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मणिपुर हिंसा के मामलों में सुप्रीम कोर्ट ने दिया सख्त निर्देश, विशेष अदालतों का प्रस्ताव

सुप्रीम कोर्ट ने मणिपुर हिंसा के मामलों में जांच और ट्रायल की धीमी रफ्तार पर चिंता जताई और विशेष अदालतों का प्रस्ताव दिया है। अदालत ने संकेत दिया कि मामलों के त्वरित निपटारे के लिए मणिपुर और गुवाहाटी हाईकोर्ट की सहमति से विशेष अदालतें गठित की जा सकती हैं, जहां रोजाना सुनवाई होगी।

25 जुलाई 2026 को 01:13 am बजे
मणिपुर हिंसा के मामलों में सुप्रीम कोर्ट ने दिया सख्त निर्देश, विशेष अदालतों का प्रस्ताव

सौजन्य से:- Navbharat Times

Supreme Court: मणिपुर हिंसा मामलों में सुप्रीम कोर्ट सख्त, रोजाना सुनवाई के लिए विशेष अदालतों का प्रस्ताव, जांच में तेजी लाने के निर्देश

Supreme Court On Manipur Violence Case: मणिपुर हिंसा से जुड़े मामलों की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को जांच और ट्रायल की धीमी रफ्तार पर चिंता जताई। अदालत ने संकेत दिया कि मामलों के त्वरित निपटारे के लिए मणिपुर और गुवाहाटी हाईकोर्ट की सहमति से विशेष अदालतें (स्पेशल कोर्ट) गठित की जा सकती हैं, जहां रोजाना सुनवाई होगी।

सीबीआई ने बताई जांच की स्थिति

सुनवाई के दौरान कोर्ट के सामने पेश स्टेटस रिपोर्ट के अनुसार, सीबीआई अब तक 21 मामलों में चार्जशीट दाखिल कर चुकी है, जबकि 11 मामलों की जांच जारी है। तीन मामलों में क्लोजर रिपोर्ट स्वीकार हो चुकी है और चार मामले अभी भी जांच के अधीन हैं। वहीं, राज्य के आठ जिलों में 3,020 मामलों की जांच कर रही एसआईटी ने 301 मामलों में आरोपपत्र दाखिल किए हैं। हालांकि, इनमें से केवल 10 मामलों में ही ट्रायल शुरू हो पाया है। इन मामलों में कुल 2,924 गवाहों से पूछताछ प्रस्तावित है। सीबीआई ने अदालत को बताया कि जांच पूरी करने में कई गंभीर दिक्कतें आ रही हैं। हिंसा के बाद बड़ी संख्या में गवाह दूसरे स्थानों पर चले गए हैं, कई लोग अविश्वास के कारण सहयोग नहीं कर रहे, भाषा संबंधी समस्याएं हैं और लंबे समय तक इंटरनेट बंद रहने के कारण डिजिटल साक्ष्य जुटाने में भी कठिनाई हुई है। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इन चुनौतियों को वह समझता है, लेकिन जांच अनिश्चितकाल तक लंबित नहीं रह सकती। अदालत ने टिप्पणी की, "चुनौतियां वास्तविक हो सकती हैं, लेकिन लंबित जांच उचित समय के भीतर पूरी होनी चाहिए।

विशेष अदालतों पर विचार

कोर्ट ने कहा कि वह मणिपुर सरकार तथा मणिपुर और गुवाहाटी हाईकोर्ट से विचार-विमर्श कर विशेष अदालतें गठित करने का प्रस्ताव रख रहा है, ताकि हिंसा से जुड़े मामलों की दिन-प्रतिदिन सुनवाई हो सके। अदालत ने अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल को लंबित और आरोपपत्र दाखिल हो चुके सभी मामलों का ब्यौरा एकत्र करने का निर्देश दिया, ताकि यह तय किया जा सके कि कितनी विशेष अदालतों की आवश्यकता होगी। सुनवाई के दौरान यह मुद्दा भी उठा कि कई पीड़ित परिवारों को अब तक चार्जशीट की प्रतियां नहीं मिली हैं। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया कि पीड़ितों और उनके वकीलों को एक सप्ताह के भीतर चार्जशीट उपलब्ध कराई जाए। हालांकि अदालत ने स्पष्ट किया कि यह दस्तावेज महिला संगठनों या जनहित याचिकाकर्ताओं को नहीं दिए जाएंगे, क्योंकि ये संवेदनशील आपराधिक मामलों से जुड़े हैं।

लापता लोगों और धार्मिक स्थलों का भी उठा मुद्दा

सुप्रीम कोर्ट ने करीब 30 लापता लोगों की सीबीआई जांच की मांग वाली याचिका पर आवेदकों को मणिपुर हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के समक्ष जाने की छूट दी। वहीं, हिंसा में क्षतिग्रस्त चर्चों और अन्य धार्मिक स्थलों के पुनर्निर्माण का मुद्दा भी अदालत के सामने आया। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि फिलहाल सरकार की प्राथमिकता विस्थापित लोगों को आवास उपलब्ध कराना है, क्योंकि "लोगों के सिर पर छत होना सबसे जरूरी है।" हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि किसी भी धार्मिक स्थल की जमीन पर अतिक्रमण नहीं होने दिया जाएगा। अदालत ने तीन सदस्यीय समिति को ऐसे सभी स्थलों का सत्यापन कर उन्हें सुरक्षित रखने के निर्देश दिए और समिति का कार्यकाल दिसंबर तक बढ़ा दिया। मामले की अगली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट जांच की प्रगति, विशेष अदालतों के गठन और पीड़ितों को न्याय दिलाने की दिशा में उठाए गए कदमों की समीक्षा करेगा

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