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निर्भरता का नया कानून टीएमसी की डर की राजनीति: बीजेपी

महुआ मोइत्रा ने नए कानूनों को भारत में इमरजेंसी से भी बदतर बताया, जबकि भाजपा दमनकारी कानूनों का समर्थन कर रही है।

26 जून 2026 को 05:23 pm बजे
निर्भरता का नया कानून टीएमसी की डर की राजनीति: बीजेपी

सौजन्य से:- Amar Ujala

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'मीसा और यूएपीए से भी बदतर है नया कानून': महुआ मोइत्रा ने साधा निशाना, भाजपा बोली- डर का माहौल बना रही टीएमसी

Fri, 26 Jun 2026 10:08 PM IST

राकेश कुमार

पीटीआई, कोलकाता।

पीटीआई, कोलकाता।

Published by: राकेश कुमार

Updated Fri, 26 Jun 2026 10:08 PM IST

सार

पश्चिम बंगाल में सोमवार को पेश होने वाले यूसीसी और नए सार्वजनिक सुरक्षा विधेयक, 2026 को लेकर टीएमसी और भाजपा में भारी टकराव शुरू हो गया है। सांसद महुआ मोइत्रा ने इन कानूनों को इमरजेंसी से भी ज्यादा दमनकारी और ध्रुवीकरण करने वाला बताया है, जबकि भाजपा ने इसे कानून-व्यवस्था सुधारने और समानता लाने के लिए जरूरी कदम बताया है।

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विस्तार

पश्चिम बंगाल की सियासत इस समय पूरी तरह सुलग उठी है। तृणमूल कांग्रेस की फायरब्रांड सांसद महुआ मोइत्रा ने राज्य की भाजपा सरकार पर चौतरफा हमला बोला है। महुआ मोइत्रा ने सरकार पर विपक्ष को कुचलने और डराने-धमकाने का आरोप लगाया। दूसरी तरफ, सत्तारूढ़ भाजपा ने भी इस पर करारा जवाब दिया है। भाजपा ने कहा कि टीएमसी नए और कड़े कानूनों से पूरी तरह डर गई है।

इमरजेंसी से तुलना और 'सख्त कानून' पर विवाद

महुआ मोइत्रा ने टीएमसी सुप्रीमो ममता बनर्जी के कालीघाट स्थित आवास पर एक अहम बैठक में हिस्सा लिया। इसके बाद पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि जमीनी स्तर पर टीएमसी कार्यकर्ताओं को निशाना बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि पुलिस और झूठे मुकदमों के दम पर टीएमसी को जड़ से उखाड़ने का एक गुप्त 'ऑपरेशन' चल रहा है।

महुआ ने इस स्थिति की तुलना सीधे तौर पर देश में लागू हुए आपातकाल के दौर से कर दी। उन्होंने साफ कहा कि लाखों मतदाताओं की आवाज को दबाया नहीं जा सकता। कार्यकर्ताओं से उन्होंने अपील की कि वे प्रशासन से बिल्कुल न डरें और 21 जुलाई की वार्षिक शहीद रैली की तैयारियों में जुट जाएं।

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महुआ मोइत्रा ने राज्य सरकार के प्रस्तावित 'पश्चिम बंगाल सार्वजनिक सुरक्षा और असामाजिक गतिविधि नियंत्रण विधेयक, 2026' की प्रतियों को हाथ में लेकर उसे बेहद खतरनाक बताया। उन्होंने दावा किया कि यह नया कानून मीसा और यूएपीए से भी कहीं ज्यादा सख्त है। महुआ ने आरोप लगाया कि इसके तहत किसी भी व्यक्ति को महज शक के आधार पर बिना ट्रायल के एक साल तक हिरासत में रखा जा सकता है। इसमें कोई न्यायिक सुरक्षा भी नहीं है, जिससे नागरिक स्वतंत्रता खतरे में पड़ जाएगी।

