उच्च न्यायालय ने 2022 के आदेश की अनदेखी पर चार वरिष्ठ अधिकारियों पर अवमानना का आरोप लगाया
इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ शाखा ने उत्तर प्रदेश सरकार के चार वरिष्ठ अधिकारियों को 2022 में जारी आदेश का पालन न करने के कारण अवमानना के आरोप तय किए। कोर्ट ने कहा कि अब तक कोई दस्तावेज पेश नहीं हुआ जिससे आदेश के आंशिक अनुपालन का प्रमाण मिल सके, और अधिकारियों को एक सप्ताह में जवाब देने तथा 13 अक्टूबर को व्यक्तिगत रूप से हाजिर होने का निर्देश दिया।

सौजन्य से:- Jagran
2022 के आदेश का पालन न होने पर हाईकोर्ट सख्त, 4 वरिष्ठ अधिकारियों पर तय किए आरोप
इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने चार साल पुराने आदेश का पालन न करने पर उत्तर प्रदेश सरकार के ...और पढ़ें
HighLights
- हाईकोर्ट ने चार वरिष्ठ अधिकारियों पर अवमानना के आरोप तय किए।
- 2022 के आदेश का चार साल बाद भी अनुपालन नहीं हुआ।
- अधिकारियों को 13 अक्टूबर को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने का निर्देश।
जागरण संवाददाता, लखनऊ। इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने चार वर्ष पुराने आदेश का अनुपालन न करने के मामले में उत्तर प्रदेश सरकार के चार वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ अवमानना के आरोप तय किए हैं। कोर्ट ने कहा कि अधिकारियों की ओर से ऐसा कोई दस्तावेज पेश नहीं किया गया, जिससे 19 जुलाई 2022 के आदेश का आंशिक अनुपालन भी साबित हो सके।
पीठ ने प्रथमदृष्टया माना कि अधिकारी रिट कोर्ट के आदेश का पालन करने के इच्छुक नहीं दिख रहे हैं। न्यायमूर्ति सौरभ लवानिया की पीठ ने सुरेश चंद्र वर्मा के मामले में वर्ष 2022 में दिए फैसले के अनुपालन से जुड़ी 37 अवमानना याचिकाओं पर यह कार्रवाई की। उस फैसले में लागू शासनादेशों के तहत लाभ देने संबंधी आदेश निरस्त करते हुए वेतन का पुनर्निर्धारण, बकाया वेतन का भुगतान और संशोधित पेंशन भुगतान आदेश जारी करने का निर्देश दिया गया था।
चार माह में लाभ न देने पर सात प्रतिशत साधारण ब्याज देने को भी कहा गया था। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि चार वर्ष बीतने के बाद भी आदेश का अनुपालन नहीं हुआ। आरोप वित्त विभाग के अपर मुख्य सचिव दीपक कुमार, नमामि गंगे एवं ग्रामीण जलापूर्ति-लघु सिंचाई विभाग के प्रमुख सचिव अनुराग श्रीवास्तव, सिंचाई विभाग के प्रमुख सचिव अनिल गर्ग और ग्रामीण अभियंत्रण विभाग के प्रमुख सचिव सौरभ बाबू पर तय किए गए हैं।
कोर्ट ने सरकार की और समय देने की अर्जी भी खारिज कर दी। पीठ ने कहा कि आदेश विशेष अपील में बरकरार रहा और 13 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट ने भी इसकी पुष्टि कर दी। राज्य की पुनर्विचार याचिकाएं भी खारिज हो चुकी हैं। कोर्ट ने 22 मई को महाधिवक्ता के आठ सप्ताह में अनुपालन के आश्वासन के बावजूद प्रगति न होने पर नाराजगी जताई।
अपर महाधिवक्ता अनुज कुदेसिया और अपर मुख्य स्थायी अधिवक्ता सुनील बाजपेयी भी अनुपालन का ठोस दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सके। पीडब्ल्यूडी के अपर मुख्य सचिव अजय चौहान पर आरोप अगली सुनवाई में तय होंगे। सभी आरोपितों को एक सप्ताह में जवाब दाखिल करने और 13 अक्टूबर को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रहने का निर्देश दिया गया है।
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