरूरी है.
डॉ. समरा सुल्ताना ने कहा कि हिजाब को लेकर बार-बार विवाद खड़ा करना मुस्लिम महिलाओं और बच्चियों के लिए परेशानी पैदा करता है. उनका कहना है कि मुस्लिम महिलाएं हिजाब केवल धार्मिक कारणों से ही नहीं, बल्कि खुद को सुरक्षित महसूस करने के लिए भी पहनती हैं. उनके मुताबिक हिजाब महिलाओं को बुरी नजर से बचाने और उनमें आत्मविश्वास पैदा करने का काम करता है.
मुस्लिम बच्चियों की पढ़ाई को लेकर जताई चिंता
उन्होंने यह भी कहा कि हिजाब को लेकर होने वाले विवादों का सबसे ज्यादा असर मुस्लिम बच्चियों की पढ़ाई पर पड़ सकता है. उनका कहना है कि जब स्कूल और कॉलेज में पहनावे को लेकर लगातार विवाद खड़ा होगा तो कई मुस्लिम परिवारों और बच्चियों के बीच असुरक्षा की भावना पैदा हो सकती है.
उन्होंने सवाल उठाया कि एक तरफ सरकार 'बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ' का नारा देती है, वहीं दूसरी तरफ अगर मुस्लिम बच्चियों के पहनावे को लेकर विवाद खड़े होते हैं तो उनके खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं की जाती?
डॉ. समरा सुल्ताना के मुताबिक मुस्लिम बच्चियां तभी स्कूल और कॉलेज जाकर बेहतर तरीके से पढ़ाई कर पाएंगी, जब उन्हें वहां सुरक्षित और सहज माहौल मिलेगा. उन्होंने हिजाब को लेकर लगातार उठने वाले विवादों को मुस्लिम बच्चियों को शिक्षा से दूर करने की कोशिश बताया.
उनका कहना है कि किसी मुस्लिम महिला का हिजाब पहनना उसका निजी और धार्मिक फैसला है और इसमें किसी दूसरे व्यक्ति को आपत्ति जताने का अधिकार नहीं होना चाहिए.
असदुद्दीन ओवैसी के बयान का किया समर्थन
उन्होंने एआईएमआईएम सांसद असदुद्दीन ओवैसी के उस बयान का भी समर्थन किया, जिसमें उन्होंने इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले को इस्लाम के खिलाफ बताया था. डॉ. समरा सुल्ताना ने कहा कि ओवैसी ने इस मुद्दे पर जो बात कही है, वह पूरी तरह सही है. उनके मुताबिक इस तरह के फैसलों और विवादों के जरिए मुसलमानों को सीधे तौर पर निशाना बनाया जा रहा है.
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उन्होंने कहा कि ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड हिजाब को लेकर आए इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले से कतई सहमत नहीं है. इसी वजह से बोर्ड अब इस फैसले का कानूनी अध्ययन कर रहा है और जल्द ही इसे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने की दिशा में आगे बढ़ेगा. बोर्ड की बैठक में औपचारिक निर्णय लिए जाने के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई की जानकारी सार्वजनिक की जाएगी.
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