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हाईकोर्ट की बड़ी रोक- प्रधानों को प्रशासक बनाने का सरकार का आदेश असंवैधानिक!

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कार्यकाल समाप्त होने के बाद ग्राम प्रधानों को प्रशासक बनाए जाने के सरकार के आदेश पर रोक लगा दी है। हाईकोर्ट ने इस आदेश को असंवैधानिक बताया है।

26 जून 2026 को 09:25 am बजे
हाईकोर्ट की बड़ी रोक- प्रधानों को प्रशासक बनाने का सरकार का आदेश असंवैधानिक!

सौजन्य से:- Navbharat Times

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कार्यकाल समाप्त होने के बाद ग्राम प्रधानों को प्रशासक बनाए जाने के फैसले पर रोक लगा दी है। हाईकोर्ट ने इस मामले में सरकार के फैसले को असंवैधानिक बताया है।

प्रयागराज: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कार्यकाल समाप्त होने के बाद ग्राम प्रधानों को प्रशासक बनाए जाने के फैसले पर रोक लगा दी है। हाईकोर्ट ने इस मामले में सरकार के फैसले को असंवैधानिक बताया है।

यह आदेश अरविंद राठौर की याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया गया। याचिका में कार्यकाल खत्म होने के बाद प्रधानों को प्रशासक बनाए जाने के फैसले को चुनौती दी गई थी।

क्या है मामला

हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद प्रदेश में पंचायतों के प्रशासनिक संचालन को लेकर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। मामले की अगली सुनवाई 13 जुलाई को होगी। बता दें कि यूपी में इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने ग्राम प्रधानों का कार्यकाल छह महीने बढ़ाए जाने पर राज्य निर्वाचन आयोग से चुनाव तारीख बताने को कहा है। 10 जुलाई को होने वाली अगली सुनवाई पर ओबीसी आयोग की रिपोर्ट कोर्ट में पेश करने का निर्देश सरकार को दिया है।

सरकार के ग्राम प्रधान ों के कार्यकाल को छह महीने तक बढ़ाए जाने के फैसले को चुनौती दी गई है। हाई कोर्ट ने सरकार से चुनाव तारीख बताने को कह चुकी है। साथ ही ओबीसी रिपोर्ट भी पेश करने को कहा है। उत्तर प्रदेश में प्रधानों का कार्यकाल 26 मई को खत्म हो चुका है, लेकिन सरकार ने चुनाव देरी से होने के कारण प्रधानों का कार्यकाल अगले 6 महीने के लिए बढ़ा दिया है। ग्राम प्रधान अब प्रशासनिक कार्यों के लिए प्रशासक के रूप में काम रहे हैं। सरकार के इस आदेश पर हाईकोर्ट ने रोक लगा दी है। हाईकोर्ट ने इस मामले में सरकार के फैसले को असंवैधानिक बताया है। ऐसे में पंचायतों के प्रशासनिक संचालन को लेकर सवाल खड़े होने लगे हैं।

लेखक के बारे मेंपवन नौटियालपवन नौटियाल नवभारत टाइम्स में उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड सेक्शन के लिए बतौर कंसलटेंट राइटर कार्यरत हैं। उन्हें प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल मीडिया में 14 वर्षों से अधिक का व्यापक पत्रकारीय अनुभव है। मूल रूप से उत्तराखंड (उत्तरकाशी) के रहने वाले पवन को दोनों राज्यों की राजनीति, सामाजिक-आर्थिक मुद्दों, क्राइम और यूटिलिटी खबरों की गहरी समझ है।उन्होंने अपने करियर की शुरुआत 2012 में देहरादून से एक प्रतिष्ठित न्यूज चैनल के साथ की, जहां उन्होंने विधानसभा चुनावों की ग्राउंड रिपोर्टिंग और कई एक्सक्लूसिव इंटरव्यू किए। उन्होंने 2013 की भीषण केदारनाथ आपदा की भी क्रेडिबल ग्राउंड रिपोर्टिंग की है। इसके बाद, उन्होंने 'दैनिक जागरण आई-नेक्स्ट' में 5 वर्षों तक डेस्क और फील्ड की दोहरी जिम्मेदारी संभाली। डिजिटल मीडिया में कदम रखते हुए उन्होंने वनइंडिया-डेलीहंट के साथ करीब 5 साल काम किया, जहां उन्होंने उत्तरकाशी के ऐतिहासिक सिलक्यारा टनल हादसे और धराली आपदा जैसी बड़ी घटनाओं को मौके पर जाकर कवर किया। दिल्ली से मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन करने वाले पवन विज्ञान के छात्र रहे हैं, जिससे उनकी खबरों में तार्किक और डेटा-आधारित सटीकता दिखती है।मुख्य विशेषज्ञता (Areas of Expertise)क्षेत्रीय कवरेज: उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड की राजनीति, समसामयिक मुद्दे और सामाजिक सरोकार।बीट्स: पॉलिटिकल एनालिसिस, क्राइम, हेल्थ, यूटिलिटी न्यूज और ग्राउंड डिजास्टर रिपोर्टिंग।अनुभव: 14+ वर्ष (प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल मीडिया)।पेशेवर यात्रा (Professional Experience)करियर की शुरुआत (2012): देहरादून में न्यूज चैनल से शुरुआत; उत्तराखंड विधानसभा चुनाव और केदारनाथ आपदा (2013) की लाइव कवरेज। 'लोकस्वामी' मैगजीन के लिए अहम कवर स्टोरीज।प्रिंट मीडिया (5 वर्ष): 'दैनिक जागरण आई-नेक्स्ट' में बतौर सीनियर सब-एडिटर/रिपोर्टर डेस्क और फील्ड रिपोर्टर के तौर पर काम।डिजिटल मीडिया (5 वर्ष): 'वनइंडिया-डेलीहंट' में यूपी-उत्तराखंड के चुनाव और बड़ी घटनाओं की कमान। उत्तरकाशी सिलक्यारा टनल रेस्क्यू और धराली आपदा की ग्राउंड रिपोर्टिंग।शिक्षा और क्रेडेंशियल (Education & Credentials)पोस्ट ग्रेजुएशन: मास कम्युनिकेशन (नई दिल्ली)।ग्रेजुएशन: साइंस स्ट्रीम (जो उनकी खबरों को एक विश्लेषणात्मक और सटीक दृष्टिकोण देता है)।स्थानीय जुड़ाव: मूल निवासी उत्तरकाशी (उत्तराखंड), जिससे उन्हें पहाड़ी राज्यों की भौगोलिक और राजनीतिक परिस्थितियों की स्वाभाविक और प्रामाणिक समझ है।... और पढ़ें

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