होम›मुकदमे›भीलवाड़ा में शुरू हुई तीसरी राष्ट्रीय लोक अदालत: 21 बेंचों पर राजीनामे से मामलों का निपटारा
मुकदमे

भीलवाड़ा में शुरू हुई तीसरी राष्ट्रीय लोक अदालत: 21 बेंचों पर राजीनामे से मामलों का निपटारा

राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के आदेशानुसार भीलवाड़ा में इस वर्ष की तीसरी राष्ट्रीय लोक अदालत शुरू हुई है, जिसमें 21 बैचों का गठन किया गया है। सिविल, फौजदारी और राजस्व मामलों को आपसी समझौते के आधार पर निपटाया जा रहा है, जहाँ मूल राशि में कमी और ब्याज माफ़ किया जा रहा है। बड़ी संख्या में पीड़ित और पक्षकार कोर्ट में उपस्थित हैं और केवल स्वैच्छिक सहमति से ही आदेश जारी किया जा रहा है।

10 अक्टूबर 2026 को 08:05 am बजे
भीलवाड़ा में शुरू हुई तीसरी राष्ट्रीय लोक अदालत: 21 बेंचों पर राजीनामे से मामलों का निपटारा

सौजन्य से:- Dainik Bhaskar

- Hindi News

- Local

- Rajasthan

- Bhilwara

- Bhilwara National Lok Adalat | Legal Case Resolution & Settlement

भीलवाड़ा में राष्ट्रीय लोक अदालत शुरू:21 बेंचों पर मामलों का राजीनामे से निस्तारण; पीड़ित और पक्षकार कोर्ट पहुंचे

- कॉपी लिंक

राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण जयपुर के आदेशानुसार भीलवाड़ा में साल की तीसरी राष्ट्रीय लोक अदालत शुरू हो चुकी है। भीलवाडा जिले में राजीनामें के लिए चिन्हित प्रकरणों के लिए 21 बैचों का गठन किया गया हैं। जिसमें न्यायिक अधिकारी एंव राजस्व अधिकारी औ

लोक अदालत पहुंचने लगे पीड़ित और पक्षकार

राष्ट्रीय लोक अदालत में कोर्ट के सिविल, फौजदारी प्रकरणों के अलावा राजस्व मामलों को भी राजीनामें के माध्यम से प्रकरणों को निस्तारण किया जाएगा। लोक अदालत को लेकर पक्षकारों को में उत्साह का माहौल है। बड़ी संख्या में पीड़ित और पक्षकार अपने मामलों को लेकर कोर्ट पहुंच रहे हैं।

ब्याज माफ और मूल राशि में भी कमी

प्राधिकरण की सचिव रश्मि आर्य ने बताया- राष्ट्रीय लोक अदालत में राजीनामा योग्य सभी प्रकृति के मुकदमों को आपसी समझाइश के माध्यम से निस्तारण किया जा रहा है। इस लोक अदालत में मुकदमा पूर्व में रखी गई बैंक, बिजली और अन्य संस्था के मामलों में मूल राशि से भी कम व ब्याज माफ कर मामलो का हाथों हाथ फैसला किया जा रहा है।

कोई भी फैंसला थोपा नहीं जाता

राष्ट्रीय लोक अदालत में दोनों पक्षों को साथ-साथ बैठाकर आपसी बातचीत और राजीनामें के आधार पर विवाद को निस्तारण का प्रयास किया जाता है। राष्ट्रीय लोक अदालत का माहौल न्यायालय जैसा नहीं होकर अनौपचारिक व बहुत ही सहज होता है। लोक अदालत के समक्ष दोनों पक्ष अपनी बात खुलकर कह सकते है। राजीनामा किसी भी पर थोपा नहीं जाता है बल्कि दोनों पक्षों की स्वेच्छिक सहमति होने पर ही आदेश पारित किया जाता है।

Powered by Nyaya 247 News

संबंधित ख़बरें

इसी विषय की और ख़बरें →
दिल्ली उच्च न्यायालय: केंद्र को 7 जनवरी 2027 तक सेवा कुत्तों के SOP को अंतिम रूप देने का निर्देश
मुकदमे

दिल्ली उच्च न्यायालय: केंद्र को 7 जनवरी 2027 तक सेवा कुत्तों के SOP को अंतिम रूप देने का निर्देश

सीजेपी प्रदर्शन के बीच दिल्ली मेट्रो बंद, सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन न करने पर याचिकाकर्ता ने अवमानना याचिका दायर
मुकदमे

सीजेपी प्रदर्शन के बीच दिल्ली मेट्रो बंद, सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन न करने पर याचिकाकर्ता ने अवमानना याचिका दायर

मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय ने इतरासी में रोकी महिला को कोर्ट में पेश करने का आदेश दिया
मुकदमे

मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय ने इतरासी में रोकी महिला को कोर्ट में पेश करने का आदेश दिया

MP उच्च न्यायालय ने पुलिस से आदेश दिया, प्यूने-दिल्ली यात्रा में बंद हुई महिला को 13 अक्टूबर 2026 तक लौटाएँ
मुकदमे

MP उच्च न्यायालय ने पुलिस से आदेश दिया, प्यूने-दिल्ली यात्रा में बंद हुई महिला को 13 अक्टूबर 2026 तक लौटाएँ

पटनाहाईकोर्ट ने फैमिली कोर्ट के निर्णय पर विरोध जताया, महिला को 50 लाख रुपये
मुकदमे

पटनाहाईकोर्ट ने फैमिली कोर्ट के निर्णय पर विरोध जताया, महिला को 50 लाख रुपये

कांखड़ाली में राष्ट्रीय लोक अदालत आज, विवादों का सौहार्दपूर्ण समाधान
मुकदमे

कांखड़ाली में राष्ट्रीय लोक अदालत आज, विवादों का सौहार्दपूर्ण समाधान

सुप्रीम कोर्ट ने 15 राज्य और 2 केन्द्रशासित प्रदेशों को विद्युत आयोग के रिक्त पदों पर नोटिस भेजा
मुकदमे

सुप्रीम कोर्ट ने 15 राज्य और 2 केन्द्रशासित प्रदेशों को विद्युत आयोग के रिक्त पदों पर नोटिस भेजा

पटना हाईकोर्ट ने निचली अदालत के गलत कानून अनुप्रयोग पर कड़ी निंदा की
मुकदमे

पटना हाईकोर्ट ने निचली अदालत के गलत कानून अनुप्रयोग पर कड़ी निंदा की

ताज़ा ख़बरें