सुप्रीम कोर्ट को HPC की अनुपालन रिपोर्ट: अरावली की सीमा 100 मीटर ऊंचाई से नहीं, इकोसिस्टम‑आधारित निर्धारण होगा
हाई पावर कमेटी ने बताया कि केवल ऊँचाई के आधार पर अरावली की पहचान पर्याप्त नहीं है और अब पहाड़, जंगल, जल प्रणाली, जैव विविधता और भूजल पुनर्चार्ज क्षेत्रों के आपसी संबंधों को मिलाकर एक व्यापक इकोसिस्टम लैंडस्केप तैयार किया जाएगा। इसके लिए समिति ने अतिरिक्त छह महीने का समय माँगा है और अजमेर के विभिन्न क्षेत्रों में सर्वेक्षण एवं 680 अभ्यावेदन एकत्र किए हैं।

सौजन्य से:- bhaskar.com
- Hindi News
- Local
- Rajasthan
- Ajmer
- HPC Submitted Compliance Report To The Supreme Court
एचपीसी ने सुप्रीम कोर्ट को सौंपी अनुपालन रिपोर्ट:100 मीटर की ऊंचाई से नहीं तय होगी अरावली की पहचान, पूरा इकोसिस्टम बनेगा आधार
- कॉपी लिंक
इस मामले में कल होनी है सुनवाई
अरावली पर्वतमाला की पहचान अब केवल पहाड़ों की ऊंचाई से तय नहीं होगी। सुप्रीम कोर्ट की ओर से गठित हाई पावर कमेटी (एचपीसी) ने अपनी अनुपालन रिपोर्ट में कहा है कि 100 मीटर की ऊंचाई को आधार बनाकर अरावली की सीमा तय करना वैज्ञानिक रूप से पर्याप्त नहीं है।
कमेटी अब पहाड़, जंगल, जल प्रणालियों, जैव विविधता और भूजल रिचार्ज क्षेत्रों के आपसी जुड़ाव के आधार पर ‘अरावली इकोसिस्टम लैंडस्केप’ तैयार करने की दिशा में काम कर रही है। अंतिम सिफारिशों के लिए कमेटी ने सुप्रीम कोर्ट से छह माह का अतिरिक्त समय मांगा है। इस मामले में सोमवार को सुनवाई होनी है।
कमेटी ने सर्वे कर देखा अरावली का आपसी जुड़ाव कमेटी ने अगस्त में राजस्थान के मैदानी दौरे के दौरान अजमेर जिले के किशनगढ़ क्षेत्र, बिचून और कालवाड़ के आसपास के इलाकों का निरीक्षण किया। विभिन्न पक्षों से भी बातचीत की गई। अध्ययन में पहाड़ों की ऊंचाई के साथ भू-आकृति, जल निकासी, भूजल संरचना, जैव विविधता, खनन और स्थानीय सामाजिक-आर्थिक परिस्थितियों का आकलन किया गया।
खनन से जल निकासी और जैव विविधता पर असर भी जांचा: कमेटी खनन, पत्थर की खदानों, स्टोन क्रशर तथा बजरी और रेत खनन के कारण जल निकासी, भू-आकृति और जैव विविधता पर पड़ने वाले प्रभाव का भी अध्ययन कर रही है। कमेटी को अब तक किसानों, स्थानीय समुदायों, खनन क्षेत्र से जुड़े लोगों, पर्यावरण संगठनों और सरकारी संस्थाओं से 680 अभ्यावेदन मिले हैं।
जवाई में तेंदुआ आवास क्षेत्र के एक किमी दायरे में नए निर्माण पर रोक
हाईकोर्ट ने जवाई क्षेत्र में तेंदुओं के महत्वपूर्ण आवास, गुफाओं, प्रजनन स्थलों और वन्यजीव कॉरिडोर के संरक्षण को लेकर महत्वपूर्ण आदेश जारी किया है। कोर्ट ने तेंदुआ आवास की प्रमुख विशेषताओं के आसपास एक किमी क्षेत्र को लेपर्ड हैबिटेट कंस्ट्रक्शन-कंट्रोल जोन घोषित करते हुए इस क्षेत्र में नए वाणिज्यिक, आवासीय और सिविक निर्माण पर रोक लगाई है।
डॉ. जस्टिस पुष्पेंद्र सिंह भाटी और जस्टिस रेखा बोराणा की खंडपीठ ने कहा कि यह व्यवस्था जवाई के पूरे लैंडस्केप में लागू होगी। इसमें तेंदुओं की गुफाएं, डेन, प्रजनन एवं विश्राम स्थल, गुफाओं वाली पहाड़ियां, उनसे जुड़े फुटहिल क्षेत्र, वन्यजीव कॉरिडोर, वेटलैंड, बैकवाटर और जलस्रोत शामिल हैं।
इन क्षेत्रों में पहाड़ काटने, ब्लास्टिंग, खुदाई, सड़क या ट्रैक निर्माण तथा वन्यजीवों की आवाजाही बाधित करने वाली गतिविधियों पर भी रोक रहेगी। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अधिसूचित जवाई लेपर्ड कंजर्वेशन रिजर्व की सीमा से एक किलोमीटर के भीतर नए होटल, रिसॉर्ट, गेस्ट हाउस, होमस्टे, टूरिज्म कैंप जैसी व्यावसायिक गतिविधियां और नए औद्योगिक कार्य नहीं किए जा सकेंगे। इस क्षेत्र में भूमि रूपांतरण पर भी रोक रहेगी। हालांकि मौजूदा गांवों की आबादी में बोना फाइंड आवासीय निर्माण, आवश्यक मरम्मत, स्कूल, आंगनबाड़ी, डिस्पेंसरी, पेयजल और जरूरी सार्वजनिक सुविधाओं को अपवाद दिया गया है। परंतु ऐसे कार्य भी वन्यजीवों की आवाजाही में बाधा नहीं डाल सकेंगे।
Powered by Nyaya 247 News
संबंधित ख़बरें
इसी विषय की और ख़बरें →
सुप्रीम कोर्ट: बरी करने का आदेश तभी उलटा जा सकता है जब ट्रायल कोर्ट का दृष्टिकोण विकृत हो

