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सुप्रीम कोर्ट में तीन नये जजों ने शपथ ली, जजों की संख्या हुई 37

चीफ जस्टिस सूर्यकांत के नेतृत्व में तीन नए जज – सुनीता अग्रवाल, देवेंद्र कुमार उपाध्याय और अपरेश कुमार सिंह – ने सुप्रीम कोर्ट के भवन के सभागार में शपथ ली। इस समारोह के बाद कोर्ट में कार्यरत जजों की संख्या 37 हो गई, जबकि स्वीकृत संख्या 38 है। सुनीता अग्रवाल की नियुक्ति से महिला जजों की संख्या अब तीन हो गई है।

6 अक्टूबर 2026 को 03:05 pm बजे
सुप्रीम कोर्ट में तीन नये जजों ने शपथ ली, जजों की संख्या हुई 37

सौजन्य से:- ETV Bharat

चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने सुप्रीम कोर्ट के तीन नए न्यायाधीशों को शपथ दिलाई, जजों की संख्या बढ़कर 37 हुई

केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने तीन न्यायाधीशों के नामों को सरकार की मंजूरी मिलने की घोषणा की थी.

Published : October 6, 2026 at 8:18 PM IST

नई दिल्ली: चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने सुप्रीम कोर्ट में पदोन्नत किए गए तीन नए जजों को मंगलवार को पद की शपथ दिलाई. इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट में कार्यरत न्यायाधीशों की संख्या बढ़कर 37 हो गई, जो स्वीकृत 38 न्यायाधीशों की संख्या से एक कम है.

न्यायमूर्ति सुनीता अग्रवाल, न्यायमूर्ति देवेंद्र कुमार उपाध्याय और न्यायमूर्ति अपरेश कुमार सिंह ने सुप्रीम कोर्ट के नए भवन के सभागार में पद की शपथ ली. इस अवसर पर सुप्रीम कोर्ट के सभी न्यायाधीशों के अलावा विभिन्न हाई कोर्ट के न्यायिक अधिकारी और अधिकारी भी मौजूद थे. समारोह के दौरान सुप्रीम कोर्ट और अन्य हाई कोर्ट के जजों के परिवार के सदस्य तथा वकील भी मौजूद थे.

केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने सोमवार को तीन न्यायाधीशों के नामों को सरकार की मंजूरी मिलने की घोषणा की थी. सुप्रीम कोर्ट के कॉलेजियम ने 28 सितंबर को इन तीनों न्यायाधीशों के नामों की सिफारिश की थी. सुप्रीम कोर्ट में न्यायाधीशों की मौजूदा कार्यरत संख्या 34 है और तीन नए न्यायाधीशों के शपथ लेने के बाद यह संख्या बढ़कर 37 हो गई है. सुप्रीम कोर्ट में चीफ जस्टिस सहित जजों की स्वीकृत संख्या 38 है. हाल ही में उच्चतम न्यायालय संशोधन अधिनियम, 2026 के तहत इसे 34 से बढ़ाकर 38 किया गया है.

न्यायमूर्ति सुनीता अग्रवाल की नियुक्ति के साथ ही शीर्ष अदालत में महिला न्यायाधीशों की संख्या बढ़कर तीन हो गई है. इनमें न्यायमूर्ति बी. वी. नागरत्ना शामिल हैं, जो 31 अगस्त, 2021 से शीर्ष अदालत की न्यायाधीश हैं, और न्यायमूर्ति वेंकिता सुब्रमणि मोहना, जिन्हें 2 जून, 2026 को नियुक्त किया गया था.

न्यायमूर्ति अग्रवाल और न्यायमूर्ति नागरत्ना उच्च न्यायालयों में न्यायाधीश के रूप में सेवाएं दे चुकी हैं, जबकि न्यायमूर्ति मोहना को सीधे बार से पदोन्नत किया गया. वह सुप्रीम कोर्ट की वरिष्ठ अधिवक्ता रह चुकी थीं. न्यायमूर्ति नागरत्ना 2027 में एक महीने से भी कम समय के लिए भारत की पहली महिला प्रधान न्यायाधीश भी बन सकती हैं.

