मणिपुर हिंसा के मामलों में सुप्रीम कोर्ट ने दिया सख्त निर्देश, विशेष अदालतों का प्रस्ताव
सुप्रीम कोर्ट ने मणिपुर हिंसा के मामलों में जांच और ट्रायल की धीमी रफ्तार पर चिंता जताई और विशेष अदालतों का प्रस्ताव दिया है। अदालत ने संकेत दिया कि मामलों के त्वरित निपटारे के लिए मणिपुर और गुवाहाटी हाईकोर्ट की सहमति से विशेष अदालतें गठित की जा सकती हैं, जहां रोजाना सुनवाई होगी।

सौजन्य से:- Navbharat Times
Supreme Court: मणिपुर हिंसा मामलों में सुप्रीम कोर्ट सख्त, रोजाना सुनवाई के लिए विशेष अदालतों का प्रस्ताव, जांच में तेजी लाने के निर्देश
Supreme Court On Manipur Violence Case: मणिपुर हिंसा से जुड़े मामलों की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को जांच और ट्रायल की धीमी रफ्तार पर चिंता जताई। अदालत ने संकेत दिया कि मामलों के त्वरित निपटारे के लिए मणिपुर और गुवाहाटी हाईकोर्ट की सहमति से विशेष अदालतें (स्पेशल कोर्ट) गठित की जा सकती हैं, जहां रोजाना सुनवाई होगी।
सीबीआई ने बताई जांच की स्थिति
सुनवाई के दौरान कोर्ट के सामने पेश स्टेटस रिपोर्ट के अनुसार, सीबीआई अब तक 21 मामलों में चार्जशीट दाखिल कर चुकी है, जबकि 11 मामलों की जांच जारी है। तीन मामलों में क्लोजर रिपोर्ट स्वीकार हो चुकी है और चार मामले अभी भी जांच के अधीन हैं। वहीं, राज्य के आठ जिलों में 3,020 मामलों की जांच कर रही एसआईटी ने 301 मामलों में आरोपपत्र दाखिल किए हैं। हालांकि, इनमें से केवल 10 मामलों में ही ट्रायल शुरू हो पाया है। इन मामलों में कुल 2,924 गवाहों से पूछताछ प्रस्तावित है। सीबीआई ने अदालत को बताया कि जांच पूरी करने में कई गंभीर दिक्कतें आ रही हैं। हिंसा के बाद बड़ी संख्या में गवाह दूसरे स्थानों पर चले गए हैं, कई लोग अविश्वास के कारण सहयोग नहीं कर रहे, भाषा संबंधी समस्याएं हैं और लंबे समय तक इंटरनेट बंद रहने के कारण डिजिटल साक्ष्य जुटाने में भी कठिनाई हुई है। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इन चुनौतियों को वह समझता है, लेकिन जांच अनिश्चितकाल तक लंबित नहीं रह सकती। अदालत ने टिप्पणी की, "चुनौतियां वास्तविक हो सकती हैं, लेकिन लंबित जांच उचित समय के भीतर पूरी होनी चाहिए।
विशेष अदालतों पर विचार
कोर्ट ने कहा कि वह मणिपुर सरकार तथा मणिपुर और गुवाहाटी हाईकोर्ट से विचार-विमर्श कर विशेष अदालतें गठित करने का प्रस्ताव रख रहा है, ताकि हिंसा से जुड़े मामलों की दिन-प्रतिदिन सुनवाई हो सके। अदालत ने अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल को लंबित और आरोपपत्र दाखिल हो चुके सभी मामलों का ब्यौरा एकत्र करने का निर्देश दिया, ताकि यह तय किया जा सके कि कितनी विशेष अदालतों की आवश्यकता होगी। सुनवाई के दौरान यह मुद्दा भी उठा कि कई पीड़ित परिवारों को अब तक चार्जशीट की प्रतियां नहीं मिली हैं। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया कि पीड़ितों और उनके वकीलों को एक सप्ताह के भीतर चार्जशीट उपलब्ध कराई जाए। हालांकि अदालत ने स्पष्ट किया कि यह दस्तावेज महिला संगठनों या जनहित याचिकाकर्ताओं को नहीं दिए जाएंगे, क्योंकि ये संवेदनशील आपराधिक मामलों से जुड़े हैं।
लापता लोगों और धार्मिक स्थलों का भी उठा मुद्दा
सुप्रीम कोर्ट ने करीब 30 लापता लोगों की सीबीआई जांच की मांग वाली याचिका पर आवेदकों को मणिपुर हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के समक्ष जाने की छूट दी। वहीं, हिंसा में क्षतिग्रस्त चर्चों और अन्य धार्मिक स्थलों के पुनर्निर्माण का मुद्दा भी अदालत के सामने आया। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि फिलहाल सरकार की प्राथमिकता विस्थापित लोगों को आवास उपलब्ध कराना है, क्योंकि "लोगों के सिर पर छत होना सबसे जरूरी है।" हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि किसी भी धार्मिक स्थल की जमीन पर अतिक्रमण नहीं होने दिया जाएगा। अदालत ने तीन सदस्यीय समिति को ऐसे सभी स्थलों का सत्यापन कर उन्हें सुरक्षित रखने के निर्देश दिए और समिति का कार्यकाल दिसंबर तक बढ़ा दिया। मामले की अगली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट जांच की प्रगति, विशेष अदालतों के गठन और पीड़ितों को न्याय दिलाने की दिशा में उठाए गए कदमों की समीक्षा करेगा
कन्वर्सेशन शुरू करें
Stateकी ताजा खबरें, ब्रेकिंग न्यूज, अनकही और सच्ची कहानियां, सिर्फ खबरें नहीं उसका विश्लेषण भी। इन सब की जानकारी, सबसे पहले और सबसे सटीक हिंदी में देश के सबसे लोकप्रिय, सबसे भरोसेमंद Hindi Newsडिजिटल प्लेटफ़ॉर्म नवभारत टाइम्स पर
Powered by Nyaya 247 News
संबंधित ख़बरें
इसी विषय की और ख़बरें →
सुप्रीम कोर्ट ने ‘वंदे मातरम’ के 6 पदों के गायन पर दंड के प्रश्न को जांचने का आश्वासन दिया

सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के वेतन कटौती व अवमानना आदेश पर रोक लगाई, हिमाचल के बागवानी सचिव को मिली राहत

सुप्रीम कोर्ट ने वैध कारणों से ‘वन्दे मातरम्’ न गाने पर दंड की जाँच को स्वीकृत किया, पर गीत के पदों की संख्या का फैसला संसद के अधिकार में रखा

सुप्रीम कोर्ट ने दवाओं की ऊँची कीमतों को ‘डकैती’ कहा, दवाओं पर मूल्य नियंत्रण की मांग

दिल्ली के 33 लाख मतदाताओं को SIR नोटिस: सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग से स्पष्टीकरण व फ़िल्टरिंग का निर्देश

लोक अदालत ने फरीदाबाद में सड़क दुर्घटना के मुआवजा क्लेम का निपटारा; बीमा कंपनी को 2.5 लाख रुपये देने का आदेश

सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली SIR नोटिसों को ‘मशीन‑जनित’ कहा

सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली के वोटर लिस्ट रिव्यू में ‘लॉजिकल डिस्क्रिपेन्सी’ नोटिस को यांत्रिक बताया
ताज़ा ख़बरें
- सुप्रीम कोर्ट ने कर्नाटक के प्रीमियम FAR योजना पर सरकार को नोटिस जारी किया
- सुप्रीम कोर्ट ने निजी विश्वविद्यालयों को मुनाफ़ा‑उपार्जन संस्था नहीं चलाने की चेतावनी
- रॉडाली बारुआ: 2026 एशियन गेम्स टैक्वांदो टीम में तुरंत प्रवेश के लिए दिल्ली हाई कोर्ट से अपील
- बॉम्बे हाई कोर्ट ने विजय माल्या को कोर्ट दस्तावेज़ ऑनलाइन साझा करने से रोक दिया
- सुप्रीम कोर्ट ने कहा, धार्मिक कारणों से वंदे मातरम् न गाने पर कोई आपराधिक दंड नहीं
- पैत्रिक व स्व-अर्जित संपत्ति में पिता के अधिकार: एक बेटे को सब दे पाना क्या वैध?
- झारखंड हाई कोर्ट ने कहा: बिहार का शराबबंदी कानून यहाँ नहीं लागू, जब्त पिक‑अप वैन को शर्तों के साथ रिहा
- पैतृक बनाम स्व-अर्जित: पिता की सम्पत्ति विभाजन पर सुप्रीम कोर्ट की 2026 तक की दिशा‑निर्देश

