सुप्रीम कोर्ट ने तुरंत कार्रवाई के लिए दी निंदा, मद्रास हाई कोर्ट की अंतरिम रोक बरकरार
तमिलनाडु सरकार की तरफ से कांग्रेस नेता अभिषेक मनु सिंघवी ने मद्रास हाई कोर्ट की रोक के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंची थी, लेकिन अदालत ने डीएमके नेता ईवी वेलु के खिलाफ भ्रष्टाचार के मामले में कार्रवाई पर रोक हटाने से इस समय इनकार कर दिया है।

सौजन्य से:- Navbharat Times
डीएमके नेता ईवी वेलु के खिलाफ सड़क परियोजना से जुड़े कई करोड़ के भ्रष्टाचार के मामले में किसी तरह की कार्रवाई पर मद्रास हाई कोर्ट ने अंतरिम रोक लगा रखी है। सीएम विजय की टीवीके की सरकार इसी रोक के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंची थी। लेकिन, सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को इस मामले में दखल देने से साफ इनकार कर दिया।
अभिषेक सिंघवी ने की तमिलनाडु सरकार की पैरवी
- इस केस में भी तमिलनाडु सरकार की ओर से कांग्रेस नेता और सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी पेश हुए।
- उन्होंने डीएमके नेता के खिलाफ किसी तरह की कार्रवाई रोकने के खिलाफ दलील दी कि हाई कोर्ट ने बिना मांगे ही उनकी गिरफ्तारी पर पूरी तरह से रोक लगा दी है, जबकि उन्होंने तो केस खारिज करने की याचिका दी थी।
- लाइव लॉ के अनुसार कांग्रेस नेता ने दलील दी कि सुप्रीम कोर्ट ने बार-बार कहा है कि आपराधिक कार्रवाई रोकने की याचिकाओं को अग्रिम जमानत का उपाय नहीं समझना चाहिए।
डीएमके नेता ने लगाया सियासी बदले का आरोप
- इस केस में डीएमके नेता की पैरवी करने के लिए वरिष्ठ वकील मुकुल रोहतगी पहुंचे थे।
- उन्होंने सिंघवी की दलीलों का विरोध करते हुए कहा कि वेलु के खिलाफ कार्रवाई राज्य में सत्ता परिवर्तन की वजह से हुई है।
वेलु को जांच में सहयोग करना होगा- सुप्रीम कोर्ट
- सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने कहा कि मद्रास हाई कोर्ट ने पहले ही पूर्व मंत्री ईवी वेलु को जांच में सहयोग करने का निर्देश दे रखा है।
- जस्टिस संदीप मेहता ने कहा कि कोर्ट को रिकॉर्ड से इस बात की जानकारी थी कि वेलु को जांच एजेंसी पहले ही बुला चुकी है।
- अदालत ने दोनों पार्टियों को सुनने के बाद राज्य सरकार की अपील खारिज कर दी।
- सिंघवी ने अदालत से अनुरोध किया कि वह सुनिश्चित करे कि वेलु जांच में सहयोग करें। इसपर सुप्रीम कोर्ट ने कहा-
डीएमके नेता के खिलाफ क्या है भ्रष्टाचार का मामला
- ईवी वेलु एमके स्टालिन की डीएमके सरकार में पीडब्ल्यूडी मंत्री थे।
- उनके कार्यकाल में रोड इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट में बड़ी अनियमितताओं का आरोप है।
- तमिलनाडु डायरेक्टोरेट ऑफ विजिलंस और एंटी-करप्शन (DVAC) ने इससे जुड़े भ्रष्टाचार के मामले में उनके खिलाफ केस दर्ज किया है।
- डीवीएसी ने राज्य में सरकार बदलने के बाद 25 जून, 2026 को इस मामले में एफआईआर दर्ज की है।
- इस घोटाले की शिकायत अराप्पोर लियक्कम नाम के एनजीओ ने 2022 में ही दर्ज कराई थी।
- तब राज्य में डीएमके की सरकार थी।
- एनजीओ का आरोप है कि रोड का काम शुरू होने से पहले ही ठेकेदार को पेमेंट जारी कर दिया गया, जिससे सरकारी खजाने को नुकसान हुआ।
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