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सीजीपी विरोध प्रदर्शन के दौरान सुरक्षा कार्रवाई पर सुप्रीम कोर्ट ने दिया सख्त संदेश

भारत का सर्वोच्च न्यायालय भारतीय कानून के मुताबिक कार्रवाई करने की बात की जिसमें जितनी भी अत्याचार हुआ हो उन पर शिकंजा लगाया जाएगा

28 जुलाई 2026 को 09:51 am बजे
सीजीपी विरोध प्रदर्शन के दौरान सुरक्षा कार्रवाई पर सुप्रीम कोर्ट ने दिया सख्त संदेश

सौजन्य से:- Hindustan Times

'जिसने भी ज्यादती की, उस पर कार्रवाई करें': सीजेपी विरोध प्रदर्शन के दौरान सुरक्षा कार्रवाई पर सुप्रीम कोर्ट का सख्त संदेश

सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत ने कहा कि जिसने भी ज्यादती की या कानून अपने हाथ में लिया, उसे कार्रवाई के लिए भेजा जाना चाहिए।

भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने मंगलवार को कॉकरोच जनता पार्टी द्वारा आयोजित 20 जुलाई के मार्च के दौरान छात्रों के विरोध प्रदर्शन पर सुरक्षा कार्रवाई पर सख्त संदेश दिया।

सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत ने कहा कि जिसने भी ज्यादती की या कानून अपने हाथ में लिया, उसे कार्रवाई के दायरे में लाया जाना चाहिए। भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने भी पुलिस की बर्बरता की स्वतंत्र जांच का आह्वान किया।

लाइव लॉ ने सीजेआई के हवाले से कहा, "पूरी तरह से स्वतंत्र जांच होनी चाहिए। जिसने भी ज्यादती की है, कानून अपना काम करेगा। अगर कोई जिम्मेदारी तय नहीं की गई तो जांच निरर्थक है।"

जैसा कि अधिवक्ताओं ने बिजली के डंडों के कथित उपयोग पर भी प्रकाश डाला, सीजेआई कांत ने मामले की निष्पक्ष, पारदर्शी और स्वतंत्र जांच पर जोर दिया।

'केवल आंदोलन लाठीचार्ज को उचित नहीं ठहरा सकता'

इससे पहले सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने 20 जुलाई को सीजेपी के चलो संसद मार्च के दौरान छात्रों और प्रदर्शनकारियों के खिलाफ अत्यधिक बल के इस्तेमाल की निंदा की थी।

भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत की अगुवाई वाली पीठ ने कहा कि वह प्रदर्शनों के दौरान प्रदर्शनकारियों और पुलिस कर्मियों को लगी चोटों के बारे में समान रूप से चिंतित है, और इस बात पर जोर दिया कि प्रदर्शनकारियों और पुलिस कर्मियों द्वारा "स्वयं लगाया गया अनुशासन" एक कार्यशील लोकतंत्र का अभिन्न अंग है।

"इसे प्रतिकूल रूप से न लें। यदि कोई ज्यादती हुई है, तो उस पर निष्पक्षता से गौर किया जा सकता है...किसने ऐसा किया है आदि...यह अकेले दिल्ली का सवाल नहीं है, बल्कि यह एक अखिल भारतीय मुद्दा है। ऐसा नहीं हो सकता कि कोई आंदोलन हो और इसलिए लाठीचार्ज हो। ऐसा भी नहीं हो सकता कि इन विरोध प्रदर्शनों में हिंसा हो,'' न्यायमूर्ति कांत ने कहा।

इसके साथ ही, बिहार में छात्र प्रदर्शनकारियों के खिलाफ एके-47 राइफल के इस्तेमाल का मुद्दा भी उठाया गया, जिस पर सीजेआई ने कहा कि वे पूरे देश के लिए विरोध प्रदर्शनों पर दिशानिर्देशों पर गौर करेंगे।

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