40 साल की कैद: रिश्तेदार ने नाबालिग से किया यौन अपराध
लक्षद्वीप की एक अदालत ने 12 साल से कम उम्र के नाबालिग लड़के के साथ यौन अपराध के मामले में 37 वर्षीय दोषी को 40 साल की सजा सुनाई, जिसमें 20 साल की वास्तविक कैद काटनी होगी। अदालत ने बच्चों के शोषण पर सख्ती से प्रतिक्रिया जताई है।

सौजन्य से:- Amar Ujala
रिश्तेदार ने नाबालिग के साथ किया यौन अपराध: अदालत ने सुनाई 40 साल की सजा; बच्चों की सुरक्षा पर क्या कहा?
Lakshadweep Court: लक्षद्वीप की एक अदालत ने नाबालिग लड़के के साथ यौन अपराध के मामले में 37 वर्षीय दोषी को कुल 40 साल की सजा सुनाई है। हालांकि उसे 20 साल की वास्तविक कैद काटनी होगी। अदालत ने कहा कि बच्चों के खिलाफ अपराध समाज के लिए गंभीर चिंता का विषय हैं। इस खबर में यह भी जानेंगे कि मामले में कोर्ट ने बच्चों की सुरक्षा पर क्या टिप्पणी की?
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विस्तार
लक्षद्वीप की एक अदालत ने नाबालिग लड़के के साथ यौन अपराध करने के दोषी 37 वर्षीय व्यक्ति को कड़ी सजा सुनाई है। अदालत ने पॉक्सो अधिनियम और भारतीय दंड संहिता (IPC) की विभिन्न धाराओं के तहत कुल 40 साल के कारावास की सजा सुनाई। हालांकि सभी सजाएं साथ-साथ चलेंगी, इसलिए दोषी को 20 साल की वास्तविक कैद काटनी होगी। अदालत ने दोषी पर 1.20 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया और पीड़ित बच्चे के लिए अतिरिक्त मुआवजे की भी सिफारिश की।
यह फैसला कवरत्ती के जिला एवं सत्र न्यायाधीश ज्योति वी ने सुनाया। मामला वर्ष 2022 का है। अभियोजन के अनुसार दोषी पीड़ित का करीबी रिश्तेदार था। उसने बच्चे को खाने का सामान लेने के बहाने अपने घर ले जाकर उसके साथ यौन अपराध किया। बाद में दूसरी बार भी उसने बच्चे का यौन शोषण किया। अदालत ने अभियोजन और बचाव पक्ष की दलीलें सुनने के बाद दोषी को विभिन्न धाराओं में दोषी ठहराया।
अदालत ने सजा में नरमी देने से इनकार क्यों किया?
अदालत ने कहा कि पीड़ित की उम्र घटना के समय 12 वर्ष से कम थी। दोषी और बच्चे के बीच रिश्ते का भरोसा था, जिसका गलत फायदा उठाया गया। अदालत ने यह भी माना कि यह एक बार की घटना नहीं थी, बल्कि बार-बार अपराध किया गया। इन सभी परिस्थितियों को देखते हुए अदालत ने सजा में किसी भी तरह की नरमी देने से इनकार कर दिया। अदालत ने कहा कि ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई से ही लोगों का न्याय व्यवस्था पर भरोसा बना रहेगा।
अदालत ने बच्चों की सुरक्षा को लेकर क्या टिप्पणी की?
फैसला सुनाते हुए अदालत ने कहा कि बच्चों के खिलाफ अपराध अब लक्षद्वीप जैसे छोटे केंद्र शासित प्रदेश में भी गंभीर चिंता का विषय बन चुके हैं। अदालत ने कहा कि यहां समाज आपस में काफी जुड़ा हुआ है और इसी वजह से कई बार बच्चे अपने परिचित लोगों के हाथों शोषण का शिकार हो जाते हैं। अदालत ने कहा कि न्यायालय की जिम्मेदारी केवल पीड़ित को न्याय दिलाने तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज में यह भरोसा भी कायम रखना है कि बच्चों के शोषण करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी।
मामले का खुलासा कैसे हुआ और पीड़ित को क्या राहत मिलेगी?
अभियोजन के अनुसार घटना के बाद बच्चा पढ़ाई में कमजोर होने लगा और कक्षा में उसका ध्यान नहीं लग रहा था। इसके बाद माता-पिता उसे मनोचिकित्सक के पास लेकर गए। काउंसलिंग के दौरान बच्चे ने अपने साथ हुई घटना की जानकारी दी, जिसके बाद मामला सामने आया। अदालत ने दोषी पर लगाए गए 1.20 लाख रुपये के जुर्माने में से 1 लाख रुपये पीड़ित को देने का आदेश दिया। इसके अलावा पीड़ित की कम उम्र, उसके साथ हुए बार-बार के शोषण और मानसिक आघात को देखते हुए पीड़ित मुआवजा योजना के तहत 2 लाख रुपये अतिरिक्त मुआवजा देने की भी सिफारिश की।
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