शादी से इनकार पर रेप के रूप में अपराध न होने पर चिंता
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि शादी का वादा टूटना रेप नहीं है। कोर्ट ने शादी से इनकार पर दर्ज रेप के मामले को रद्द कर दिया।

सौजन्य से:- ETV Bharat
प्रेम संबंधों को अपराध का रंग देने की बढ़ती प्रवृत्ति चिंताजनक: इलाहाबाद हाईकोर्ट
लंबे प्रेम संबंध के बाद शादी से इनकार पर दर्ज रेप केस रद्द किया.
By ETV Bharat Uttar Pradesh Team
Published : June 26, 2026 at 7:25 PM IST
प्रयागराज: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक आदेश में कहा है कि झूठा वादा और वादा न निभा पाना, दोनों में फर्क होता है. अगर शुरू से ही धोखे की नीयत न हो तो शादी का वादा टूटना रेप की श्रेणी में नहीं आता. कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के कई फैसलों का हवाला देते कहा कि प्रेम संबंधों को अपराध का रंग देने की बढ़ती प्रवृत्ति चिंताजनक है.
यह आदेश न्यायमूर्ति विवेक कुमार सिंह ने दिया है. इसी के साथ कोर्ट ने कानपुर के उदित शुक्ल के खिलाफ रेप के आरोप में दाखिल चार्जशीट रद्द कर दी है. कोर्ट ने कहा कि तीन साल तक सहमति से बने शारीरिक संबंधों वाली प्रेम कहानी को महज इसलिए रेप नहीं कहा जा सकता कि शादी नहीं हुई.
पीड़िता ने आरोप लगाया था कि वर्ष 2021 से 2024 के बीच आरोपी ने शादी का झांसा देकर उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए. दोनों एक ही कोचिंग सेंटर में पढ़ते थे. जब आरोपी को स्टेट बैंक ऑफ इंडिया में नौकरी मिली और उसके पिता ने शादी से इनकार कर दिया, तब पीड़िता ने दिसंबर 2024 में एफआईआर दर्ज कराई.
कोर्ट ने पाया कि पीड़िता की उम्र लगभग 28 वर्ष थी और वह समझदार वयस्क महिला थी. तीन वर्ष तक उसने कोई शिकायत नहीं की. संबंध सहमति से बने थे, जिसकी पुष्टि फोटोग्राफ्स और गवाहों के बयान से हुई. स्वतंत्र गवाहों ने मारपीट और धमकी के आरोपों को झूठा बताया, इसलिए शादी न होने पर एफआईआर दर्ज करना टूटे रिश्ते का बदला प्रतीत होता है. इसी के साथ कोर्ट ने पूरी आपराधिक कार्यवाही रद्द कर दी.
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