होम›अपराध›AIIMS प्रशासन पर कोर्ट के कड़े सवाल, फर्जी नौकरी स्कीम की जाँच में CCTV डेटा सुरक्षित
अपराध

AIIMS प्रशासन पर कोर्ट के कड़े सवाल, फर्जी नौकरी स्कीम की जाँच में CCTV डेटा सुरक्षित

कोर्ट ने AIIMS के उपग्रह केंद्र में नौकरियों के नाम पर किए गए alleged फर्जीवाड़े मामले में छह प्रमुख प्रश्न उठाए, बंधक याचिकाओं को खारिज कर CCTV फुटेज व कंप्यूटर डेटा सुरक्षित रखने का आदेश दिया। प्रशासन के उपनिदेशक की उपस्थिति में AIIMS परिसर में राजदीप इंटरप्राइजेज के कार्यालय की वैधता पर भी संदेह व्यक्त किया गया, जिससे प्रशासन भी जांच के दायरे में आ गया।

9 अक्टूबर 2026 को 03:06 pm बजे
AIIMS प्रशासन पर कोर्ट के कड़े सवाल, फर्जी नौकरी स्कीम की जाँच में CCTV डेटा सुरक्षित

सौजन्य से:- Amar Ujala

{"_id":"6ac8f38abd727ba7340f3059","slug":"court-raises-sharp-questions-regarding-aiimss-role-administration-under-scrutiny-rishikesh-news-c-38-1-sdrn1040-147480-2026-10-09","type":"story","status":"publish","title_hn":"Rishikesh News: एम्स की भूमिका पर अदालत के तीखे सवाल, जांच के घेरे में प्रशासन","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}

Rishikesh News: एम्स की भूमिका पर अदालत के तीखे सवाल, जांच के घेरे में प्रशासन

Fri, 09 Oct 2026 07:30 PM IST

देहरादून ब्यूरो

संवाद न्यूज एजेंसी, ऋषिकेश

संवाद न्यूज एजेंसी, ऋषिकेश

Updated Fri, 09 Oct 2026 07:30 PM IST

विज्ञापन

अदालत ने उठाए छह अहम सवाल, सीसीटीवी फुटेज और कंप्यूटर डेटा सुरक्षित रखने के दिए आदेश

राजीव खत्री

ऋषिकेश। एम्स के किच्छा सेटेलाइट सेंटर में नौकरी दिलाने के नाम पर कथित फर्जीवाड़े मामले में अदालत ने एम्स प्रशासन की भूमिका और जांच की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल उठाए हैं। आरोपियों की जमानत याचिकाएं खारिज करते हुए अदालत ने सीसीटीवी फुटेज व कंप्यूटर डेटा सुरक्षित रखने और संबंधित अधिकारियों की भूमिका की गहन जांच के निर्देश दिए हैं। अब इस पूरे प्रकरण में एम्स प्रशासन भी जांच के घेरे में आ गया है। सुनवाई के दौरान एम्स के उपनिदेशक प्रशासन अदालत में मौजूद रहे।

अदालत ने एम्स परिसर में राजदीप इंटरप्राइजेज का कार्यालय बनाए जाने पर भी सवाल उठाया। कहा कि एम्स परिसर में राजदीप इंटरप्राइजेज का कार्यालय क्यों था, इसका कोई स्पष्टीकरण अभी तक पत्रावली पर नहीं है जबकि नियमानुसार पारदर्शिता के लिए व आम जनता के मध्य किसी प्रकार का कोई झूठा प्रभाव ना हो, इसके लिए यह आवश्यक था कि राजदीप इंटरप्राइजेज का कार्यालय एम्स परिसर के बाहर होना चाहिए था।

अदालत ने कहा कि 15 सितंबर को एम्स प्रशासन को कथित तौर पर नौकरी के नाम पर धनराशि के लेनदेन की जानकारी मिली थी। इसके बावजूद तत्काल पुलिस को सूचना क्यों नहीं दी गई और पुलिस को जांच में शामिल क्यों नहीं किया गया जबकि एम्स परिसर में ही पुलिस चौकी है, इसकी पड़ताल होनी चाहिए। अदालत ने यह भी पूछा कि आरोपियों को पकड़े जाने के बाद एफआईआर 16 सितंबर को दर्ज कराई गई। एफआईआर दर्ज कराने में देरी क्यों की गई। इस संबंध में अदालत ने एम्स के उपनिदेशक प्रशासन लेफटिनेंट कर्नल गोपाल मेहरा के विस्तृत बयान दर्ज करने की अपेक्षा की है। साथ ही यह पता लगाने को कहा है कि 15 सितंबर को एम्स प्रशासन ने जो कार्रवाई की, वह निदेशक या उपनिदेशक प्रशासन के लिखित आदेश पर हुई थी या नहीं।

