स्मार्ट मीटर को लेकर अदालत ने दिया बड़ा झटका, उपभोक्ता की सहमति के बिना नहीं लगा सकते
हमीरपुर की सिविल कोर्ट ने स्मार्ट मीटर लगाने की कोशिश करने वाले हिमाचल प्रदेश बिजली बोर्ड को बड़ा झटका दिया है। अदालत ने किसी उपभोक्ता की सहमति के बिना स्मार्ट मीटर लगाने के लिए उसे बाध्य नहीं किया जा सकता है। अदालत ने यह भी कहा कि स्मार्ट मीटर न लगाने के आधार पर बिजली आपूर्ति बाधित नहीं की जा सकती है।

सौजन्य से:- Jagran
स्मार्ट मीटर पर हिमाचल बिजली बोर्ड को अदालत से झटका, हमीरपुर कोर्ट ने कहा- उपभोक्ता की सहमति के बिना नहीं लगा सकते
हमीरपुर सिविल कोर्ट ने आदेश दिया है कि उपभोक्ता की सहमति के बिना स्मार्ट मीटर नहीं लगाए जा सकते और इनकार करने पर बिजली आपूर्ति बाधित नहीं की जा सकती। ...और पढ़ें
HighLights
- उपभोक्ता की सहमति के बिना स्मार्ट मीटर नहीं लगा सकते।
- स्मार्ट मीटर न लगाने पर बिजली कनेक्शन नहीं कटेगा।
- हमीरपुर कोर्ट ने बिजली बोर्ड को दिया बड़ा झटका।
संवाद सहयोगी, हमीरपुर। हिमाचल प्रदेश में स्मार्ट मीटर लगाने को लेकर चल रहे विवाद के बीच हमीरपुर की सिविल कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण अंतरिम आदेश पारित किया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि किसी उपभोक्ता की सहमति के बिना उसके घर या व्यावसायिक प्रतिष्ठान में स्मार्ट मीटर लगाने के लिए उसे बाध्य नहीं किया जा सकता। अदालत ने यह भी माना कि केवल स्मार्ट मीटर लगाने से इनकार करने के आधार पर बिजली आपूर्ति बाधित करना उचित नहीं है और संबंधित उपभोक्ता की बिजली पुराने मीटर के माध्यम से बहाल की जाए।
स्मार्ट मीटर न लगाने पर दी थी कनेक्शन काटने की चेतावनी
मामला जयमल सिंह की ओर से एसडीओ, हिमाचल प्रदेश राज्य विद्युत बोर्ड लिमिटेड एचपीएसईबीएल लंबलू के खिलाफ दायर याचिका से जुड़ा है। याचिका में कहा गया कि बिजली बोर्ड ने नोटिस जारी कर स्मार्ट मीटर न लगवाने की स्थिति में बिजली कनेक्शन काटने की चेतावनी दी थी। इसे चुनौती देते हुए अदालत से हस्तक्षेप की मांग की गई थी।
बिजली बोर्ड ने दी यह दलील
सुनवाई के दौरान बिजली बोर्ड की ओर से दलील दी गई कि राज्य सरकार की नीति के तहत व्यावसायिक परिसरों में स्मार्ट मीटर लगाए जा रहे हैं तथा बिजली अधिनियम, 2003 के प्रविधान के अनुसार उपयुक्त मीटर के माध्यम से ही बिजली आपूर्ति की जा सकती है।
इसे अनिवार्य नहीं माना जा सकता
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद सिविल जज टीना मल्होत्रा की अदालत ने अपने अंतरिम आदेश में कहा कि वर्तमान में स्मार्ट मीटर योजना को बढ़ावा दिया जा रहा है, लेकिन इसे अनिवार्य नहीं माना जा सकता। अदालत ने यह भी टिप्पणी की कि अधिनियम के प्रविधानों की ऐसी व्याख्या नहीं की जा सकती, जिसके आधार पर उपभोक्ताओं पर स्मार्ट मीटर लगाने का दबाव बनाया जाए या बिजली कनेक्शन काट दिया जाए।
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10 दिन में बहाल किया जाए कनेक्शन
अदालत ने बिजली बोर्ड को निर्देश दिए हैं कि याचिकाकर्ता की दुकान की बिजली आपूर्ति पुराने मीटर के माध्यम से आदेश की तिथि से 10 दिन के भीतर बहाल की जाए। साथ ही स्पष्ट किया कि यह आदेश केवल अंतरिम राहत के रूप में पारित किया गया है और मामले के अंतिम गुण-दोष पर फैसला नियमित सुनवाई के बाद किया जाएगा।
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