सुप्रीम कोर्ट ने लखीमपुर खीरी केस के जज पर कार्रवाई का आदेश, नई सरकारी वकील की नियुक्ति भी
सुप्रीम कोर्ट ने लखीमपुर खीरी हिंसा मामले के पीठासीन न्यायिक अधिकारी पर लगे आरोपों को देखते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस को तुरंत उचित कार्रवाई करने का निर्देश दिया। अदालत ने उत्तर प्रदेश सरकार को मुख्य मामले की सुनवाई के लिए नया सरकारी वकील नियुक्त करने का भी निर्देश दिया और हाईकोर्ट रजिस्ट्रार से कार्रवाई की रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में सुप्रीम कोर्ट को सौंपने को कहा।

सौजन्य से:- Navbharat Times
लखीमपुर खीरी हिंसा मामले के पीठासीन न्यायिक अधिकारी पर लगे आरोपों पर सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस को जल्द उचित कार्रवाई करने का निर्देश दिया है।
लखनऊ: सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को 2021 के लखीमपुर खीरी हिंसा मामले के पीठासीन न्यायिक अधिकारी पर लगे आरोपों पर इलाहाबाद हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस को जल्द उचित कार्रवाई करने का निर्देश दिया। आरोप है कि न्यायिक अधिकारी ने कई आपराधिक मामलों को खुद के पास ट्रांसफर किया और आरोपियों को जमानत दी या बरी किया।
पीठ ने उत्तर प्रदेश सरकार को भी मुख्य मामले की सुनवाई के लिए जल्द नया सरकारी वकील नियुक्त करने को कहा। 22 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट ने पीड़ितों की ओर से पेश वकील प्रशांत भूषण की दलीलों पर इन आरोपों का संज्ञान लिया था।
जानिए सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा
हाईकोर्ट रजिस्ट्री की ओर से अधिवक्ता राकेश द्विवेदी ने सोमवार को बताया कि आरोपों की जांच के लिए प्रशासनिक समिति गठित की जानी है। इस पर पीठ ने कहा कि हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस को 22 सितंबर के हमारे आदेश के पैरा तीन के अनुसार उचित कार्रवाई करनी चाहिए। कोर्ट ने हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार (विजिलेंस) को कार्रवाई की रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में सुप्रीम कोर्ट को देने का निर्देश दिया। आरोपी आशीष मिश्रा की ओर से अधिवक्ता सिद्धार्थ दवे ने आरोपों का विरोध किया। कोर्ट ने कहा कि वह आरोपों पर टिप्पणी नहीं कर रहा। मामले को दो सप्ताह बाद सूचीबद्ध किया गया।
8 लोगों की हुई थी मौत
3 अक्टूबर, 2021 को यूपी के लखीमपुर खीरी जिले के तिकुनिया में किसानों के प्रदर्शन के दौरान आठ लोगों की मौत हो गई थी। किसान तत्कालीन उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के क्षेत्र के दौरे के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे थे। चार किसानों को एक एसयूवी ने कुचल दिया था। गुस्साए किसानों ने एक चालक और दो बीजेपी कार्यकर्ताओं की कथित तौर पर पीटकर हत्त्या कर दी थी। हिंसा में एक पत्रकार की भी मौत हुई थी।
सुप्रीम कोर्ट की क्या है मंशा ?
पीड़ित पक्ष ने जिस जज पर मामलों को अपने पास लेने और आरोपियों को राहत देने के आरोप लगाए हैं, उसे लेकर सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस को तत्काल कार्रवाई का निर्देश दिया। नए सरकारी वकील की जल्द नियुक्ति का निर्देश भी अहम है, क्योंकि सरकारी पक्ष की भूमिका मुकदमे की दिशा तय करती है। असल में, सुप्रीम कोर्ट यह पक्का करना चाहता है कि 2021 की हिंसा का मुकदमा निष्पक्ष, पारदर्शी और बिना किसी संस्थागत दबाव के आगे बढ़े।
लखीमपुर खीरी हिंसा मामले में अभी तक हुई कार्रवाई पर आपकी क्या राय है? कमेंट बॉक्स में लिखें।
लेखक के बारे मेंप्रशांत सिंहप्रशांत सिंह नवभारत टाइम्स ऑनलाइन में कंसल्टेंट राइटर हैं। पत्रकारिता में उनका 1.5 साल का अनुभव है। वह अभी उत्तर-प्रदेश और उत्तराखंड टीम का हिस्सा हैं। इससे पहले उन्होंने पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, केरल, महाराष्ट्र, आंध्र-प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, पंजाब-हरियाणा, गोवा समेत नॉर्थ-ईस्ट के राज्यों की खबरों पर काम किया। उन्होंने अपने करियर की शुरूआत नवभारत टाइम्स अखबार से की थी।प्रशांत सिंह को देश-विदेश की राजनीति के बारे में लिखना बेहद पसंद है। उन्होंने पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, केरल समेत पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों को अपनी टीम के साथ कवर किया है। इसके साथ ही उन्हें हिंद-प्रशांत महासागर और वेस्ट एशिया की जियोपॉलिटिक्स को समझने और उस पर लिखने में गहरी दिलचस्पी है।प्रशांत सिंह ने दिल्ली की गुरु गोबिंद सिंह इन्द्रप्रस्थ युनिवर्सिटी से जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन में ग्रेजुएशन किया है। इसके साथ ही उन्होंने दिल्ली की साउथ एशियन यूनिवर्सिटी से अंतर्राष्ट्रीय संबंध में पोस्ट ग्रेजुएशन किया है। उन्होंने अपनी मास्टर्स खत्म होने के बाद मीडिया जगत में कदम रखा।... और पढ़ें
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