तीन दशक पुराने मामले का निस्तारण: सुप्रीम कोर्ट ने दोषियों के खिलाफ कार्यवाही बंद की
मामले में दो आरोपी की मौत हो चुकी है और एक आरोपी की उम्र 60 साल से अधिक है। शीर्ष अदालत ने गौर किया कि अपील लंबित रहने के दौरान तीन आरोपियों में से दो की मौत हो गई, जबकि बचा हुआ एक आरोपी मथु 60 साल से अधिक उम्र का है।

सौजन्य से:- Live Hindustan
सुप्रीम कोर्ट ने तीन दशक पुराने मामले का निस्तारण किया
सुप्रीम कोर्ट ने 1997 में 500 रुपये की घड़ी को लेकर पड़ोसियों के बीच हुई बहस से जुड़े तीन दशक पुराने आपराधिक मामले को सुलझा लिया है। कोर्ट ने आईपीसी की धारा 304 के तहत दोषियों के खिलाफ कार्यवाही बंद कर दी है। इस मामले में आरोपियों में से दो की मौत हो चुकी है और एक आरोपी की उम्र 60 से अधिक है।
सुप्रीम कोर्ट ने 1997 में 500 रुपये की घड़ी को लेकर पड़ोसियों के बीच हुई बहस से जुड़े तीन दशक पुराने आपराधिक मामले को सुलझा लिया है। जस्टिस उज्जल भुइयां और अरुण पल्ली की पीठ ने तीन दोषियों के खिलाफ आईपीसी की धारा 304 के तहत आपराधिक कार्यवाही बंद कर दी है। यह धारा गैर-इरादतन हत्या (जो हत्या की श्रेणी में नहीं आती) से संबंधित है। शीर्ष अदालत ने गौर किया कि अपील लंबित रहने के दौरान तीन आरोपियों में से दो की मौत हो गई, जबकि बचा हुआ एक आरोपी मथु 60 साल से अधिक उम्र का है। शीर्ष अदालत ने बताया कि घटना 12 फरवरी, 1997 को हुई थी। रिकॉर्ड के अनुसार उस समय अपीलकर्ता की उम्र 33 साल थी। आज हम 2026 में हैं, तब से लगभग तीन दशक बीत चुके हैं। पीठ ने कहा कि मथु पहले ही डेढ़ साल की सजा काट चुका है। पीठ ने कहा कि इतने लंबे समय के बाद, हमारी राय है कि अगर हम सजा पांच साल की कठोर कैद से बदलकर उतनी ही कर दें जितनी वह पहले ही काट चुका है, और साथ ही दोषसिद्धि को भी बरकरार रखें, तो इससे न्याय के मकसद पूरे होंगे。
यह था मामला
पदम सिंह ने अपने पड़ोसी मनुआ को 500 रुपये में एक घड़ी बेची थी। मनुआ को घड़ी पसंद नहीं आई और उसने इसे लौटाने की कोशिश की। इसी बात को लेकर इनमें गंभीर झगड़ा हो गया। रामू और मथु ने मनुआ के साथ मिलकर सिंह को एक सूखी नहर में धकेल दिया। घायल सिंह को दून अस्पताल ले जाया गया, जहां उसकी मौत हो गई।
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तीन दशक पुराने मामले में सुप्रीम कोर्ट ने किया निस्तारण

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