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सुप्रीम कोर्ट का आदेश: बीमा रहित वाहनों का चालान करो, ईंधन भी न दें

सुप्रीम कोर्ट ने सड़कों पर बीमा रहित वाहनों के चलने पर सख्ती दिखाई है. कोर्ट ने ऐसे वाहनों की पहचान के लिए कैमरों और ई-चालान का उपयोग करने का सुझाव दिया और नए वाहनों के लिए थर्ड-पार्टी बीमा अवधि बढ़ाने की बात कही.

5 अगस्त 2026 को 03:15 am बजे
सुप्रीम कोर्ट का आदेश: बीमा रहित वाहनों का चालान करो, ईंधन भी न दें

सौजन्य से:- Jagran

'56% गाड़ियों का इंश्योरेंस नहीं, इनका चालान काटो'; सुप्रीम कोर्ट का आदेश

सुप्रीम कोर्ट ने बिना बीमा वाले वाहनों पर सख्ती दिखाते हुए ऐसे वाहनों की पहचान के लिए कैमरों और ई-चालान का उपयोग करने तथा नए वाहनों के लिए थर्ड-पार्टी ...और पढ़ें

HighLights

- सुप्रीम कोर्ट ने बिना बीमा वाहनों को ईंधन न देने का सुझाव दिया।

- कैमरों और ई-चालान से बिना बीमा वाहनों की पहचान होगी।

- नए वाहनों के लिए थर्ड-पार्टी बीमा अवधि बढ़ाई जाएगी।

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। अगर आपकी गाड़ी का इंश्योरेंस नहीं तो हो सकता है कि निकट भविष्य में आपको पेट्रोल पंप से तेल ने मिले। सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को सड़कों पर बिना इंश्योरेंस वाली गाड़ियों के चलने की समस्या से निपटने के लिए यह सुझाव दिया कि जिन गाड़ियों का बीमा नहीं है उनका चालान काटो और ऐसी गाड़ियों को तेल भी मत दो।

कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि हाईवे और सड़कों पर लगे कैमरों का इस्तेमाल ऐसी गाड़ियों की पहचान करने और उनके मालिकों को चालान भेजने के लिए किया जाए।

पीठ ने जताई हैरानी

भारतीय सड़कों पर चलने वाले लगभग 56% वाहनों (जिनमें से ज्यादातर दो-पहिया वाहन हैं) का बीमा न होने पर हैरानी जताते हुए जस्टिस संजय करोल और जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा की बेंच ने कहा कि इससे मोटर व्हीकल एक्ट की धारा 146 के तहत अनिवार्य बीमा का मकसद ही खत्म हो जाता है। नतीजतन सड़क दुर्घटनाओं के पीड़ितों को मुआवजा पाने के लिए लंबे कानूनी संघर्ष से गुजरना पड़ता है।

अगर कुल आंकड़ों की बात करें तो कुल 30.4 करोड़ रजिस्टर्ड वाहनों में से 16.5 करोड़ वाहन बिना बीमा वाले हैं। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, सड़क दुर्घटनाओं में 22% मामले बिना बीमा वाले वाहनों से जुड़े होते हैं।

क्या कहता है कानून?

एमवी एक्ट के अनुसार, जो लोग बिना वैलिड मोटर थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस के बिना इंश्योरेंस वाली गाड़ी चलाते हैं या चलाने देते हैं उन्हें कानून तोड़ने के लिए सजा हो सकती है, जिसमें जेल की सजा भी शामिल है।

पहली बार अपराध करने पर तीन महीने तक की जेल या 2,000 रुपये का जुर्माना या दोनों हो सकते हैं और बाद में अपराध करने पर तीन महीने तक की जेल या 4,000 रुपये का जुर्माना या दोनों हो सकते हैं।

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पीठ द्वारा कही गईं अहम बातें

- पीठ ने कहा, “इंश्योरेंस रेगुलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी (IRDAI) सड़क परिवहन मंत्रालय के साथ मिलकर एक पायलट प्रोजेक्ट पर विचार करेगी और उसे तैयार करेगी, जिसके तहत गाड़ियों के लिए फ्यूल (ईंधन) को उनके वैलिड इंश्योरेंस स्टेटस से जोड़ा जाएगा। अगर ऐसा नहीं होता है तो संबंधित गाड़ी को पेट्रोल पंप पर फ्यूल नहीं दिया जाएगा, जब तक कि उसका इंश्योरेंस वैलिड न हो जाए।"

- पीठ ने आगे कहा, "इसके दो फायदे होंगे पहला, इससे बिना इंश्योरेंस या बिना रजिस्ट्रेशन वाली गाड़ियों की पहचान करने में मदद मिलेगी। दूसरा, इससे इन गाड़ियों के मालिकों को यह सुनिश्चित करने के लिए प्रेरित किया जाएगा कि उनके पास वैलिड इंश्योरेंस हो।"

- पीठ ने कहा, "ऐसे प्रोजेक्ट एमवीए की धारा 146 के कानूनी आदेश का जमीनी स्तर पर पालन सुनिश्चित करेंगे। यह काम कैमरों के इस्तेमाल से किया जा सकता है। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय को सैद्धांतिक रूप से इस पर कोई आपत्ति नहीं है।"

- बेंच ने कहा कि कानून का सख्ती से पालन होना चाहिए और निर्देश दिया कि राज्य की ट्रैफिक पुलिस को हैंडहेल्ड डिवाइस या डाउनलोड करने योग्य ऐप्स दिए जाएं, जो इंश्योरेंस इंफॉर्मेशन ब्यूरो और VAHAN पोर्टल के डेटा से जुड़े हों, ताकि जमीनी स्तर पर इंश्योरेंस स्टेटस की जांच की जा सके।

- बेंच ने कहा, “हाईवे और सड़कों पर लगे ANPR कैमरे तेज रफ्तार, रेड लाइट जंप करने, सड़क पर गलत तरफ गाड़ी चलाने आदि जैसे सड़क सुरक्षा नियमों के उल्लंघन को पकड़ने और जुर्माना लगाने की क्षमता रखते हैं। इसे आगे बढ़ाते हुए और जैसा कि MoRTH ने कुछ राज्यों में पहले ही लागू किया है, ANPR कैमरों को इंश्योरेंस इंफॉर्मेशन ब्यूरो और VAHAN पोर्टल के डेटा के साथ जोड़ा जाएगा ताकि बिना इंश्योरेंस वाली गाड़ियों के लिए ऑटोमैटिक ई-चालान जारी किए जा सकें।"

गाड़ियों के बिना इंश्योरेंस रहने का नतीजा यह होता है कि दुर्घटना के शिकार लोगों और उनके परिवारों को उचित समय के भीतर पर्याप्त मुआवजा नहीं मिल पाता है। 2018 में सुप्रीम कोर्ट ने नई गाड़ियों की खरीद/रजिस्ट्रेशन के समय नई कारों के लिए तीन साल और दो-पहिया वाहनों के लिए पांच साल का थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस खरीदना अनिवार्य करने का निर्देश दिया था।

यह देखते हुए कि बड़ी संख्या में गाड़ियां बिना इंश्योरेंस के रहती हैं बेंच ने इस अवधि को एक साल बढ़ा दिया और निर्देश दिया कि अब से खरीदार को नई कारों के लिए चार साल और नए दो-पहिया वाहनों के लिए छह साल का थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस खरीदना होगा।

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