पुलिस की लापरवाही पर हाई कोर्ट सख्त, जमानत अर्जी में देरी के लिए लगाया 50 हजार का हर्जाना
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने जमानत अर्जी के निस्तारण में पुलिस की लापरवाही के कारण हुई 10 दिन की देरी पर उत्तर प्रदेश सरकार पर 50 हजार रुपये का हर्जाना लगाया है. अदालत ने पुलिस अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर कड़ी नाराजगी जताई और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने का निर्देश दिया.

सौजन्य से:- Jagran
जमानत अर्जी में 10 दिन की देरी पर हाई कोर्ट सख्त, यूपी सरकार पर लगाया 50 हजार रुपये का हर्जाना
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने जमानत अर्जी के निस्तारण में पुलिस की लापरवाही के कारण हुई 10 दिन की देरी पर उत्तर प्रदेश सरकार पर 50 हजार रुपये का हर्जाना लगाया ...और पढ़ें
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विधि संवाददाता, प्रयागराज। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने एक जमानत अर्जी के निस्तारण में पुलिस की लापरवाही के कारण 10 दिन से अधिक की देरी होने पर प्रदेश सरकार पर 50 हजार रुपये का हर्जाना लगाया है। अदालत ने निर्देश दिया कि यह राशि याचिकाकर्ताओं को दी जाए।
साथ ही राज्य सरकार को जांच के बाद संबंधित पुलिस अधिकारियों से यह रकम वसूलने की स्वतंत्रता भी दी है। न्यायमूर्ति अरुण कुमार सिंह देशवाल की एकलपीठ ने बिजनौर के चांदपुर थाने में दर्ज दहेज प्रताड़ना और आत्महत्या के मामले में आरोपित सास-ससुर यासीन और सबीला की जमानत अर्जी पर यह आदेश दिया।
अदालत ने रिकार्ड का परीक्षण करते हुए कहा कि ऐसा कोई पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिला, जिससे यह साबित हो कि मृतका को दहेज की मांग पूरी न होने पर प्रताड़ित किया गया था। स्वतंत्र गवाहों के बयानों से पति-पत्नी के बीच सामान्य घरेलू विवाद की बात सामने आई।
इसके आधार पर अदालत ने दोनों आरोपितों की जमानत मंजूर कर ली। दोनों 28 फरवरी 2026 से जेल में बंद हैं। सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने पुलिस अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर कड़ी नाराजगी जताई। अदालत ने कहा कि संयुक्त निदेशक (अभियोजन) कार्यालय ने 17 जून को जमानत अर्जी की प्रति पुलिस पैरोकार को उपलब्ध करा दी थी।
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इसके बाद 19 जून को पुलिस अधीक्षक को अलर्ट भेजा गया और 29 जून को स्मरण पत्र भी जारी किया गया। इसके बावजूद पुलिस ने अदालत को जरूरी निर्देश और केस डायरी उपलब्ध नहीं कराई। तीन जुलाई को सीसीटीएनएस पोर्टल से केस डायरी की पीडीएफ फाइल उपलब्ध कराने का निर्देश भी दिया गया था, लेकिन पुलिस ने केवल आरोपितों का आपराधिक इतिहास भेजा, केस डायरी नहीं।
मंगलवार को सुनवाई के दौरान थानाध्यक्ष राहुल सिंह ने अवकाश और कांवड़ यात्रा से जुड़ी ड्यूटी का हवाला दिया। वहीं एक उपनिरीक्षक ने संचार में कमी को कारण बताया। क्षेत्राधिकारी (सीओ) देश दीपक सिंह ने कहा कि उनके साथ तैनात हेड कांस्टेबल ने हाई कोर्ट से आए संदेशों की जानकारी ही नहीं दी।
अदालत ने कहा कि पुलिस अधिकारी एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डाल रहे हैं, जो गंभीर चिंता का विषय है। यदि समय पर केस डायरी और आवश्यक निर्देश उपलब्ध करा दिए जाते तो जमानत अर्जी का निस्तारण तीन जुलाई को ही हो सकता था।
अदालत ने पुलिस अधीक्षक को पूरे मामले की जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने और आवश्यकता पड़ने पर हर्जाने की राशि उनसे वसूलने का निर्देश दिया। साथ ही आदेश की प्रति पुलिस महानिदेशक और बिजनौर के पुलिस अधीक्षक को भेजने का भी निर्देश दिया।
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