सुप्रीम कोर्ट ने सोनम रघुवंशी की जमानत पर रोक लगाने से क्या कहा?
सुप्रीम कोर्ट ने मेघालय में प्रसिद्ध राजा रघुवंशी मर्डर केस में आरोपी सोनम रघुवंशी की जमानत पर रोक लगाने से इनकार कर दिया। सोनम को उनके पति राजा रघुवंशी की हत्या में आरोपी बनाया गया है। उनकी जमानत पर बातचीत करते हुए SC ने माना कि सोनम को उनकी गिरफ्तारी की वजह के बारे में ठीक से नहीं बताया गया था।

सौजन्य से:- Jagran
हनीमून मर्डर केस: सुप्रीम कोर्ट ने सोनम रघुवंशी की जमानत पर रोक लगाने से क्यों किया इनकार?
सुप्रीम कोर्ट ने राजा रघुवंशी मर्डर केस में आरोपी सोनम रघुवंशी की जमानत पर रोक लगाने से इनकार कर दिया। ...और पढ़ें
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डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। मेघालय के जाने-माने राजा रघुवंशी मर्डर केस में सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है. गुरुवार को शीर्ष अदालत ने सोनम रघुवंशी की जमानत पर रोक लगाने वाली याचिका से इनकार कर दिया. इस मामले में मेघालय सरकार ने मेघालय हाई कोर्ट के फैसले को चुनौती दी थी. मेघालय हाई कोर्ट से सोनम को जमानत मिली थी।
सोनम पर 2025 में मेघालय में हनीमून के दौरान अपने पति राजा रघुवंशी की हत्या का आरोप है। ट्रांसपोर्ट का काम करने वाले राजा रघुवंशी पिछले साल 23 मई को मेघालय में हनीमून के दौरान लापता हो गए थे।
बाद में 2 जून को मेघालय के पूर्वी खासी हिल्स जिले के सोहरा इलाके में एक झरने के पास खाई से उनका शव मिला था। इस मामले में उनकी पत्नी सोनम और उनके कथित बॉयफ़्रेंड समेत कई लोगों को गिरफ्तार किया गया था।
आरोपपत्र का हवाला देते हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि निचली अदालतों और ट्रायल कोर्ट दोनों ने सोनम के खिलाफ प्रथम दृष्टया मामला पाया, उसकी जमानत याचिका तीन बार खारिज भी की और इस बात पर चिंता जताई कि वह फरार हो सकती है, गवाहों को प्रभावित कर सकती है या सबूतों को मिटा सकती है.
SC ने सोनम की जमानत रद करने से क्यों इनकार किया?
जस्टिस एमएम सुंदरेश और जस्टिस शील नागू की बेंच ने हाई कोर्ट के जमानत देने के आदेश पर अपनी आपत्ति जताई। हालांकि, उन्होंने यह भी देखा कि सोनम रघुवंशी पहले ही जेल से रिहा हो चुकी थीं और ट्रायल कोर्ट की जमानत शर्तों के मुताबिक अभी शिलांग में है।
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जस्टिस सुंदरेश ने कहा, 'पहली नजर में हाई कोर्ट के फैसले को लेकर हमारी कुछ टिप्पणियां हैं। कैविएट पर पेश हुए आरोपी के वकील से बात करते हुए, जस्टिस सुंदरेश ने कहा कि आरोपी को गिरफ्तारी के आधार के बारे में बताया गया था और यह मुद्दा पहले की जमानत याचिकाओं में नहीं उठाया गया।
जस्टिस सुंदेश ने पूछा, 'आपने यह बात बाद में उठाई। क्या गलत धारा का हवाला देने जैसी तकनीकी वजह पर जमानत देना सही है, खासकर तब जब पहले मामले के तथ्यों के आधार पर जमानत खारिज कर दी गई थी?' एक क्लर्क की गलती ने सोनम को जमानत दिलाने में कैसे मदद की?
क्लर्क की गलती के कारण गलत धारा का हवाला दिया गया
सोनम को 27 अप्रैल को जमानत मिली, जिसमें एक क्लर्क की गलती ने अहम भूमिका निभाई। इस मामले में FIR भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 103 के तहत दर्ज की गई थी, जो हत्या से संबंधित है। हालांकि, जब सोनम को उसकी गिरफ्तारी की वजह बताई गई, तो पुलिस ने BNS की धारा 403(1) का हवाला दिया। BNS में धारा 403(1) मौजूद ही नहीं है और पुरानी भारतीय दंड संहिता (IPC) के तहत धारा 403 संपत्ति के बेईमानी से गबन से संबंधित थी, लेकिन उस प्रावधान को BNS में शामिल नहीं किया गया था।
ट्रायल कोर्ट ने पाया कि यह गलती सिर्फ एक दस्तावेज तक सीमित नहीं थी। गलत धारा का ज़िक्र कई रिकॉर्ड में किया गया था, जिसमें गिरफ्तारी मेमो, गिरफ्तारी को सही ठहराने वाली चेकलिस्ट, निरीक्षण मेमो, अधिकारों की जानकारी और केस डायरी का अंश शामिल था। इनमें से किसी भी दस्तावेज में सोनम को यह नहीं बताया गया था कि उसे हत्या के आरोप वाली धारा 103 के तहत गिरफ्तार किया गया है।
अभियोजन पक्ष की इस दलील को खारिज करते हुए कि यह महज़ एक क्लर्क की गलती थी, कोर्ट ने कहा कि कई दस्तावेजों में ऐसी गलती को नज़रअंदाज नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने माना कि सोनम को उसकी गिरफ्तारी की वजह के बारे में ठीक से नहीं बताया गया था जो हर गिरफ्तार व्यक्ति का कानूनी अधिकार है और उसे जमानत दे दी।
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