होमकानूनवीबी-जी राम जी कानून से ग्रामीण मजदूरों को मिलेगी 125 दिन की रोजगार गारंटी और दैनिक मजदूरी में वृद्धि
कानून

वीबी-जी राम जी कानून से ग्रामीण मजदूरों को मिलेगी 125 दिन की रोजगार गारंटी और दैनिक मजदूरी में वृद्धि

केंद्र सरकार ने नई ग्रामीण रोजगार योजना के तहत मजदूरी दरों में वृद्धि की है, जिससे औसत दैनिक मजदूरी बढ़कर 327.4 रुपये हो गई है। ग्रामीण मजदूरों को अब 125 दिन की रोजगार गारंटी मिलेगी, जो पहले 100 दिन थी।

1 जुलाई 2026 को 01:24 am बजे
वीबी-जी राम जी कानून से ग्रामीण मजदूरों को मिलेगी 125 दिन की रोजगार गारंटी और दैनिक मजदूरी में वृद्धि

सौजन्य से:- Amar Ujala

{"_id":"6a444b9829dd9546320961e6","slug":"1-july-2026-vb-g-ram-g-act-to-come-into-force-from-today-revised-wage-rates-notified-2026-07-01","type":"story","status":"publish","title_hn":"VB-G RAM G: आज से वीबी-जी राम जी कानून लागू, ग्रामीण मजदूरों को मिलेगा 125 दिन का रोजगार; बढ़ी दैनिक मजदूरी","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}

VB-G RAM G: आज से वीबी-जी राम जी कानून लागू, ग्रामीण मजदूरों को मिलेगा 125 दिन का रोजगार; बढ़ी दैनिक मजदूरी

Wed, 01 Jul 2026 04:39 AM IST

Pavan

पीटीआई, नई दिल्ली

पीटीआई, नई दिल्ली

Published by: Pavan

Updated Wed, 01 Jul 2026 04:39 AM IST

सार

केंद्र सरकार ने 1 जुलाई से VB-G RAM G अधिनियम, 2025 लागू कर दिया है। नए कानून के तहत पात्र ग्रामीण परिवारों को अब 125 दिन के रोजगार की कानूनी गारंटी मिलेगी, जबकि पहले यह 100 दिन थी। साथ ही औसत दैनिक मजदूरी 298.8 रुपये से बढ़ाकर 327.4 रुपये कर दी गई है और न्यूनतम मजदूरी 300 रुपये प्रतिदिन तय की गई है।

विज्ञापन

खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें

या

वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें

अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो

विस्तार

केंद्र सरकार ने ग्रामीण रोजगार व्यवस्था में बड़ा बदलाव करते हुए 'विकसित भारत-गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण) अधिनियम, 2025' (वीबी-जी राम जी एक्ट) को 1 जुलाई से लागू कर दिया है। इसके साथ ही सरकार ने नई ग्रामीण रोजगार योजना के तहत मजदूरी दरों में भी बढ़ोतरी की है। अब देश में औसत दैनिक मजदूरी 298.8 रुपये से बढ़कर 327.4 रुपये हो गई है। यानी औसतन 28.6 रुपये प्रतिदिन की बढ़ोतरी हुई है। ग्रामीण विकास मंत्रालय ने मंगलवार को नई मजदूरी दरों की अधिसूचना जारी की। नई दरें 1 जुलाई से देश के सभी 34 राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों और मजदूरी क्षेत्रों में लागू हो गई हैं।

अब 100 नहीं, 125 दिन के रोजगार की गारंटी

सरकार के अनुसार, नए कानून के तहत पात्र ग्रामीण परिवारों को अब 125 दिनों के मजदूरी वाले रोजगार की कानूनी गारंटी मिलेगी। पहले मनरेगा (MGNREGA) के तहत 100 दिनों के रोजगार की गारंटी थी।

यह भी पढ़ें- Monsoon session: 20 जुलाई से शुरू हो सकता है संसद का मानसून सत्र, तीन सप्ताह तक चलने की संभावना

विज्ञापन

न्यूनतम मजदूरी 300 रुपये तय

सरकार ने नई योजना में 300 रुपये प्रतिदिन की अंतरिम न्यूनतम मजदूरी तय की है। इसका मतलब है कि इस योजना के तहत किसी भी राज्य में मजदूरी 300 रुपये से कम नहीं होगी। सरकार का कहना है कि पूरे देश में मजदूरी दरों में औसतन 10 प्रतिशत से अधिक की बढ़ोतरी की गई है।

