बिलकिस बानो मामले के कैदी राधेश्याम शाह को सात दिन की पैरोल मिली
गुजरात हाईकोर्ट ने 2002 के बिलकिस बानो गैंगरेप‑हत्या केस में उम्रकैद काट रहे राधेश्याम शाह को सात दिन की पैरोल मंजूर कर दी। उनका वकील परिवार की आर्थिक स्थिति को कारण बताकर अनुरोध किया, और जेल अधिकारियों की राय को देखते हुए कोर्ट ने शर्तों के साथ अनुमति दी, जिसमें 10,000 रुपये सुरक्षा जमा और निर्दिष्ट दिनों में पुलिस स्टेशन में उपस्थित रहना शामिल है।

सौजन्य से:- ETV Bharat
बिलकिस बानो मामले के दोषी राधेश्याम शाह को गुजरात हाईकोर्ट ने दी 7 दिन की पैरोल मिली
गुजरात हाई कोर्ट ने बिलकिस बानो मामले के एक दोषी को सात दिन की पैरोल प्रदान की है.
Published : September 20, 2026 at 1:23 PM IST
अहमदाबाद: गुजरात हाईकोर्ट ने 2002 के बिलकिस बानो गैंगरेप और मर्डर केस में उम्रकैद की सजा काट रहे 11 दोषियों में से एक राधेश्याम भगवानदास शाह को 7 दिनों की पैरोल दे दी है. राधेश्याम शाह की तरफ से वकील केडी परमार ने हाई कोर्ट को बताया कि राधेश्याम शाह को परिवार की वित्तीय हालत को देखते हुए और परिवार के वित्तीय मामलों में मदद करने के लिए पैरोल की जरूरत थी.
वकील ने कोर्ट को यह भी बताया कि शाह को इससे पहले दिसंबर 2025 में पैरोल दी गई थी. कोर्ट ने आवेदन में दी गई दलीलों और जेल अधिकारियों की राय पर विचार करने के बाद पैरोल देने का फैसला किया. जस्टिस संजीव जे. ठाकर की कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि आवेदन में दिए गए कारणों और जेल अधिकारियों की राय को देखते हुए, याचिकाकर्ता के पक्ष में अपने विवेक का इस्तेमाल करना सही लगता है.
कोर्ट के आदेश के मुताबिक, राधेश्याम शाह को असल रिहाई की तारीख से 7 दिनों की पैरोल दी जाएगी. इसके लिए उन्हें संबंधित जेल अधिकारियों की संतुष्टि के लिए 10,000 रुपये का निजी मुचलका भरना होगा. साथ ही पैरोल का समय खत्म होने पर उन्हें तुरंत जेल अधिकारियों के सामने पेश होना होगा. इसके अलावा, पैरोल के दौरान शाह को रिहाई के तीसरे और पांचवें दिन सबसे पास के पुलिस स्टेशन में अपनी मौजूदगी दर्ज करानी होगी.
बता दें कि, राधेश्याम शाह समेत 11 दोषियों को 2002 के गुजरात दंगों के दौरान किए गए गैंग रेप और हत्या के अपराधों के लिए 2008 में उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी. इस केस का ट्रायल गुजरात के बाहर महाराष्ट्र में हुआ था और मुंबई की एक स्पेशल कोर्ट ने 11 आरोपियों को दोषी ठहराते हुए 2008 में उम्रकैद की सजा सुनाई थी.
इस केस में जरूरी कानूनी कार्रवाई की वजह से राधेश्याम शाह का नाम पहले भी चर्चा में आया था. वह उन 11 दोषियों में से अकेले दोषी थे जिन्होंने इस मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था कि जल्दी रिहाई यानी माफी पर फैसला लेने का अधिकार किस सरकार के पास है. मई 2022 में, सुप्रीम कोर्ट ने गुजरात सरकार से 1992 की माफी पॉलिसी के हिसाब से उनके आवेदन पर विचार करने को कहा. इसके बाद गुजरात सरकार ने अगस्त 2022 में 11 दोषियों को माफी दे दी थी.
लेकिन, 8 जनवरी 2024 को सुप्रीम कोर्ट ने गुजरात सरकार की दी गई माफी को खारिज कर दिया था. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस मामले में माफी पर फैसला लेने के लिए सही सरकार गुजरात सरकार नहीं बल्कि महाराष्ट्र सरकार है. इसके बाद सभी 11 दोषियों को वापस जेल जाने का आदेश दिया गया.
ये भी पढ़ें- कोर्ट में जमा पैसे और ब्याज के नियमों में होगा बड़ा बदलाव, सुप्रीम कोर्ट ने लॉ कमीशन को सौंपी बड़ी जिम्मेदारी
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