सुप्रीम कोर्ट ने कहा, ईपीएफ वेतन सीमा बढ़ाने की याचिका पर सुनवाई नहीं चाहिए
सुप्रीम कोर्ट ने बताया कि 16 सितंबर को केंद्र मंत्रिमंडल ने कर्मचारी भविष्य निधि (ईपीएफ) योजना की वेतन सीमा 15,000 रुपये से बढ़ाकर 25,000 रुपये करने का निर्णय लिया है, इसलिए इस मुद्दे पर याचिका की आगे कोई सुनवाई आवश्यक नहीं है। अदालत ने यह भी कहा कि सभी मांगें स्वीकार कर ली गई हैं और संबंधित पक्ष जल्द ही आवश्यक कदम उठाएंगे।

सौजन्य से:- Hindustan
ईपीएफ संबंधी मुद्दे पर सुनवाई की जरूरत नहीं : सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि केंद्रीय मंत्रिमंडल के 16 सितंबर के फैसले के अनुसार कर्मचारी भविष्य निधि (ईपीएफ) योजना के तहत वेतन सीमा 15,000 रुपये से बढ़ाकर 25,000 रुपये करने की याचिका पर आगे विचार की आवश्यकता नहीं है। अदालत ने स्वीकार किया कि सभी मांगें मंजूर की गई हैं और संबंधित पक्ष जल्द कदम उठाएंगे।
सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को कहा कि केंद्रीय मंत्रिमंडल के फैसले के मद्देनजर कर्मचारी भविष्य निधि (ईपीएफ) योजना के तहत वेतन सीमा बढ़ाने की मांग वाली याचिका पर आगे विचार की जरूरत नहीं है। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 16 सितंबर को अनिवार्य ईपीएफओ कवरेज के लिए वेतन सीमा 15 हजार रुपये से बढ़ाकर 25 हजार रुपये प्रतिमाह करने को मंजूरी दी है। न्यायमूर्ति बी.वी. नागरत्ना और न्यायमूर्ति ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की पीठ ने याचिकाकर्ता की ओर से पेश अधिवक्ता से कहा कि हमने मंत्रिमंडल के फैसले के बारे में अखबारों में खबर देखी है, आपकी सभी मांग स्वीकार कर ली गई हैं।
शीर्ष अदालत ने यह टिप्पणी उस याचिका पर सुनवाई करते हुए की, जिसमें ईपीएफ योजना के लिए 15,000 रुपये की मौजूदा वेतन सीमा को तत्काल संशोधित करने के लिए केंद्र सरकार को आदेश देने की मांग की गई थी। जब याचिकाकर्ता की ओर से पेश अधिवक्ता ने पीठ से कहा कि मंत्रिमंडल के फैसले के बाद अभी तक इस संबंध में अधिसूचना जारी नहीं हुई है तो पीठ ने कहा कि हम इस दलील का संज्ञान लेते हैं और हमारा मानना है कि रिट याचिका पर आगे विचार करने की जरूरत नहीं है क्योंकि कैबिनेट के फैसले के बाद संबंधित पक्ष जरूरी कदम उठाएंगे।
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