यह भी पढ़ें: Ketan Murder Case: 'ऐसा कोई गवाह नहीं, जो यह साबित कर सके कि सिया ने अपराध किया', आरोपी के वकील का बड़ा दावा

समान नागरिक संहिता और धार्मिक ध्रुवीकरण का आरोप

शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार इस बजट सत्र में सोमवार को समान नागरिक संहिता विधेयक पेश करने की तैयारी में है। इसके साथ ही सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने और पुलिस पर हमले रोकने के लिए दो अन्य विधेयक भी पेश किए जाएंगे। इनमें से एक विधेयक 1972 के 'पश्चिम बंगाल लोक व्यवस्था रखरखाव अधिनियम' में संशोधन से जुड़ा है।

महुआ मोइत्रा ने प्रस्तावित यूसीसी पर भी सरकार को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि देश में आपराधिक न्याय प्रणाली पहले से ही एक समान है। उन्होंने सवाल उठाया कि यह कानून जनता की भलाई के लिए आ रहा है या फिर इसके पीछे धार्मिक ध्रुवीकरण का राजनीतिक एजेंडा है। उन्होंने तर्क दिया कि विविधता ही भारत की असली ताकत है। अगर कुछ समुदायों को इसमें छूट मिलेगी, तो यह समान नागरिक संहिता नहीं बल्कि एक 'चुनिंदा' नागरिक संहिता बनकर रह जाएगी। इससे जनजातीय समाज और अल्पसंख्यक प्रभावित होंगे।

भाजपा ने महुआ के इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया। वरिष्ठ भाजपा नेताओं ने कहा कि टीएमसी सत्ता गंवाने के बाद अब केवल डर का माहौल पैदा कर रही है। भाजपा के अनुसार, यह कानून राजनीतिक हिंसा, जबरन वसूली और संगठित अपराध पर लगाम लगाने के लिए लाया जा रहा है। यूसीसी पर भाजपा ने कहा कि यह समाज में लैंगिक न्याय और सभी नागरिकों को समान अधिकार देने का एक बड़ा सुधार है, जिस पर टीएमसी सांप्रदायिक राजनीति कर रही है।

मिड-डे मील से अंडा हटाने पर नया मोर्चा

राजनीति और कानूनों से इतर महुआ मोइत्रा ने बच्चों के खान-पान और पोषण का मुद्दा भी उठाया। कोलकाता नगर निगम के修कूलों में मिड-डे मील का जिम्मा इस्कॉन को सौंपने और अंडे की जगह शाकाहारी भोजन देने के फैसले पर उन्होंने गहरी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि गरीब और वंचित तबके के लाखों बच्चे इसी भोजन पर निर्भर हैं।

मशहूर स्लोगन 'संडे हो या मंडे, रोज खाओ अंडे' की याद दिलाते हुए महुआ ने कहा कि अंडा प्रोटीन का सबसे सस्ता और सुलभ जरिया है। भाजपा ने इस पर भी सफाई दी और कहा कि स्कूलों में पोषण के मानकों से कोई समझौता नहीं होगा। इस नई व्यवस्था का मकसद सिर्फ मिड-डे मील में स्वच्छता, गुणवत्ता और पारदर्शिता सुनिश्चित करना है।

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इमरजेंसी से तुलना और 'सख्त कानून' पर विवाद

महुआ मोइत्रा ने टीएमसी सुप्रीमो ममता बनर्जी के कालीघाट स्थित आवास पर एक अहम बैठक में हिस्सा लिया। इसके बाद पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि जमीनी स्तर पर टीएमसी कार्यकर्ताओं को निशाना बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि पुलिस और झूठे मुकदमों के दम पर टीएमसी को जड़ से उखाड़ने का एक गुप्त 'ऑपरेशन' चल रहा है।

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महुआ ने इस स्थिति की तुलना सीधे तौर पर देश में लागू हुए आपातकाल के दौर से कर दी। उन्होंने साफ कहा कि लाखों मतदाताओं की आवाज को दबाया नहीं जा सकता। कार्यकर्ताओं से उन्होंने अपील की कि वे प्रशासन से बिल्कुल न डरें और 21 जुलाई की वार्षिक शहीद रैली की तैयारियों में जुट जाएं।

