न्यायिक कार्यवाही की रिपोर्टिंग पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि मीडिया न्यायिक कार्यवाही की रिपोर्टिंग कर सकता है, लेकिन अदालत की ऑडियो-वीडियो क्लिप का उपयोग प्रतिबंधित रहेगा। यह फैसला हाल ही में जारी किए गए अंतरिम आदेश पर भ्रम को दूर करने के लिए आया है।

सौजन्य से:- Jagran
'मीडिया कर सकता है न्यायिक कार्यवाही की रिपोर्टिंग', सुप्रीम कोर्ट ने किया स्पष्ट
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि उसका अंतरिम आदेश न्यायिक कार्यवाही की ऑडियो-वीडियो क्लिप साझा करने पर रोक लगाता है, लेकिन समाचार संगठनों को रिपोर्टिंग ...और पढ़ें
HighLights
- सुप्रीम कोर्ट ने अंतरिम आदेश पर मीडिया का भ्रम दूर किया।
- न्यायिक कार्यवाही की रिपोर्टिंग पर समाचार संगठनों को छूट मिली।
- अदालत की ऑडियो-वीडियो क्लिप का उपयोग प्रतिबंधित रहेगा।
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि हाल ही में जारी किया गया उसका अंतरिम आदेश, जो अदालत की सुनवाई के ऑडियो और वीडियो क्लिप साझा करने और अपलोड करने पर रोक लगाता है, लेकिन समाचार संगठनों को न्यायिक कार्यवाही की रिपोर्टिंग से नहीं रोकता है।
यह स्पष्टता तब आई जब शीर्ष अदालत ने देखा कि उसके 24 जुलाई के अंतरिम आदेश के संबंध में कहा कि "कुछ भ्रम बना हुआ है"।
सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश का दिया स्पष्टीकरण
इसमें अदालत की प्रशासनिक अनुमति के बिना न्यायिक कार्यवाही के ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग को इंटरनेट मीडिया और अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्मों पर पोस्ट करने और अपलोड करने पर रोक लगाई गई थी।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि यह प्रतिबंध समाचार रिपोर्टों में न्यायिक कार्यवाही के आडियो और वीडियो रिकार्डिंग के उपयोग तक सीमित है और इसे मीडिया संगठनों द्वारा रिपोर्टिंग पर एक समग्र प्रतिबंध के रूप में नहीं समझा जाना चाहिए।
अदालत ने कहा, "ऐसा प्रतीत होता है कि पहले के आदेश के अनुच्छेद 11 के संबंध में कुछ भ्रम बना है, जिसे इस अदालत ने स्पष्ट करना आवश्यक समझा। उक्त अनुच्छेद यह स्पष्ट करता है कि आदेश को मान्यता प्राप्त समाचार आउटलेट द्वारा अदालत की कार्यवाही की रिपोर्टिंग पर एक समग्र निषेध के रूप में नहीं समझा जाना चाहिए।"
अदालत ने कहा, इसलिए ऐसे आउटलेट कार्यवाही की रिपोर्टिंग जारी रख सकते हैं और जनता को कानूनी विकास और न्यायिक निर्णयों की जानकारी दे सकते हैं, बशर्ते कि अदालत की कार्यवाही के आडियो या वीडियो क्लिप का उपयोग ऐसी रिपोर्टिंग के दौरान नहीं किया जाएगा।
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पीठ ने 31 जुलाई को पारित अपने आदेश में कहा, "समाचार आउटलेट अदालत की कार्यवाही पर रिपोर्टिंग जारी रख सकते हैं, फिर भी उन्हें अनुच्छेद 10 में निर्धारित प्रतिबंधों का पालन करना होगा।" हालांकि, समाचार संगठनों को 24 जुलाई के आदेश के अनुच्छेद 10 में निर्धारित प्रतिबंधों का पालन करना होगा।
शीर्ष अदालत ने पत्रकार हर्षिता ग्रोवर द्वारा दायर याचिका पर केंद्र और अन्य को नोटिस जारी कर उनकी प्रतिक्रियाएं मांगी गई हैं। याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता विकास सिंह ने कहा कि याचिका में उठाया गया मुद्दा बहुत महत्वपूर्ण है।
(समाचार एजेंसी पीटीआई के इनपुट के साथ)
यह भी पढ़ें- केंद्र सरकार का बड़ा कदम, पुलिस बलों के आधुनिकीकरण की योजना को सैद्धांतिक मंजूरी के लिए भेजा प्रस्ताव
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