होमसुप्रीम कोर्टअरावली संरक्षण में नई मांग: सुप्रीम कोर्ट की कमेटी ने रिपोर्ट का समय 28 फ़रवरी 2027 तक बढ़ाने की याचिका दायर की
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अरावली संरक्षण में नई मांग: सुप्रीम कोर्ट की कमेटी ने रिपोर्ट का समय 28 फ़रवरी 2027 तक बढ़ाने की याचिका दायर की

सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित अरावली हाई‑पावर्ड कमेटी ने अपनी अंतिम रिपोर्ट प्रस्तुत करने के लिये छह महीने का अतिरिक्त समय माँगा है, जिससे अंतिम जमा तारीख 28 फ़रवरी 2027 निर्धारित होगी। आयोग ने 6‑11 अगस्त को क्षेत्रीय सर्वेक्षण किया, 680 से अधिक आवेदन प्राप्त किए और बताया कि भू‑वैज्ञानिक, जल‑वैज्ञानिक, पारिस्थितिक तथा सामाजिक‑आर्थिक पहलुओं की गहरी जांच के बिना कोई ठोस निष्कर्ष निकालना संभव नहीं है।

4 सितंबर 2026 को 03:32 pm बजे
अरावली संरक्षण में नई मांग: सुप्रीम कोर्ट की कमेटी ने रिपोर्ट का समय 28 फ़रवरी 2027 तक बढ़ाने की याचिका दायर की

सौजन्य से:- ETV Bharat

अरावली संरक्षण पर बड़ा अपडेट: सुप्रीम कोर्ट की कमेटी ने मांगा 6 महीने का और वक्त, अब इस तारीख को आएगी अंतिम रिपोर्ट

कमेटी ने कहा- अरावली के पर्यावरण, भूवैज्ञानिक और सामाजिक-आर्थिक पहलुओं की गहरी वैज्ञानिक जांच के लिए अतिरिक्त समय मिलना बेहद आवश्यक.

By Sumit Saxena

Published : September 4, 2026 at 8:50 PM IST

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित अरावली हाई-पावर्ड कमेटी ने शीर्ष अदालत से अपनी अंतिम रिपोर्ट सौंपने के लिए छह महीने का और समय मांगा है. 31 अगस्त को दाखिल की गई अपनी रिपोर्ट में, इस कमेटी ने कहा कि इस बेहद संवेदनशील पर्वत श्रृंखला का केवल एक "व्यापक और मजबूत" आकलन ही इसके निष्कर्षों को सही साबित कर सकता है, और इसीलिए समय सीमा बढ़ाना बेहद जरूरी है.

कमेटी ने सुप्रीम कोर्ट से अनुरोध किया है कि अंतिम रिपोर्ट सौंपने की आखिरी तारीख को बढ़ाकर 28 फरवरी, 2027 कर दिया जाए. कमेटी ने अरावली की ज़मीनी स्थिति का जायजा लेने के लिए 6 अगस्त से 11 अगस्त के बीच इलाकों का दौरा भी किया था, जिसके दौरान आम जनता की सुनवाई भी की गई थी.

पैनल ने इस बात पर ज़ोर दिया कि अरावली से जुड़े मुद्दे सिर्फ तकनीकी सीमाओं को तय करने से कहीं आगे के हैं, और इन्हें केवल किसी एक भौगोलिक मापदंड या किसी एक सबूत के आधार पर ठीक से नहीं सुलझाया जा सकता. कमेटी ने आगे कहा कि इसके लिए अरावली के व्यापक भूवैज्ञानिक, भू-आकृतिक, जलवैज्ञानिक, जैव-भौगोलिक, पारिस्थितिक, जैव-विविधता, खनिज-संसाधन और सामाजिक-आर्थिक पहलुओं की गहरी जांच करना बेहद आवश्यक है.

इस साल मई में एक अदालती आदेश के जरिए गठित यह कमेटी, अरावली पर्वत श्रृंखला की परिभाषा और उसकी सीमाओं को तय करने से जुड़ी केंद्र सरकार की रिपोर्ट की स्वतंत्र रूप से समीक्षा कर रही है. पैनल को अपनी अंतिम रिपोर्ट सौंपने के लिए 31 अगस्त की समय सीमा दी गई थी.

पैनल ने अपनी अनुपालन रिपोर्ट में कहा कि जियोस्पेशियल असेसमेंट, संवेदनशीलता विश्लेषण, विशेषज्ञों द्वारा जांच और जमीनी सत्यापन की वैज्ञानिक प्रक्रिया को पूरा करने के लिए अतिरिक्त समय मिलना बेहद जरूरी था. उसने आगे कहा कि एक व्यापक और मजबूत रिपोर्ट तैयार करने के लिए हितधारकों के सुझावों और उन सभी के समन्वय की भी आवश्यकता है.

पैनल ने कहा कि अरावली इकोसिस्टम लैंडस्केप ढांचा अलग-अलग सामाजिक-पारिस्थितिक विशेषताओं वाले क्षेत्रों की पहचान करने और उनके संरक्षण व प्रबंधन के लिए अलग-अलग तरीकों को अपनाने में मदद कर सकता है.

उसने सुझाव दिया कि इस ढांचे की समीक्षा की जानी चाहिए और संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञों व हितधारकों से इस पर प्रतिक्रिया ली जानी चाहिए. रिपोर्ट के अनुसार, पैनल को 26 अगस्त तक ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों से लगभग 680 आवेदन प्राप्त हुए थे.

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