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तमिलनाडु के गरीबों के लिए चिंता: खाद्य सुरक्षा कानून में संशोधन से भुखमरी का खतरा

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय ने प्रधानमंत्री मोदी को पत्र लिखकर अनुरोध किया है कि खाद्य सुरक्षा कानून में संशोधन न किया जाए। उनका तर्क है कि इस संशोधन से राज्य में गरीब परिवारों को मिलने वाली खाद्य सहायता में भारी कमी आएगी, जिससे भुखमरी और कुपोषण का खतरा बढ़ेगा।

7 जुलाई 2026 को 03:59 am बजे
तमिलनाडु के गरीबों के लिए चिंता: खाद्य सुरक्षा कानून में संशोधन से भुखमरी का खतरा

सौजन्य से:- Navbharat Times

प्रस्तावित संशोधन का मकसद मौजूदा अंत्योदय अन्न योजना (AAY) के तहत मिलने वाले अनाज के कोटे में बदलाव करना है। अभी परिवार के आकार की परवाह किए बिना हर परिवार को प्रति माह 35 किलोग्राम अनाज मिलता है, जिसे बदलकर प्रति व्यक्ति प्रति माह 7 किलोग्राम करने का प्रस्ताव है, लेकिन एक परिवार के लिए अधिकतम सीमा 35 किलोग्राम ही रहेगी।

केंद्र और सीएम विजय का तर्क

हालांकि केंद्र सरकार का कहना है कि इस संशोधन का मकसद असमानताओं को दूर करना और अनाज के आवंटन को पोषण संबंधी जरूरतों के अनुरूप बनाना है, लेकिन विजय का तर्क है कि इस प्रस्ताव का तमिलनाडु पर बुरा असर पड़ेगा, क्योंकि वहां परिवार का औसत आकार केवल 3.54 सदस्य है। नतीजतन, कई सबसे गरीब परिवारों को अभी की तुलना में काफी कम अनाज मिलेगा।तमिलनाडु में राशन कार्ड का हाल

मुख्यमंत्री ने बताया कि तमिलनाडु में अभी 18.64 लाख AAY राशन कार्ड हैं, जिनसे 69.27 लाख लाभार्थियों को लाभ मिलता है। इनमें विधवाएं, दिव्यांगजन, बिना नियमित आय वाले वरिष्ठ नागरिक, आदिवासी परिवार, भूमिहीन खेतिहर मजदूर, दिहाड़ी मजदूर और जानलेवा बीमारियों से पीड़ित लोग शामिल हैं। उन्होंने कहा कि नेशनल फूड सिक्योरिटी एक्ट का मकसद इन्हीं वर्गों को परिवार-आधारित अनाज के पक्के और बिना शर्त कोटे के ज़रिए सुरक्षा प्रदान करना था।तमिलनाडु में अभी हर महीने 65,261 मीट्रिक टन अनाज मुफ्त

थलपति विजय ने आगे तर्क दिया कि अनाज के कोटे को परिवार-आधारित व्यवस्था से बदलकर प्रति व्यक्ति आवंटन (जिसमें परिवार के लिए अधिकतम सीमा तय हो) करने से तमिलनाडु जैसे राज्यों को नुकसान होगा, जिन्होंने परिवार नियोजन कार्यक्रमों को सफलतापूर्वक लागू किया है और इसलिए वहां परिवार का आकार छोटा है। मुख्यमंत्री के अनुसार, तमिलनाडु को अभी केंद्र सरकार से AAY लाभार्थियों के लिए हर महीने 65,261 मीट्रिक टन अनाज मुफ्त मिलता है।प्रस्तावित संशोधन के तहत, यह आवंटन घटकर लगभग 42,040 मीट्रिक टन रह जाएगा, जिससे राज्य भर के गरीब परिवारों को मिलने वाली खाद्य सहायता में भारी कमी आएगी। विजय ने तमिलनाडु की मज़बूत सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) बनाए रखने की लंबे समय से चली आ रही प्रतिबद्धता पर भी ज़ोर दिया, जिसके तहत अक्सर केंद्र के तय नियमों से ज़्यादा खाद्य सुरक्षा लाभ दिए जाते हैं।

नए प्रस्ताव से तमिलनाडु में कुपोषण और भखमरी का खतरा

विजय ने कहा कि तमिलनाडु में चावल मुख्य भोजन है और यह रोजाना के खाने का आधार है, जिसमें इडली, डोसा, पोंगल और आम दोपहर का भोजन शामिल है। उन्होंने कहा कि सब्सिडी वाले चावल में किसी भी तरह की कटौती से गरीब परिवारों को खुले बाजार से खाना खरीदने के लिए मजबूर होना पड़ेगा, जिससे उन पर आर्थिक बोझ बढ़ेगा और वे भुखमरी और कुपोषण का शिकार हो सकते हैं। उन्होंने आगे कहा कि प्रस्तावित बदलाव का असर तमिलनाडु के उन 15.75 लाख AAY परिवारों पर खास तौर पर पड़ेगा जिनमें परिवार के सदस्यों की संख्या पाँच से कम है (इनमें लगभग 58.51 लाख लोग शामिल हैं), जबकि छोटे परिवार वाले दूसरे राज्यों में भी ऐसा ही असर देखने को मिलेगा।प्रधानमंत्री से दखल देने की अपील करते हुए, मुख्यमंत्री ने केंद्र सरकार से अनुरोध किया कि 'अंत्योदय अन्न योजना' के तहत प्रति परिवार प्रति माह 35 किलोग्राम अनाज देने का मौजूदा नियम बनाए रखा जाए, चाहे परिवार में सदस्यों की संख्या कितनी भी हो; जैसा कि 2013 में 'राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम' लागू होने के बाद से होता आ रहा है। उन्होंने उम्मीद जताई कि तमिलनाडु द्वारा लगभग 70 लाख गरीब नागरिकों की ओर से उठाए गए मुद्दों पर केंद्र सरकार सकारात्मक रूप से विचार करेगी।

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