इन राज्यों में सबसे ज्यादा बढ़ी मजदूरी

मंत्रालय के अनुसार, 21 राज्यों और प्रशासनिक इकाइयों में मजदूरी को बढ़ाकर सीधे 300 रुपये प्रतिदिन कर दिया गया है। वहीं उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल और असम जैसे राज्यों में मजदूरी दरों में 15 से 25 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी की गई है। सबसे अधिक बढ़ोतरी अरुणाचल प्रदेश और नागालैंड में हुई है, जहां मजदूरी करीब 24.5 प्रतिशत बढ़ाई गई है।

जिन राज्यों में पहले से मजदूरी अधिक थी, वहां भी बढ़ोतरी की गई है। नई अधिसूचना के अनुसार-

सरकार ने नई व्यवस्था को सुचारु रूप से लागू करने के लिए राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को 95,692.31 करोड़ रुपये की अंतरिम राशि आवंटित की है। इसका उद्देश्य समय पर मजदूरी भुगतान और विकास कार्यों को बिना रुकावट जारी रखना है।

शिवराज सिंह चौहान ने बताया ऐतिहासिक कदम

केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि सरकार की प्राथमिकता है कि कोई भी पात्र ग्रामीण मजदूर एक भी दिन काम से वंचित न रहे। उन्होंने कहा कि यह कानून विकसित भारत के लक्ष्य को मजबूत करेगा और गांवों की समृद्धि तथा आजीविका सुरक्षा को नई मजबूती देगा।

पुराने जॉब कार्ड फिलहाल रहेंगे मान्य

सरकार ने स्पष्ट किया है कि ई-केवाईसी सत्यापित पुराने जॉब कार्ड तब तक मान्य रहेंगे, जब तक नए ग्रामीण रोजगार गारंटी कार्ड जारी नहीं हो जाते। नई योजना में भी ग्राम पंचायतों की अहम भूमिका बनी रहेगी। योजना के तहत जल संरक्षण, प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन, कृषि, ग्रामीण आधारभूत ढांचा और महिला सशक्तिकरण से जुड़े कार्यों पर विशेष जोर दिया जाएगा।

यह भी पढ़ें- क्या मुश्किल में फंसेंगे सीएम विजय?: DMK का आरोप- तमिलनाडु की कैबिनेट बैठकों में शामिल हुए CM के करीबी लोग

विपक्ष ने उठाए सवाल

नई व्यवस्था को लेकर विपक्षी दलों और कुछ सामाजिक कार्यकर्ताओं ने चिंता जताई है। उनका कहना है कि इससे रोजगार की मांग आधारित व्यवस्था, राज्यों और पंचायतों की भूमिका तथा योजना के लिए पर्याप्त धन उपलब्ध कराने जैसे मुद्दों पर असर पड़ सकता है। हालांकि केंद्र सरकार का कहना है कि नया कानून ग्रामीण आजीविका को और मजबूत करेगा, बेहतर परिसंपत्तियों का निर्माण करेगा और रोजगार सृजन को अधिक प्रभावी बनाएगा। सरकार 2 जुलाई को मुक्कावरिपल्ली गांव में इस कानून का राष्ट्रीय स्तर पर औपचारिक शुभारंभ करेगी। इस कार्यक्रम में ग्रामीण रोजगार गारंटी कार्ड वितरित किए जाएंगे और योजना से संबंधित जागरूकता सामग्री भी जारी की जाएगी।

विज्ञापन

अब 100 नहीं, 125 दिन के रोजगार की गारंटी

सरकार के अनुसार, नए कानून के तहत पात्र ग्रामीण परिवारों को अब 125 दिनों के मजदूरी वाले रोजगार की कानूनी गारंटी मिलेगी। पहले मनरेगा (MGNREGA) के तहत 100 दिनों के रोजगार की गारंटी थी।

विज्ञापन

यह भी पढ़ें- Monsoon session: 20 जुलाई से शुरू हो सकता है संसद का मानसून सत्र, तीन सप्ताह तक चलने की संभावना