सुप्रीम कोर्ट ने डीएलएफ प्राइमस में ब्रोशर‑उल्लेखित योजना के उल्लंघन पर सीबीआई को प्रारम्भिक जांच का आदेश

सुप्रीम कोर्ट ने डॉक्टरों पर हिंसा करने वाले राजनेताओं को तुरन्त हिरासत में रखने का आदेश

सुप्रीम कोर्ट ने लखनऊ में अवैध इमारतों की धीमी सीलिंग पर कड़ी नाराज़गी जताई

सुप्रीम कोर्ट ने डीएलएफ प्राइमस में ब्रोशर के अनुसार निर्माण का निर्देश दिया

सुप्रीम कोर्ट की टीम ने लखनऊ में 51 अवैध व्यावसायिक निर्माणों का सर्वे किया

सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की सिफ़ारिश पर केंद्र ने 8 हाईकोर्ट में नए चीफ जस्टिस नियुक्त किये

बारिश की बूँदों में भी शास्त्रीनगर की महिलाओं ने धरना नहीं छोड़ा, 21 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई तय
ताज़ा ख़बरें
- 12 सितंबर को राष्ट्रीय लोक अदालत: ट्रैफिक जुर्माना, बिजली‑पानी के बिल सहित कई मुद्दों का त्वरित निपटारा
- बारिश में भी शास्त्रीनगर की महिलाएँ धरना देती रहीं, 21 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई तय
- भारत‑रूस ने न्यायिक सहयोग को सुदृढ़ करने की प्रतिबद्धता दोहराई
- अरावली संरक्षण में नई मांग: सुप्रीम कोर्ट की कमेटी ने रिपोर्ट का समय 28 फ़रवरी 2027 तक बढ़ाने की याचिका दायर की
- सुप्रीम कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट की रिपोर्ट न जमा करने पर कड़ा इशारा किया
- सुप्रीम कोर्ट ने एनएसई के ‘अनुचित पहुंच’ विवाद में नियामक की याचिका खारिज की
- सुप्रीम कोर्ट ने थाने में जब्त गाड़ियों को जर्जर होने से पहले मालिकों को लौटाने का निर्देश दिया
- सुप्रीम कोर्ट ने टीएमसी होर्डिंग विवाद में हाईकोर्ट को फैसला देने का निर्देश, सुनवाई से मना किया