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महुआ मोइत्रा ने राज्य सरकार के प्रस्तावित 'पश्चिम बंगाल सार्वजनिक सुरक्षा और असामाजिक गतिविधि नियंत्रण विधेयक, 2026' की प्रतियों को हाथ में लेकर उसे बेहद खतरनाक बताया। उन्होंने दावा किया कि यह नया कानून मीसा और यूएपीए से भी कहीं ज्यादा सख्त है। महुआ ने आरोप लगाया कि इसके तहत किसी भी व्यक्ति को महज शक के आधार पर बिना ट्रायल के एक साल तक हिरासत में रखा जा सकता है। इसमें कोई न्यायिक सुरक्षा भी नहीं है, जिससे नागरिक स्वतंत्रता खतरे में पड़ जाएगी।

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समान नागरिक संहिता और धार्मिक ध्रुवीकरण का आरोप

शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार इस बजट सत्र में सोमवार को समान नागरिक संहिता विधेयक पेश करने की तैयारी में है। इसके साथ ही सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने और पुलिस पर हमले रोकने के लिए दो अन्य विधेयक भी पेश किए जाएंगे। इनमें से एक विधेयक 1972 के 'पश्चिम बंगाल लोक व्यवस्था रखरखाव अधिनियम' में संशोधन से जुड़ा है।

महुआ मोइत्रा ने प्रस्तावित यूसीसी पर भी सरकार को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि देश में आपराधिक न्याय प्रणाली पहले से ही एक समान है। उन्होंने सवाल उठाया कि यह कानून जनता की भलाई के लिए आ रहा है या फिर इसके पीछे धार्मिक ध्रुवीकरण का राजनीतिक एजेंडा है। उन्होंने तर्क दिया कि विविधता ही भारत की असली ताकत है। अगर कुछ समुदायों को इसमें छूट मिलेगी, तो यह समान नागरिक संहिता नहीं बल्कि एक 'चुनिंदा' नागरिक संहिता बनकर रह जाएगी। इससे जनजातीय समाज और अल्पसंख्यक प्रभावित होंगे।

भाजपा ने महुआ के इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया। वरिष्ठ भाजपा नेताओं ने कहा कि टीएमसी सत्ता गंवाने के बाद अब केवल डर का माहौल पैदा कर रही है। भाजपा के अनुसार, यह कानून राजनीतिक हिंसा, जबरन वसूली और संगठित अपराध पर लगाम लगाने के लिए लाया जा रहा है। यूसीसी पर भाजपा ने कहा कि यह समाज में लैंगिक न्याय और सभी नागरिकों को समान अधिकार देने का एक बड़ा सुधार है, जिस पर टीएमसी सांप्रदायिक राजनीति कर रही है।

मिड-डे मील से अंडा हटाने पर नया मोर्चा

राजनीति और कानूनों से इतर महुआ मोइत्रा ने बच्चों के खान-पान और पोषण का मुद्दा भी उठाया। कोलकाता नगर निगम के修कूलों में मिड-डे मील का जिम्मा इस्कॉन को सौंपने और अंडे की जगह शाकाहारी भोजन देने के फैसले पर उन्होंने गहरी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि गरीब और वंचित तबके के लाखों बच्चे इसी भोजन पर निर्भर हैं।

मशहूर स्लोगन 'संडे हो या मंडे, रोज खाओ अंडे' की याद दिलाते हुए महुआ ने कहा कि अंडा प्रोटीन का सबसे सस्ता और सुलभ जरिया है। भाजपा ने इस पर भी सफाई दी और कहा कि स्कूलों में पोषण के मानकों से कोई समझौता नहीं होगा। इस नई व्यवस्था का मकसद सिर्फ मिड-डे मील में स्वच्छता, गुणवत्ता और पारदर्शिता सुनिश्चित करना है।

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