सुप्रीम कोर्ट 13 अगस्त को सुनवाई करेगा तमिलनाडु की कावेरी बाउंड्री विवाद की याचिका
सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु की एक अर्जी पर सुनवाई का निर्देश दिया है जिसमें उसे कावेरी नदी के पानी का एक हिस्सा छोड़ने के लिए कहा गया है. तमिलनाडु ने कर्नाटक सरकार से कहा है कि वह सुप्रीम कोर्ट के 2018 के फैसले के अनुसार निर्देशों का पालन करे और उसके हिस्से का पानी छोड़ दे. कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण ने अगले 15 दिनों तक तमिलनाडु को 3,500 क्यूसेक पानी छोड़ने की सिफारिश की है.

सौजन्य से:- ETV Bharat
कावेरी नदी से तमिलनाडु को पानी छोड़े जाने संबंधी याचिका, 13 अगस्त को सुनवाई करेगा सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट गुरुवार को तमिलनाडु की उस अर्जी पर सुनवाई करेगा जिसमें उसने कर्नाटक से कावेरी का अपना हिस्सा पानी देने की मांग की है.
By Sumit Saxena
Published : August 10, 2026 at 1:15 PM IST
नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को तमिलनाडु के हिस्से का कावेरी नदी का पानी तत्काल छोड़े जाने के संबंध में कर्नाटक को निर्देश देने संबंधी राज्य की याचिका पर 13 अगस्त को सुनवाई करने पर सहमति जताई. याचिका में कर्नाटक सरकार को कावेरी नदी का उसके हिस्से का पानी तुरंत छोड़ने का निर्देश देने का अनुरोध किया गया है.
सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची तथा न्यायमूर्ति वी. मोहन की बेंच ने तमिलनाडु सरकार की ओर से पेश वकील सीएस वैद्यनाथन की दलीलों पर गौर किया. वकील ने कहा कि कम बारिश वाले साल में तमिलनाडु को कावेरी जल में उसका निर्धारित हिस्सा नहीं मिल रहा है.
चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने कहा, "हम इसे बृहस्पतिवार को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करेंगे." मुख्यमंत्री जोसेफ विजय के नेतृत्व वाली तमिलनाडु सरकार ने तीन अगस्त को सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था और कर्नाटक सरकार को कावेरी जल में राज्य के हिस्से का पानी तत्काल जारी करने का निर्देश देने का अनुरोध किया था.
इस मामले से वाकिफ एक स्रोत के मुताबिक, तमिलनाडु सरकार ने दावा किया कि कर्नाटक सरकार तमिलनाडु को अनुपात के आधार पर पानी छोड़ने में नाकाम रही, यह देखते हुए कि तमिलनाडु का अनुपात के हिसाब से हिस्सा 26.954 टीएमसी है. कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण ने अगले 15 दिनों के लिए तमिलनाडु को 3,500 क्यूसेक पानी छोड़ने की कावेरी जल विनियमन समिति की सिफारिश को सही ठहराया.
2018 में, केंद्र ने तमिलनाडु, कर्नाटक, केरल और पुडुचेरी के बीच नदी के पानी के बंटवारे के विवाद को सुलझाने के लिए कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण (CWMA) बनाई थी. नदी किनारे के राज्यों के सदस्यों के अलावा, बोर्ड में केंद्र का एक नामांकित व्यक्ति (नॉमिनी) भी होता है.
हाल ही में, द्रमुक ने भी सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर कर्नाटक सरकार को तमिलनाडु को कावेरी का पानी तुरंत छोड़ने के निर्देश देने की मांग की. पार्टी ने कहा कि कर्नाटक को सुप्रीम कोर्ट के 2018 के आखिरी फैसले का सख्ती से पालन करना चाहिए और कावेरी वॉटर मैनेजमेंट अथॉरिटी द्वारा जारी निर्देशों का पालन करना चाहिए.
डीएमके (द्रमुक) ने अपनी अर्जी में कहा, "कर्नाटक राज्य, प्रतिवादी संख्या 1 को निर्देश दें कि वे कावेरी जल विनियमन समिति (सीडब्ल्यूआरसी) के 28 जुलाई, 2026 के निर्देश को तुरंत और पूरी तरह से लागू करें. जैसा कि कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण (सीडब्ल्यूएमए) ने 30 जुलाई, 2026 को पुष्टि किया था, इस कोर्ट के आदेश की तारीख से 15 दिनों की अवधि के लिए बिलिगुंडलू में हर दिन 3,500 क्यूसेक का प्रवाह सुनिश्चित करके और 29 जुलाई, 2026 से पालन में कमी को पूरा करें."
ये भी पढ़ें: कावेरी जल विवाद: तमिलनाडु को मिलेगा रोजाना 3500 क्यूसेक पानी, अगले 15 दिनों तक हर दिन मिलेगा पानी
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