Supreme Court: सुप्रीम कोर्ट आज बताएगा उद्योग की परिभाषा, CJI की अध्यक्षता वाली नौ जजों की पीठ के फैसले पर नजर
{"_id":"6a863c9e954290b06a02d684","slug":"supreme-court-verdict-today-on-definition-of-industry-what-will-be-impact-on-millions-of-employees-2026-08-20","type":"story","status":"publish","title_hn":"Supreme Court: सुप्री…

सौजन्य से:- Amar Ujala
{"_id":"6a863c9e954290b06a02d684","slug":"supreme-court-verdict-today-on-definition-of-industry-what-will-be-impact-on-millions-of-employees-2026-08-20","type":"story","status":"publish","title_hn":"Supreme Court: सुप्रीम कोर्ट आज बताएगा उद्योग की परिभाषा, CJI की अध्यक्षता वाली नौ जजों की पीठ के फैसले पर नजर","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
Supreme Court: सुप्रीम कोर्ट आज बताएगा उद्योग की परिभाषा, CJI की अध्यक्षता वाली नौ जजों की पीठ के फैसले पर नजर
Thu, 20 Aug 2026 05:00 AM IST
हिमांशु सिंह चंदेल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: हिमांशु सिंह चंदेल
Updated Thu, 20 Aug 2026 05:00 AM IST
सार
सुप्रीम कोर्ट की नौ जजों की संविधान पीठ आज यह तय करने वाली है कि कानून में ‘इंडस्ट्री’ यानी उद्योग की परिभाषा कितनी व्यापक होनी चाहिए। मामला 1978 के उस ऐतिहासिक फैसले से जुड़ा है, जिसने अस्पतालों, शिक्षण संस्थानों और सरकारी कल्याणकारी विभागों के लाखों कर्मचारियों को श्रम कानून की सुरक्षा के दायरे में ला दिया था। अब सवाल है कि क्या अदालत उस पुरानी व्याख्या को बरकरार रखेगी या उसमें बदलाव करेगी? आइए, सबकुछ विस्तार से जानते हैं...
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
सुप्रीम कोर्ट की नौ जजों की संविधान पीठ बृहस्पतिवार को उद्योग की कानूनी परिभाषा से जुड़े अहम मामले में फैसला सुनाएगी। यह विवाद औद्योगिक विवाद अधिनियम, 1947 के तहत उद्योग शब्द के अर्थ से जुड़ा है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने 19 मार्च को मामले में सुनवाई पूरी करने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया था। इस फैसले का असर पुराने कानून के तहत लंबित और मौजूदा विवादों पर पड़ सकता है।
ये भी पढ़ें- नागरिकता नियमों में बड़ा बदलाव: सीमावर्ती राज्यों के डीएम को मिला नागरिकता देने का अधिकार, क्या है नियम?
विज्ञापन
विज्ञापन
विवाद की शुरुआत किस फैसले से हुई थी?
मामले की जड़ 1978 के बंगलूरू जल आपूर्ति एवं सीवरेज बोर्ड बनाम राजप्पा मामले में दिए गए सुप्रीम कोर्ट के फैसले में है। उस समय सात जजों की पीठ ने उद्योग शब्द की व्यापक व्याख्या की थी। इसके चलते अस्पतालों, शिक्षण संस्थानों, क्लबों और सरकारी कल्याणकारी विभागों जैसी कई संस्थाओं में काम करने वाले कर्मचारियों को औद्योगिक विवाद कानून के तहत संरक्षण मिलने का रास्ता खुला। अब नौ जजों की पीठ यह देख रही है कि 1978 में दी गई यह व्यापक व्याख्या कानूनी रूप से सही थी या नहीं।
विज्ञापन
ये भी पढ़ें- नागरिकता नियमों में बड़ा बदलाव: सीमावर्ती राज्यों के डीएम को मिला नागरिकता देने का अधिकार, क्या है नियम?
विज्ञापन
Powered by Nyaya 247 News
संबंधित ख़बरें
इसी विषय की और ख़बरें →
राष्ट्रीय विधानसभा ने संशोधित पेट्रोलियम कानून को आधिकारिक तौर पर पारित कर दिया।

'धार्मिक स्वतंत्रता सार्वजनिक कानून व्यवस्था से ऊपर नहीं' पटना हाईकोर्ट का महावीरी झंडा मेला पर बड़ा फैसला

नए सीमा शुल्क कानून से कागजी कार्रवाई को बार-बार जमा करने और दोबारा जमा करने की अंतहीन प्रक्रिया का अंत हो जाएगा।

23 अगस्त को राष्ट्रीय सभा ने छह मसौदा कानूनों को पारित किया और संशोधित दंड संहिता पर चर्चा की।

प्रांतीय राष्ट्रीय सभा के प्रतिनिधियों ने अचल संपत्ति व्यवसाय संबंधी कानून में संशोधन के लिए सुझाव दिए।

उप प्रधानमंत्री ने अनुरोध किया कि 14 मसौदा कानूनों से संबंधित फाइलों को 24 अगस्त से पहले अंतिम रूप दे दिया जाए।

प्रांतीय राष्ट्रीय सभा के प्रतिनिधियों ने अचल संपत्ति व्यवसाय संबंधी कानून में संशोधन के लिए नीतिगत दिशा-निर्देशों पर चर्चा की।

पटना हाई कोर्ट ने 300 श्रद्धालुओं के जुलूस से इनकार किया, कहा- सार्वजनिक व्यवस्था धर्म से ऊपर है
ताज़ा ख़बरें
- सुप्रीम कोर्ट: 22 अगस्त फुल वर्किंग डे, लोक अदालत
- सामाजिक कल्याण के लिए व्यावहारिक आवश्यकताओं को सुनिश्चित करने हेतु भूमि कानून और आवास कानून में संशोधन किया जाए।
- विवाहित बेटियों को अनुकंपा नौकरियों में शामिल करें
- 22 अगस्त को इतिहास में क्या हुआ
- अब 1 साल वकालत कर बन सकेंगे जज, सुप्रीम कोर्ट ने किया बड़ा बदलाव, इन लोगों को मिलेगा फायदा
- संपत्ति कर तय करने की पद्धति अदालत नहीं कर सकती निर्धारित, दिल्ली हाईकोर्ट ने खारिज की खान मार्केट एसोसिएशन की याचिका
- पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय ने 19 महिलाओं की नियुक्ति के साथ ऐतिहासिक ऊंचाई को छुआ - द ट्रिब्यून
- योजना में अनधिकृत बदलावों को रोकने के लिए भूमि कानून में संशोधन करें।

