बुलंदशहर में 5 साल बाद राहुल को दुष्कर्म व POCSO आरोपों से पूरी तरह बरी
विशेष POCSO अदालत ने साक्ष्यों की कमी और अभियोजन पक्ष के बयानों में असंगतियों के कारण राहुल को सभी आरोपों से निराधार ठहराते हुए बरी कर दिया। यह मामला दिसंबर 2020 में दर्ज हुआ था, जिसमें एक किशोरी के साथ सामूहिक दुष्कर्म का आरोप था, पर अदालत ने आरोप सिद्ध न हो पाने पर उसे रिहा कर दिया।

सौजन्य से:- Dainik Bhaskar
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5 साल जेल में रहने के बाद युवक बरी:बुलंदशहर में सामूहिक दुष्कर्म और पॉक्सो के आरोपों से अदालत ने किया दोषमुक्त
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बुलंदशहर में करीब छह साल पुराने चर्चित दुष्कर्म मामले में विशेष पॉक्सो अदालत ने आरोपी राहुल को सभी आरोपों से दोषमुक्त कर दिया है। अतिरिक्त विशेष न्यायाधीश पॉक्सो अधिनियम (कोर्ट संख्या-1) विनीत चौधरी की अदालत ने साक्ष्यों की कमी और अभियोजन पक्ष के बयानों में विरोधाभास के आधार पर यह फैसला सुनाया। अदालत ने राहुल की रिहाई के आदेश दिए। राहुल पिछले करीब पांच साल से न्यायिक हिरासत में था।
यह मामला दिसंबर 2020 का है। एक व्यक्ति ने शिकायत दी थी कि उसकी 16 वर्षीय बेटी को राहुल और रोहित जबरन कार में बैठाकर ग्रेटर नोएडा ले गए और वहां उसके साथ सामूहिक दुष्कर्म किया। पुलिस ने दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा था और चार्जशीट दाखिल की थी। मुकदमे की सुनवाई के दौरान दूसरे आरोपी रोहित की मौत हो गई, जिसके बाद उसके खिलाफ कार्रवाई समाप्त कर दी गई।
दिसंबर 2020 में दर्ज हुआ था मुकदमा
शिकायत के आधार पर पुलिस ने राहुल और रोहित के खिलाफ केस दर्ज किया था। आरोप था कि दोनों किशोरी को जबरन कार में बैठाकर ग्रेटर नोएडा ले गए और उसके साथ सामूहिक दुष्कर्म किया। पुलिस ने जांच के बाद दोनों को गिरफ्तार कर अदालत में आरोपपत्र दाखिल किया था। इसके बाद मामला विशेष पॉक्सो अदालत में चला।
बचाव पक्ष ने रंजिश में फंसाने का दिया तर्क
राहुल के बचाव पक्ष के अधिवक्ता ने अदालत में दलील दी कि उसे रंजिश के चलते झूठा फंसाया गया है। बचाव पक्ष ने कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर) का हवाला देते हुए कहा कि पीड़िता और रोहित के बीच पहले से बातचीत होती थी। दलील में यह भी कहा गया कि घटना के समय राहुल की लोकेशन गाजियाबाद में थी और पीड़िता के मोबाइल से राहुल के साथ बातचीत का रिकॉर्ड नहीं मिला।
आरोप साबित नहीं कर सका पीड़ित पक्ष
सुनवाई के दौरान पीड़िता के बयानों में विरोधाभास और साक्ष्यों की कमी का मुद्दा उठा। अदालत ने पाया कि अभियोजन पक्ष राहुल के खिलाफ लगाए गए आरोपों को संदेह से परे साबित नहीं कर सका। इसी आधार पर अदालत ने उसे सभी आरोपों से दोषमुक्त कर दिया और रिहाई के आदेश दिए।
पांच साल बाद जेल से बाहर आने का रास्ता साफ
मुकदमे की सुनवाई के दौरान सह-आरोपी रोहित की मौत हो गई थी, जबकि राहुल करीब पांच साल तक न्यायिक हिरासत में रहा। फैसला आने के बाद राहुल और उसके परिजनों ने राहत की सांस ली। अदालत के निर्णय के साथ इस मामले में राहुल के खिलाफ मुकदमे का अंत हो गया।
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