जेल में गर्भवती के जन्म की तुलना भगवान कृष्ण से करने वाली अदालत ने दी जमानत
नासिक के एक मामले में गर्भवती आरोपी निदा खान को जमानत मिल गई। अदालत ने कहा कि जेल में बच्चे को जन्म देना किसी भी महिला के लिए असहनीय है, जिसे भगवान कृष्ण के जन्म की तुलना में बताया गया।

सौजन्य से:- AajTak
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नासिक TCS मामले में गर्भवती आरोपी निदा खान को जमानत मिल गई. कोर्ट ने कहा कि जेल में बच्चे को जन्म देना किसी भी महिला के लिए असहनीय है. अदालत ने इसकी तुलना भगवान कृष्ण के जन्म की परिस्थितियों से की. हालांकि अपने आदेश में अदालत ने कहा कि पूरी जांच से पता चलता है कि खान ने सह-आरोपियों की मदद से पीड़िता का ब्रेनवॉश करने और उसके वैचारिक विचारों और धर्म को बदलने की कोशिश की.
यौन उत्पीड़न और धर्म परिवर्तन के मामले की जांच का हवाला देते हुए आदेश में यह भी कहा गया कि उन्होंने पीड़िता को यह समझाने की कोशिश की कि हिंदू धर्म में आपत्तिजनक कहानियां हैं.'
अदालत ने निदा खान को 6 जुलाई को जमानत दे दी थी, लेकिन आदेश गुरुवार को जारी किया गया, जिसमें जज ने कहा कि FIR में खान की कथित भूमिका का स्पष्ट उल्लेख है. बता दें कि निदा को करीब दो महीने पहले गिरफ्तार किया गया था.
जज ने बचाव पक्ष की इस दलील को मानते हुए उसकी याचिका स्वीकार कर ली कि वह पांच महीने की गर्भवती थी.
भगवान कृष्ण के जन्म की परिस्थितियों से तुलना
अदालत ने कहा, "भगवान कृष्ण की तरह जेल में बच्चे को जन्म देने का सदमा या उससे जुड़ा सामाजिक कलंक किसी के लिए भी सहने योग्य नहीं है."
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अदालत ने आगे कहा, "ऐसी दर्दनाक स्थिति से बचने और नवजात शिशु के स्वागत और समग्र कल्याण के लिए याचिकाकर्ता-आरोपी के पक्ष में न्यायिक विवेक का इस्तेमाल करना उचित और सही होगा."
जज ने कहा कि गर्भवती याचिकाकर्ता को हिरासत में रखने का कोई मकसद नहीं है, क्योंकि जांच पूरी हो चुकी है और चार्जशीट दाखिल की जा चुकी है.
गर्भावस्था के अलावा, निदा खान के वकील राहुल कासलीवाल ने भी दावा किया कि वह निर्दोष है और उसे झूठे मामले में फंसाया गया है. उन्होंने बताया कि खान उच्च शिक्षित थी और अप्रैल 2026 में नौकरी से निकाले जाने से पहले TCS में बतौर एसोसिएट काम करती थी.
'ब्रेनवॉश और धर्म परिवर्तन की कोशिश के पर्याप्त सबूत'
सरकारी वकील विजय गायकवाड़ ने वकीलों मिलिंद कुरकुटे और नितिन पंडित के साथ मिलकर खान और सह-आरोपी दानिश शेख की जमानत याचिकाओं का विरोध किया.
उनका तर्क था कि मामले की जांच के दौरान यौन उत्पीड़न और धर्म परिवर्तन के लिए मजबूर करने के पर्याप्त सबूत सामने आए हैं.
अभियोजन पक्ष ने कहा कि शेख ने धर्म परिवर्तन के मकसद से महिला पीड़िता को एक इस्लामिक किताब और बुर्का दिया था. उन्होंने तर्क दिया कि इन सभी बातों से पता चलता है कि महिला का जान-बूझकर यौन शोषण किया गया और उसका धर्म परिवर्तन कराने की कोशिशें की गईं.
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अदालत ने खान को 75,000 रुपये के पर्सनल बॉन्ड और उतनी ही राशि की एक सॉल्वेंट जमानत पर जमानत दे दी.
नासिक पुलिस की SIT कर रही है 9 मामलों की जांच
नासिक पुलिस की एक SIT, TCS यूनिट में महिला कर्मचारियों के शोषण, जबरन धर्म परिवर्तन की कोशिश, धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने, छेड़छाड़ और मानसिक उत्पीड़न के मामलों में दर्ज कुल 9 मामलों की जांच कर रही है.
यह खास मामला देवलाली कैंप पुलिस स्टेशन में भारतीय न्याय संहिता की धारा 69 (धोखाधड़ी आदि के जरिए यौन संबंध बनाना), 65 (यौन उत्पीड़न) और 299 (धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाना) के तहत दर्ज FIR से जुड़ा है. आरोपियों पर अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत भी मामला दर्ज किया गया है, क्योंकि पीड़िता दलित है.
जांच के अनुसार, निदा खान की भूमिका पीड़िता को बुर्का और धार्मिक साहित्य देकर उसका ब्रेनवॉश करने की थी. उस पर पीड़िता के मोबाइल फ़ोन पर इस्लाम से जुड़े ऐप्स इंस्टॉल करने, नमाज पढ़ने का तरीका सिखाने के लिए उसके घर जाने और हिजाब पहनने का तरीका दिखाने का भी आरोप है.
मामले सामने आने के बाद, TCS ने साफ किया कि उसने लंबे समय से किसी भी तरह के उत्पीड़न और जबरदस्ती के प्रति ज़ीरो-टॉलरेंस पॉलिसी अपनाई है और नासिक ऑफिस में यौन उत्पीड़न में शामिल कर्मचारियों को सस्पेंड कर दिया गया है.
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