विज्ञापन

अदालत ने विवेचक को मामले से जुड़े आवश्यक स्थानों के सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित कराने और एम्स के संबंधित कार्यालयों के कंप्यूटर सिस्टम से आवश्यक साक्ष्य जुटाने के निर्देश दिए हैं। साथ ही राजदीप इंटरप्राइजेज से संबंधित कार्यों की निगरानी करने वाले एम्स प्रशासन के अधिकारियों और कर्मचारियों के बयान दर्ज करने को भी कहा है। अदालत के अनुसार, इन सवालों की जांच से यह स्पष्ट करने में मदद मिलेगी कि कथित भर्ती धोखाधड़ी में एम्स का कोई अधिकारी या कर्मचारी शामिल था या नहीं।

अदालत के छह अहम सवाल

1. क्या विवेचक ने एम्स ऋषिकेश के प्रशासनिक कार्यालय से भर्ती संबंधी पत्रावलियों का अवलोकन कर उन्हें कब्जे में लिया है। क्या राजदीप इंटरप्राइजेज को संविदा भर्ती के लिए अधिकृत किया गया था?

2. कंप्यूटर डेटा की फॉरेंसिक जांच हुई या नहीं। जब्त कंप्यूटरों के सीपीयू और अन्य उपकरणों को विधि विज्ञान प्रयोगशाला भेजा गया या नहीं।

3. एम्स परिसर में एजेंसी का कार्यालय क्यों था।

4. पुलिस को तत्काल सूचना क्यों नहीं दी गई जबकि परिसर में पुलिस चौकी मौजूद है।

5. 15 सितंबर की कार्रवाई क्या निदेशक या उपनिदेशक (प्रशासन) के लिखित आदेश पर हुई थी और यदि हां तो संबंधित आदेश पत्रावली में उपलब्ध क्यों नहीं है।

5. एफआईआर दर्ज कराने में देरी क्यों हुई।

विज्ञापन

राजीव खत्री

ऋषिकेश। एम्स के किच्छा सेटेलाइट सेंटर में नौकरी दिलाने के नाम पर कथित फर्जीवाड़े मामले में अदालत ने एम्स प्रशासन की भूमिका और जांच की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल उठाए हैं। आरोपियों की जमानत याचिकाएं खारिज करते हुए अदालत ने सीसीटीवी फुटेज व कंप्यूटर डेटा सुरक्षित रखने और संबंधित अधिकारियों की भूमिका की गहन जांच के निर्देश दिए हैं। अब इस पूरे प्रकरण में एम्स प्रशासन भी जांच के घेरे में आ गया है। सुनवाई के दौरान एम्स के उपनिदेशक प्रशासन अदालत में मौजूद रहे।

अदालत ने एम्स परिसर में राजदीप इंटरप्राइजेज का कार्यालय बनाए जाने पर भी सवाल उठाया। कहा कि एम्स परिसर में राजदीप इंटरप्राइजेज का कार्यालय क्यों था, इसका कोई स्पष्टीकरण अभी तक पत्रावली पर नहीं है जबकि नियमानुसार पारदर्शिता के लिए व आम जनता के मध्य किसी प्रकार का कोई झूठा प्रभाव ना हो, इसके लिए यह आवश्यक था कि राजदीप इंटरप्राइजेज का कार्यालय एम्स परिसर के बाहर होना चाहिए था।

विज्ञापन

अदालत ने कहा कि 15 सितंबर को एम्स प्रशासन को कथित तौर पर नौकरी के नाम पर धनराशि के लेनदेन की जानकारी मिली थी। इसके बावजूद तत्काल पुलिस को सूचना क्यों नहीं दी गई और पुलिस को जांच में शामिल क्यों नहीं किया गया जबकि एम्स परिसर में ही पुलिस चौकी है, इसकी पड़ताल होनी चाहिए। अदालत ने यह भी पूछा कि आरोपियों को पकड़े जाने के बाद एफआईआर 16 सितंबर को दर्ज कराई गई। एफआईआर दर्ज कराने में देरी क्यों की गई। इस संबंध में अदालत ने एम्स के उपनिदेशक प्रशासन लेफटिनेंट कर्नल गोपाल मेहरा के विस्तृत बयान दर्ज करने की अपेक्षा की है। साथ ही यह पता लगाने को कहा है कि 15 सितंबर को एम्स प्रशासन ने जो कार्रवाई की, वह निदेशक या उपनिदेशक प्रशासन के लिखित आदेश पर हुई थी या नहीं।

