40 साल पुराने बोफोर्स घोटाले का अंत: सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की आखिरी अपील
सुप्रीम कोर्ट ने बोफोर्स रिश्वत कांड में लंबित आखिरी अपील खारिज कर दी, जिससे लगभग चार दशक पुराने मामले का अंत हो गया।

सौजन्य से:- jagran.com
खत्म हुआ 40 साल पुराना केस... सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की बोफोर्स घोटाले की आखिरी अपील
सुप्रीम कोर्ट ने बोफोर्स रिश्वत कांड में लंबित आखिरी अपील खारिज कर दी, जिससे करीब चार दशक पुराने इस संवेदनशील मामले का अंत हो गया। ...और पढ़ें
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डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने राजनीतिक रूप से संवेदनशील बोफोर्स रिश्वत कांड में लंबित आखिरी अपील को खारिज कर दिया। इसके साथ ही लगभग चार दशक (करीब 40 साल) पुराने मामले का अंत हो गया।
दरअसल, जस्टिस जे.बी. पारदीवाला और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की पीठ ने वकील अजय के. अग्रवाल की उस अपील पर आगे सुनवाई से इनकार कर दिया, जिसमें दिल्ली हाई कोर्ट के फैसले को चुनौती दी गई थी।
पहले ही खारिज हो चुकी थी सीबीआई की अपील
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि दिल्ली उच्च न्यायालय द्वारा बहुत पहले ही आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई को रद किया जा चुका है और सीबीआई की अपील भी पहले खारिज हो चुकी है, इसलिए इस मामले को अब आगे जारी रखने का कोई औचित्य नहीं है।
अदालत ने मृतक आरोपी श्रीचंद पी. हिंदुजा और गोपीचंद पी. हिंदुजा के नाम हटाने के लिए अतिरिक्त समय की मांग को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि मामले में और देरी नहीं की जा सकती।
सुप्रीम कोर्ट ने अतिरिक्त समय देने से किया इनकार
हाईकोर्ट ने उस फैसले में हिंदुजा बंधुओं और स्वीडिश हथियार निर्माता एबी बोफोर्स के खिलाफ सभी आपराधिक कार्यवाहियों को रद कर दिया था। सुनवाई के दौरान अजय अग्रवाल ने दो दिवंगत - श्रीचंद पी. हिंदुजा और गोपीचंद पी. हिंदुजा- के नाम हटाने के लिए चार सप्ताह का समय मांगा। लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने यह कहते हुई अतिरिक्त समय देने से मना कर दिया कि कि मामला 2018 से लंबित है और इसे अब और टाला नहीं जा सकता।
नवंबर 2018 में भी सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की थी सीबीआई की अपील
गौरतलब है कि दिल्ली हाई कोर्ट ने 31 मई, 2005 को हिंदुजा बंधुओं और बोफोर्स के खिलाफ सभी आरोपों को खारिज कर दिया था। कोर्ट ने सीबीआई की जांच पर भी कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा था कि इस जांच पर सरकारी खजाने से लगभग 250 करोड़ रुपये खर्च हुए। सुप्रीम कोर्ट ने इससे पहले नवंबर 2018 में सीबीआई की अपील भी खारिज कर दी थी।
क्या है बोफोर्स विवाद?
बोफोर्स विवाद की शुरुआत 24 मार्च, 1986 को भारत सरकार और स्वीडिश कंपनी एबी बोफोर्स के बीच 400 हॉवित्जर तोपों की खरीद के लिए हस्ताक्षरित 1,437 करोड़ रुपये के सौदे से हुई थी।
इसके बाद अप्रैल 1987 में स्वीडिश रेडियो ने आरोप लगाया कि भारतीय राजनेताओं और रक्षा अधिकारियों को अवैध कमीशन का भुगतान किया गया था, जिसके बाद भारत में बड़ा राजनीतिक विवाद शुरू हुआ।
इसके बाद जनवरी 1990 में सीबीआई ने मामला दर्ज किया। इसके बाद पूर्व बोफोर्स अध्यक्ष मार्टिन आर्डबो, कथित बिचौलिये विन चड्ढा, हिंदुजा बंधुओं और बाद में इतालवी कारोबारी ओत्तावियो क्वात्रोच्ची समेत कई लोगों के खिलाफ जांच हुई। समय के साथ कई आरोपी या तो बरी हो गए या उनका निधन हो गया।
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