विज्ञापन

न्यूनतम मजदूरी 300 रुपये तय

सरकार ने नई योजना में 300 रुपये प्रतिदिन की अंतरिम न्यूनतम मजदूरी तय की है। इसका मतलब है कि इस योजना के तहत किसी भी राज्य में मजदूरी 300 रुपये से कम नहीं होगी। सरकार का कहना है कि पूरे देश में मजदूरी दरों में औसतन 10 प्रतिशत से अधिक की बढ़ोतरी की गई है।

इन राज्यों में सबसे ज्यादा बढ़ी मजदूरी

मंत्रालय के अनुसार, 21 राज्यों और प्रशासनिक इकाइयों में मजदूरी को बढ़ाकर सीधे 300 रुपये प्रतिदिन कर दिया गया है। वहीं उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल और असम जैसे राज्यों में मजदूरी दरों में 15 से 25 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी की गई है। सबसे अधिक बढ़ोतरी अरुणाचल प्रदेश और नागालैंड में हुई है, जहां मजदूरी करीब 24.5 प्रतिशत बढ़ाई गई है।

जिन राज्यों में पहले से मजदूरी अधिक थी, वहां भी बढ़ोतरी की गई है। नई अधिसूचना के अनुसार-

- हरियाणा- 409 रुपये प्रतिदिन

- गोवा- 406 रुपये प्रतिदिन

- केरल- 401 रुपये प्रतिदिन

- सिक्किम (ऊंचाई वाले ग्राम पंचायत क्षेत्र) - 450 रुपये प्रतिदिन

सरकार ने नई व्यवस्था को सुचारु रूप से लागू करने के लिए राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को 95,692.31 करोड़ रुपये की अंतरिम राशि आवंटित की है। इसका उद्देश्य समय पर मजदूरी भुगतान और विकास कार्यों को बिना रुकावट जारी रखना है।

शिवराज सिंह चौहान ने बताया ऐतिहासिक कदम

केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि सरकार की प्राथमिकता है कि कोई भी पात्र ग्रामीण मजदूर एक भी दिन काम से वंचित न रहे। उन्होंने कहा कि यह कानून विकसित भारत के लक्ष्य को मजबूत करेगा और गांवों की समृद्धि तथा आजीविका सुरक्षा को नई मजबूती देगा।

पुराने जॉब कार्ड फिलहाल रहेंगे मान्य

सरकार ने स्पष्ट किया है कि ई-केवाईसी सत्यापित पुराने जॉब कार्ड तब तक मान्य रहेंगे, जब तक नए ग्रामीण रोजगार गारंटी कार्ड जारी नहीं हो जाते। नई योजना में भी ग्राम पंचायतों की अहम भूमिका बनी रहेगी। योजना के तहत जल संरक्षण, प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन, कृषि, ग्रामीण आधारभूत ढांचा और महिला सशक्तिकरण से जुड़े कार्यों पर विशेष जोर दिया जाएगा।

यह भी पढ़ें- क्या मुश्किल में फंसेंगे सीएम विजय?: DMK का आरोप- तमिलनाडु की कैबिनेट बैठकों में शामिल हुए CM के करीबी लोग

विपक्ष ने उठाए सवाल

नई व्यवस्था को लेकर विपक्षी दलों और कुछ सामाजिक कार्यकर्ताओं ने चिंता जताई है। उनका कहना है कि इससे रोजगार की मांग आधारित व्यवस्था, राज्यों और पंचायतों की भूमिका तथा योजना के लिए पर्याप्त धन उपलब्ध कराने जैसे मुद्दों पर असर पड़ सकता है। हालांकि केंद्र सरकार का कहना है कि नया कानून ग्रामीण आजीविका को और मजबूत करेगा, बेहतर परिसंपत्तियों का निर्माण करेगा और रोजगार सृजन को अधिक प्रभावी बनाएगा। सरकार 2 जुलाई को मुक्कावरिपल्ली गांव में इस कानून का राष्ट्रीय स्तर पर औपचारिक शुभारंभ करेगी। इस कार्यक्रम में ग्रामीण रोजगार गारंटी कार्ड वितरित किए जाएंगे और योजना से संबंधित जागरूकता सामग्री भी जारी की जाएगी।

Powered by Nyaya 247 News

संबंधित ख़बरें

इसी विषय की और ख़बरें →

ताज़ा ख़बरें