पत्नी को मिली राहत, पति से हर महीनें 9 هزار रुपये भरण-पोषण का आदेश
सिरमौर की एक महिला को घरेलू हिंसा के मामले में राहत मिली है। अदालत ने पति से हर महीनें 9 हजार रुपये भरण-पोषण देने का आदेश दिया है। यह राशि याचिका दाखिल होने की तिथि से लेकर मामले के अंतिम निपटारे तक देनी होगी।

सौजन्य से:- Amar Ujala
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Sirmour News: अदालत 6
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पत्नी को मिली बड़ी राहत : पति देगा
हर माह 9 हजार रुपये गुजारा भत्ता
घरेलू हिंसा मामले में अदालत का अंतरिम आदेश, अंतिम फैसले तक जारी रहेगी राशि
संवाद न्यूज एजेंसी
नाहन (सिरमौर)। घरेलू हिंसा के एक मामले में मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी (सीजेएम) की अदालत ने पीड़ित महिला को अंतरिम राहत प्रदान करते हुए उसके पति को हर माह 9 हजार रुपये भरण-पोषण देने का आदेश दिया है। यह राशि याचिका दाखिल होने की तिथि से लेकर मामले के अंतिम निपटारे तक देनी होगी।
महिला ने अदालत में दायर याचिका में आरोप लगाया था कि विवाह के बाद उसे लगातार मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना का सामना करना पड़ा। उसने यह भी कहा कि उसे वैवाहिक घर से निकाल दिया गया और उसके पास आजीविका का कोई साधन नहीं है। ऐसे में जीवन-यापन के लिए अंतरिम भरण-पोषण दिए जाने की मांग की गई। दूसरी ओर, पति ने सभी आरोपों को निराधार बताते हुए दावा किया कि उसकी मासिक आय सीमित है और वह अपनी वृद्ध मां तथा दो बालिग बेटियों की जिम्मेदारी भी निभा रहा है। साथ ही उसने यह भी कहा कि पत्नी स्वयं आय अर्जित करती है।
दोनों पक्षों की दलीलें और उपलब्ध दस्तावेजों का अवलोकन करने के बाद अदालत ने कहा कि मामले के आरोप-प्रत्यारोप का अंतिम निर्णय साक्ष्यों के आधार पर सुनवाई के दौरान किया जाएगा। फिलहाल यह स्पष्ट है कि महिला को पति की ओर से नियमित आर्थिक सहायता नहीं मिल रही है। अदालत ने यह भी माना कि पति की दोनों बेटियां बालिग हैं और उसकी मां को पेंशन प्राप्त होती है। इन तथ्यों को ध्यान में रखते हुए अदालत ने महिला के पक्ष में अंतरिम राहत देते हुए 9 हजार रुपये प्रतिमाह भरण-पोषण देने का आदेश पारित किया। अदालत ने स्पष्ट किया कि यह आदेश केवल अंतरिम राहत से संबंधित है।-- -- -- --
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हर माह 9 हजार रुपये गुजारा भत्ता
घरेलू हिंसा मामले में अदालत का अंतरिम आदेश, अंतिम फैसले तक जारी रहेगी राशि
संवाद न्यूज एजेंसी
नाहन (सिरमौर)। घरेलू हिंसा के एक मामले में मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी (सीजेएम) की अदालत ने पीड़ित महिला को अंतरिम राहत प्रदान करते हुए उसके पति को हर माह 9 हजार रुपये भरण-पोषण देने का आदेश दिया है। यह राशि याचिका दाखिल होने की तिथि से लेकर मामले के अंतिम निपटारे तक देनी होगी।
महिला ने अदालत में दायर याचिका में आरोप लगाया था कि विवाह के बाद उसे लगातार मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना का सामना करना पड़ा। उसने यह भी कहा कि उसे वैवाहिक घर से निकाल दिया गया और उसके पास आजीविका का कोई साधन नहीं है। ऐसे में जीवन-यापन के लिए अंतरिम भरण-पोषण दिए जाने की मांग की गई। दूसरी ओर, पति ने सभी आरोपों को निराधार बताते हुए दावा किया कि उसकी मासिक आय सीमित है और वह अपनी वृद्ध मां तथा दो बालिग बेटियों की जिम्मेदारी भी निभा रहा है। साथ ही उसने यह भी कहा कि पत्नी स्वयं आय अर्जित करती है।
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दोनों पक्षों की दलीलें और उपलब्ध दस्तावेजों का अवलोकन करने के बाद अदालत ने कहा कि मामले के आरोप-प्रत्यारोप का अंतिम निर्णय साक्ष्यों के आधार पर सुनवाई के दौरान किया जाएगा। फिलहाल यह स्पष्ट है कि महिला को पति की ओर से नियमित आर्थिक सहायता नहीं मिल रही है। अदालत ने यह भी माना कि पति की दोनों बेटियां बालिग हैं और उसकी मां को पेंशन प्राप्त होती है। इन तथ्यों को ध्यान में रखते हुए अदालत ने महिला के पक्ष में अंतरिम राहत देते हुए 9 हजार रुपये प्रतिमाह भरण-पोषण देने का आदेश पारित किया। अदालत ने स्पष्ट किया कि यह आदेश केवल अंतरिम राहत से संबंधित है।
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