ए आई के लिए नए क़ानून लाने की तैयारी में सरकार, डीपफेक समेत इन मामलों को करेगी कवर
भारत सरकार एक नए क़ानून की तैयारी में है जो एआई के खतरों को देखते हुए लाया जाएगा. इस कानून में डीपफेक, ऑनलाइन धोखाधड़ी और जिम्मेदारी के मुद्दों को शामिल किया जाएगा. मौजूदा कानून कुछ हद तक एआई की समस्याओं को हल कर सकते हैं, लेकिन सरकार का मानना है कि वे पूरी तरह से तैयार नहीं हैं.

सौजन्य से:- ABP News
एआई के लिए नया कानून लाने की तैयारी में सरकार, डीपफेक समेत इन मामलों को करेगा कवर
India AI Law: एआई के खतरों को देखते हुए भारत सरकार नया कानून बनाने पर विचार कर रही है. मौजूदा कानून कुछ मुद्दों को हैंडल कर सकते हैं, लेकिन ये सारे जोखिमों को कवर नहीं करते.
- केंद्र सरकार AI के दुरुपयोग रोकने को नया कानून लाएगी।
- मौजूदा कानून AI से जुड़ी समस्याओं के लिए पर्याप्त नहीं हैं।
- डीपफेक, ऑनलाइन धोखाधड़ी और जवाबदेही कानून में शामिल होगी।
India AI Law: बीते कुछ वर्षों में एआई लगातार और बहुत तेजी से बदल रही है. अनगिनत फायदों के साथ-साथ इस टेक्नोलॉजी को लेकर कुछ चिंताएं भी सामने आ रही हैं. इन्हें देखते हुए केंद्र सरकार एक नया कानून ला सकती है. इसमें सोशल मीडिया और साइबर स्पेस में एआई के मिसयूज को रोकने के लिए प्रावधान किए जाएंगे. प्रस्तावित कानून में डीपफेक, ऑनलाइन स्कैम, प्राइवेसी इश्यू, कॉपीराइट प्रॉब्लम और एआई सिस्टम के नुकसान पहुंचाने पर जिम्मेदारी तय करने जैसे मुद्दों को कवर किया जा सकता है. आईटी मंत्रालय का कहना है कि मौजूदा नियम एआई से जुड़ी कुछ समस्याओं को कवर करते हैं, लेकिन लगातार नए मुद्दे भी सामने आ रहे हैं.
क्यों पड़ रही नए कानून की जरूरत?
रिपोर्ट्स के मुताबिक, सरकार का मानना है कि मौजूदा कानूनों को इंसानी व्यवहार को देखते हुए लाया गया था और इनमें एआई के काम करने के तरीके को शामिल नहीं किया गया है. ये कानून एआई से जुड़ी कई प्रॉब्लम्स को हैंडल कर सकते हैं, लेकिन इन कानूनों को इसके लिए डिजाइन नहीं किया गया था. आईटी मंत्रालय के सचिव एस कृष्णन ने कहा कि अभी के कानून कुछ हद तक डीपफेक और कंटेट लेबलिंग जैसे इश्यू को हैंडल कर सकते हैं, लेकिन वो एआई से जुड़े जोखिमों से निपटने के लिए काफी नहीं हैं. उन्होंने पुष्टि की है कि सरकार एआई के लिए एक कानूनी ढांचा लाने पर एक्सपर्ट्स के साथ बातचीत कर रही है.
मौजूदा कानूनों में एआई की गलती की जिम्मेदारी तय नहीं
भारत में लागू मौजूदा कानूनों में इस बात को लेकर स्पष्टता नहीं है कि अगर एआई कोई गलती करती है तो उसका जिम्मेदार कौन होगा. दरअसल, एआई को लेकर उसे बनाने वाली कंपनियां भी यह नहीं बता सकती कि किसी सिस्टम ने कोई खास फैसला क्यों लिया है. उदाहरण के तौर पर एक सेल्फ ड्राइविंग कार से कोई एक्सीडेंट हो जाए या एआई रोबोट सर्जरी करते समय कोई गड़बड़ हो जाए तो अभी के कानून में यह साफ नहीं है कि इसके लिए कंपनी, यूजर या किसी और को इसके लिए जिम्मेदार माना जाए. इसी तरह कॉपीराइट और डेटा के मामले में भी स्पष्टता की जरूरत है.
डीपफेक वीडियो को लेकर भी सरकार चिंतित
बाकी सारे मुद्दों के साथ-साथ सरकार डीपफेक वीडियो और क्लोन वॉइस तैयार करने में एआई के यूज को लेकर भी चिंतित है और इस बारे में लगातार विचार हो रहा है. डीपफेक वीडियो और ऑडियो क्लोन से फ्रॉड और पहचान चोरी का बड़ा खतरा बना हुआ है. ऐसा कंटेट सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल भी होता है. ऐसे में किसी वीडियो और ऑडियो क्लिप के खिलाफ कदम उठाने से पहले ही यह लाखों लोगों तक पहुंच चुका होता है.
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