विज्ञापन

अदालत ने विवेचक को मामले से जुड़े आवश्यक स्थानों के सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित कराने और एम्स के संबंधित कार्यालयों के कंप्यूटर सिस्टम से आवश्यक साक्ष्य जुटाने के निर्देश दिए हैं। साथ ही राजदीप इंटरप्राइजेज से संबंधित कार्यों की निगरानी करने वाले एम्स प्रशासन के अधिकारियों और कर्मचारियों के बयान दर्ज करने को भी कहा है। अदालत के अनुसार, इन सवालों की जांच से यह स्पष्ट करने में मदद मिलेगी कि कथित भर्ती धोखाधड़ी में एम्स का कोई अधिकारी या कर्मचारी शामिल था या नहीं।

अदालत के छह अहम सवाल

1. क्या विवेचक ने एम्स ऋषिकेश के प्रशासनिक कार्यालय से भर्ती संबंधी पत्रावलियों का अवलोकन कर उन्हें कब्जे में लिया है। क्या राजदीप इंटरप्राइजेज को संविदा भर्ती के लिए अधिकृत किया गया था?

2. कंप्यूटर डेटा की फॉरेंसिक जांच हुई या नहीं। जब्त कंप्यूटरों के सीपीयू और अन्य उपकरणों को विधि विज्ञान प्रयोगशाला भेजा गया या नहीं।

3. एम्स परिसर में एजेंसी का कार्यालय क्यों था।

4. पुलिस को तत्काल सूचना क्यों नहीं दी गई जबकि परिसर में पुलिस चौकी मौजूद है।

5. 15 सितंबर की कार्रवाई क्या निदेशक या उपनिदेशक (प्रशासन) के लिखित आदेश पर हुई थी और यदि हां तो संबंधित आदेश पत्रावली में उपलब्ध क्यों नहीं है।

5. एफआईआर दर्ज कराने में देरी क्यों हुई।

Powered by Nyaya 247 News

संबंधित ख़बरें

इसी विषय की और ख़बरें →
सुप्रीम कोर्ट ने लाइव स्ट्रीमिंग पर कोई रोक नहीं, क्लिप दुरुपयोग पर चेतावनी
अपराध

सुप्रीम कोर्ट ने लाइव स्ट्रीमिंग पर कोई रोक नहीं, क्लिप दुरुपयोग पर चेतावनी

दिल्ली पुलिस पर दवाब: लॉकडाउन जैसी प्रतिबंधों के बीच शांतिपूर्ण प्रदर्शन के अधिकार की रक्षा करें
अपराध

दिल्ली पुलिस पर दवाब: लॉकडाउन जैसी प्रतिबंधों के बीच शांतिपूर्ण प्रदर्शन के अधिकार की रक्षा करें

नवी पिल्लै को नोबेल शांति पुरस्कार के बाद अमेरिका ने आईसीसी पर प्रतिबंध लगाए
अपराध

नवी पिल्लै को नोबेल शांति पुरस्कार के बाद अमेरिका ने आईसीसी पर प्रतिबंध लगाए

मोहाली में कांग्रेस के पंजाब प्रभारी सचिन पायलट ने मुख्य चुनाव आयुक्त पर विरोध प्रदर्शन व कानून व्यवस्था को लेकर कड़ी टिका́टिप्पणी की
अपराध

मोहाली में कांग्रेस के पंजाब प्रभारी सचिन पायलट ने मुख्य चुनाव आयुक्त पर विरोध प्रदर्शन व कानून व्यवस्था को लेकर कड़ी टिका́टिप्पणी की

सितंबर 2026 के हाई कोर्ट फैसलों में IVF आयु सीमा, जूनियर वकीलों के वेतन, तलाक‑ए‑हसन और कई अन्य मुद्दे शामिल
अपराध

सितंबर 2026 के हाई कोर्ट फैसलों में IVF आयु सीमा, जूनियर वकीलों के वेतन, तलाक‑ए‑हसन और कई अन्य मुद्दे शामिल

रांची पोक्सो अदालत ने देवराज महतो को 20 साल कैद व 50,000 रुपये जुर्माना सजा
अपराध

रांची पोक्सो अदालत ने देवराज महतो को 20 साल कैद व 50,000 रुपये जुर्माना सजा

सचिन पायलट ने मुख्य चुनाव आयुक्त पर तेज हमला
अपराध

सचिन पायलट ने मुख्य चुनाव आयुक्त पर तेज हमला

पंजाब के भ्रष्टाचार मामले में सुप्रीम कोर्ट जस्टिस ने खुद को अलग किया, गाैरव यादव को रेगुलर डीजीपी नियुक्त
अपराध

पंजाब के भ्रष्टाचार मामले में सुप्रीम कोर्ट जस्टिस ने खुद को अलग किया, गाैरव यादव को रेगुलर डीजीपी नियुक्त

ताज़ा ख़बरें