चुनावी बांड योजना में संशोधन को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती
उच्चतम न्यायालय ने चुनावी बांड योजना में संशोधन को चुनौती देने वाली याचिका पर नोटिस जारी किया है, जिसमें तर्क दिया गया है कि यह संशोधन मतदाताओं के सूचना के अधिकार का उल्लंघन करता है। केंद्र सरकार से चार सप्ताह में जवाब मांगा गया है।

सौजन्य से:- Live Law
उच्चतम न्यायालय ने चुनावी बांड योजना में संशोधन को चुनौती देने वाली जनहित याचिका पर नोटिस जारी किया है। मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ ने केंद्र सरकार से चार सप्ताह के भीतर जवाब मांगा है। याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि संशोधन मतदाताओं के सूचना के अधिकार का उल्लंघन करता है।
Live Law के अनुसार, यह याचिका चुनावी बांड योजना में हाल ही में किए गए संशोधन को चुनौती देती है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि यह संशोधन मतदाताओं को जानकारी देने के अधिकार का उल्लंघन करता है। उच्चतम न्यायालय ने अब केंद्र सरकार से जवाब मांगा है और इस मामले में आगे की कार्रवाई के लिए तैयार है।
संबंधित ख़बरें
इसी विषय की और ख़बरें →
सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने की सिफारिश: चार नए मुख्य न्यायाधीश!

सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की बड़ी सिफारिश, 4 हाईकोर्ट में नए चीफ जस्टिस नियुक्त

सुप्रीम कोर्ट के महत्वपूर्ण फैसलों का वार्षिक सारांश: जांच और कानूनी कार्यवाही में नए मानक

गुरुग्राम में चलेगा बुलडोजर, टूटेंगे अवैध आशियाने

सुप्रीम कोर्ट ने योग्यता अंकों के निर्धारण और साक्षात्कार बेंचमार्क में बदलाव पर दिया निर्णय

अनुसमर्थन की गहराई: सुप्रीम कोर्ट ने निर्धारित किया मूल्यांकन का महत्व

सुप्रीम कोर्ट ने कर दायित्व को वैध ठहराया, लेकिन पूर्वव्यापी जुर्माना नहीं माना

अगर सुप्रीम कोर्ट ने नहीं माननी तो 5 लाख लोगों का रोजगार होगा असुरक्षित
ताज़ा ख़बरें
- सामग्री का प्रमाण नहीं है दस्तावेज़ प्रदर्शन को केवल चिह्नित करना: सुप्रीम कोर्ट
- दस्तावेज़ों का प्रदर्शन करने से सामग्री का प्रमाण नहीं: सुप्रीम कोर्ट
- मप्र के बाहर ट्रस्ट कितने फायदे के हैं?
- निवारक निरोध की गलत व्याख्या गंभीर परिणामों की ओर ले जा सकती है: सुप्रीम कोर्ट
- सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: सैन्य प्रशिक्षण में विकलांग कैडेटों को मिलेगा आरक्षण
- सुप्रीम कोर्ट में मध्यस्थता प्रक्रिया से परिवार के सदस्यों को मिली उम्मीद
- सुप्रीम कोर्ट की बात, रानी-प्रिया कपूर विवाद आपसी सहमति से सुलझ सकता है
- सोशल मीडिया पर अदालत की सुनवाई के वीडियो की साझा पर रोक

