सुप्रीम कोर्ट का निर्देश: हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त जजों को मिलेंगी समान सुविधाएं
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया है कि वह हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त जजों के लिए समान नियम बनाने के लिए एक समिति गठित करे। इससे पूरे देश में सेवानिवृत्त जजों को समान सुविधाएं मिलेंगी।

सौजन्य से:- Amar Ujala
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Supreme Court: सेवानिवृत्त जजों की सुविधाओं पर बनेंगे सामान नियम, सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को क्या निर्देश दिए?
Mon, 20 Jul 2026 01:11 PM IST
निर्मल कांत
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।
Published by: निर्मल कांत
Updated Mon, 20 Jul 2026 01:11 PM IST
सार
Supreme Court: सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त मुख्य न्यायाधीशों और न्यायाधीशों के लिए पूरे देश में एक जैसे नियम बनाने को कहा है। इसके लिए एक समिति गठित करने को कहा गया है। पढ़िए रिपोर्ट-
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विस्तार
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया कि वह हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त मुख्य न्यायाधीशों और न्यायाधीशों को सेवानिवृत्ति के बाद दी जाने वाली सुविधाओं के लिए समान दिशा-निर्देश तैयार करने के उद्देश्य से एक समिति का गठन करे।
मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने निर्देश दिया कि यह समिति दो सप्ताह के भीतर गठित की जाए। समिति अपने गठन के तीन महीने के भीतर अपनी सिफारिशें केंद्र सरकार और सुप्रीम कोर्ट दोनों को सौंपे। इसमें केंद्र और राज्यों के बीच वित्तीय बोझ बांटने की व्यवस्था पर भी सुझाव देने को कहा गया है।
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शीर्ष कोर्ट ने कहा, इसमें कोई शक नहीं है कि ये सुविधाएं सभी को एक समान आधार पर मिलनी चाहिए। ऐसा कोई कारण नहीं है कि ये सुविधाएं अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग हों। सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने मौखिक रूप से कहा, वरिष्ठ नागरिकों की देखभाल करना हमारी संस्कृति का भी हिस्सा है।
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मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने निर्देश दिया कि यह समिति दो सप्ताह के भीतर गठित की जाए। समिति अपने गठन के तीन महीने के भीतर अपनी सिफारिशें केंद्र सरकार और सुप्रीम कोर्ट दोनों को सौंपे। इसमें केंद्र और राज्यों के बीच वित्तीय बोझ बांटने की व्यवस्था पर भी सुझाव देने को कहा गया है।
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शीर्ष कोर्ट ने कहा, इसमें कोई शक नहीं है कि ये सुविधाएं सभी को एक समान आधार पर मिलनी चाहिए। ऐसा कोई कारण नहीं है कि ये सुविधाएं अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग हों। सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने मौखिक रूप से कहा, वरिष्ठ नागरिकों की देखभाल करना हमारी संस्कृति का भी हिस्सा है।
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