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सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के लिए स्वीकारता केंद्र की याचिका कांसुलर सेवाओं की आउटसोर्सिंग मामले में

सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली हाई कोर्ट के फैसले को चुनौती देने वाली केंद्र की याचिका पर सुनवाई की सहमति जताई है, जिसमें भारतीय मिशनों में कांसुलर, पासपोर्ट और वीजा सेवाओं के आउटसोर्सिंग के लिए निजी कंपनियों को दी गई निविदा रद कर दी गई थी।

17 जुलाई 2026 को 04:15 pm बजे
सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के लिए स्वीकारता केंद्र की याचिका कांसुलर सेवाओं की आउटसोर्सिंग मामले में

सौजन्य से:- Jagran

भारतीय मिशनों में वीजा सेवाओं की आउटसोर्सिंग पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई कल

सुप्रीम कोर्ट दिल्ली हाई कोर्ट के उस फैसले को चुनौती देने वाली केंद्र की याचिका पर सोमवार को सुनवाई करेगा, जिसमें भारतीय मिशनों में सीपीवी सेवाओं के आ ...और पढ़ें

HighLights

- सुप्रीम कोर्ट सोमवार को केंद्र की याचिका पर सुनवाई करेगा।

- दिल्ली हाई कोर्ट ने सीपीवी सेवाओं की निविदा रद्द की थी।

- आउटसोर्सिंग रद्द होने से वीजा सेवाएं प्रभावित हो रही हैं।

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को दिल्ली हाई कोर्ट के उस फैसले को चुनौती देने वाली केंद्र सरकार की याचिका पर सोमवार को सुनवाई करने पर सहमति जताई है, जिसमें अबू धाबी, कुवैत, सिंगापुर और कैनबरा स्थित भारतीय मिशनों में कांसुलर, पासपोर्ट और वीजा (सीपीवी) सेवाओं के आउटसोर्सिंग के लिए निजी कंपनियों को दी गई निविदा रद कर दी गई थी।

चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जोयमाल्या बागची और जस्टिस वी मोहना से सालिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि हाई कोर्ट के फैसले के कारण इन स्थानों पर वीजा और अन्य सेवाएं प्रदान करने में कठिनाई हो रही है।

सीजेआई ने सोमवार को याचिका पर सुनवाई की सहमति जताई। हाई कोर्ट ने सीपीवी सेवाओं की आउटसोर्सिंग के लिए निजी कंपनियों को दी गई निविदा रद करते हुए केंद्र को नए प्रस्ताव जारी कर नई बोलियां आमंत्रित करने का निर्देश दिया था।

सॉलिसिटर जनरल मेहता ने कहा कि निर्धारित प्रक्रिया का पालन करते हुए नई निविदाएं जारी कर दी गई हैं, लेकिन कोई नई एजेंसी तत्काल कामकाज शुरू नहीं कर सकती। इसके परिणामस्वरूप ऐसी सेवाएं लगभग ठप पड़ने की स्थिति में हैं।

हाई कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि निर्णय लेते समय केंद्र ने अज्ञात तुलनात्मक मानकों पर भरोसा किया, उद्देश्य मूल्यांकन मानदंडों के तहत अस्पष्ट कटौतियां कीं और असंगत अंकन अपनाया। ये कमियां सार्वजनिक खरीद प्रक्रिया में पारदर्शिता, निष्पक्षता और समानता को चोट पहुंचाती हैं।

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