न्यायमूर्ति अग्रवाल और न्यायमूर्ति उपाध्याय मूल रूप से इलाहाबाद हाई कोर्ट से हैं, जबकि न्यायमूर्ति सिंह झारखंड उच्च न्यायालय से हैं. न्यायमूर्ति अग्रवाल गुजरात उच्च न्यायालय की मुख्य न्यायाधीश थीं, न्यायमूर्ति उपाध्याय दिल्ली उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश थे, जबकि न्यायमूर्ति अपरेश कुमार सिंह तेलंगाना उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश थे.

न्यायमूर्ति सुनीता अग्रवाल का जन्म 30 अप्रैल 1966 को हुआ था और उन्होंने 16 दिसंबर 1990 को उत्तर प्रदेश बार एसोसिएशन में अधिवक्ता के रूप में पंजीकरण कराया था. 21 वर्षों तक वकालत करने के बाद न्यायमूर्ति अग्रवाल को 21 नवंबर 2011 को इलाहाबाद उच्च न्यायालय का अतिरिक्त न्यायाधीश नियुक्त किया गया और इसके बाद उन्होंने छह अगस्त 2013 को स्थायी न्यायाधीश के रूप में शपथ ली.

इलाहाबाद उच्च न्यायालय में 12 वर्षों तक न्यायाधीश के रूप में सेवा देने के बाद न्यायमूर्ति अग्रवाल को 23 जुलाई 2023 को गुजरात उच्च न्यायालय का मुख्य न्यायाधीश नियुक्त किया गया. न्यायमूर्ति उपाध्याय का जन्म 16 जून 1965 को उत्तर प्रदेश के अंबेडकर नगर जिले के मुस्कराई गांव में हुआ था. उन्होंने 1991 में लखनऊ विश्वविद्यालय से कानून की पढ़ाई पूरी की और 11 मई 1991 को अधिवक्ता के रूप में पंजीकरण कराया. उन्हें मई 2007 में उत्तर प्रदेश का मुख्य स्थायी अधिवक्ता नियुक्त किया गया और इलाहाबाद उच्च न्यायालय के न्यायाधीश के रूप में पदोन्नत किए जाने तक वह इस पद पर रहे.

उन्हें 21 नवंबर 2011 को इलाहाबाद उच्च न्यायालय का न्यायाधीश नियुक्त किया गया और छह अगस्त 2013 को स्थायी न्यायाधीश के रूप में शपथ दिलाई गई. न्यायमूर्ति उपाध्याय ने 29 जुलाई 2023 को बंबई उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के रूप में शपथ ली थी और 21 जनवरी 2025 को उनका तबादला दिल्ली उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के रूप में कर दिया गया.

न्यायमूर्ति सिंह का जन्म सात जुलाई 1965 को हुआ था और उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से एलएलबी की डिग्री हासिल की. उन्होंने 1990 में पटना उच्च न्यायालय में अधिवक्ता के रूप में पंजीकरण कराया और वर्ष 2000 तक वहां वकालत की. इसके बाद उन्होंने 2001 से झारखंड उच्च न्यायालय में वकालत की.

उन्हें 24 जनवरी 2012 को झारखंड उच्च न्यायालय का अतिरिक्त न्यायाधीश नियुक्त किया गया और 16 जनवरी 2014 को स्थायी न्यायाधीश के रूप में नियुक्त किया गया. वह 20 दिसंबर 2022 से 19 फरवरी 2023 तक झारखंड उच्च न्यायालय के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश रहे.

उन्होंने 17 अप्रैल 2023 को त्रिपुरा उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के रूप में शपथ ली और 19 जुलाई 2025 को उनका तबादला तेलंगाना उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के रूप में कर दिया गया.

ये भी पढे़ं: सुप्रीम कोर्ट को तीन नए जज मिले, काम करने वाले जजों की संख्या बढ़कर 37 हुई

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