शीर्ष अदालत ने केंद्र सरकार को कब्जा-मुक्त राजमार्ग की सिफारिश की: देश भर में पैदल चलने वालों के लिए अलग जगह देने का आदेश
भारत की सुप्रीम कोर्ट ने सड़कें बिल्कुल कब्जा या हड़ल नहीं होनी चाहिए, क्योंकि यह पैदल चलने वालों के लिए खतरनाक साबित होती हैं। शीर्ष अदालत ने यह निर्देश दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश के बाद दिया है।

सौजन्य से:- Amar Ujala
{"_id":"6a704cd00fb7581f560996a4","slug":"supreme-court-updates-directs-centre-encroachment-free-walking-space-pedestrians-2026-08-03","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"Supreme Court: शीर्ष अदालत की केंद्र को हिदायत, कहा- सड़क पर न हो कोई कब्जा; पैदल चलने वालों को मिले जगह","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
Supreme Court: शीर्ष अदालत की केंद्र को हिदायत, कहा- सड़क पर न हो कोई कब्जा; पैदल चलने वालों को मिले जगह
Mon, 03 Aug 2026 01:39 PM IST
राकेश कुमार
पीटीआई, नई दिल्ली।
पीटीआई, नई दिल्ली।
Published by: राकेश कुमार
Updated Mon, 03 Aug 2026 01:39 PM IST
सार
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया है कि देश की हर सड़क पर पैदल चलने वालों के लिए अलग और कब्जा-मुक्त जगह बनाई जाए। कोर्ट ने कहा कि नागरिकों को बिना किसी हादसे के डर के चलने का अधिकार है और यह उनका मौलिक अधिकार है। शीर्ष अदालत से जुड़ी सभी बड़ी खबरें पढ़ने के लिए बने रहें अमर उजाला के साथ...
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
सुप्रिम कोर्ट ने सोमवार को केंद्र सरकार को एक बड़ा निर्देश दिया है। कोर्ट ने कहा कि देश में जहां भी सड़कें हैं, वहां पैदल चलने वालों के लिए अलग जगह तय होनी चाहिए। इस जगह पर किसी भी तरह का कब्जा नहीं होना चाहिए। जस्टिस पी एस नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की पीठ ने केंद्र सरकार के वकील को इस संबंध में अधिकारियों को जरूरी निर्देश देने को कहा है।
बिना बड़े खर्च के करें व्यवस्था
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस काम के लिए किसी बड़े बजट या निर्माण की जरूरत नहीं है। सरकार रस्सी या किसी अन्य तरीके से भी पैदल चलने वालों के लिए रास्ता अलग कर सकती है। बस यह सुनिश्चित किया जाए कि गाड़ियां उस रास्ते में न आएं। कोर्ट ने केंद्र को इस पर कदम उठाने के लिए दो हफ्ते का समय दिया है। कोर्ट का कहना है कि पैदल यात्रियों में यह भरोसा होना चाहिए कि वे गाड़ियों के डर के बिना आराम से चल सकते हैं।
फुटपाथ पर चलना है मौलिक अधिकार
इससे पहले 19 जून को सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम फैसला सुनाया था। शीर्ष अदालत ने कहा था कि साफ और सुरक्षित फुटपाथ पर चलना नागरिकों का मौलिक अधिकार है। यह अधिकार अनुच्छेद 19(1)(d) के तहत मिलने वाली घूमने-फिरने की आजादी और अनुच्छेद 21 के तहत मिलने वाले जीवन के अधिकार का हिस्सा है। कोर्ट ने माना कि फुटपाथ पर पहला अधिकार गाड़ियों का नहीं, बल्कि पैदल चलने वालों का है।
विज्ञापन
विज्ञापन
बिना बड़े खर्च के करें व्यवस्था
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस काम के लिए किसी बड़े बजट या निर्माण की जरूरत नहीं है। सरकार रस्सी या किसी अन्य तरीके से भी पैदल चलने वालों के लिए रास्ता अलग कर सकती है। बस यह सुनिश्चित किया जाए कि गाड़ियां उस रास्ते में न आएं। कोर्ट ने केंद्र को इस पर कदम उठाने के लिए दो हफ्ते का समय दिया है। कोर्ट का कहना है कि पैदल यात्रियों में यह भरोसा होना चाहिए कि वे गाड़ियों के डर के बिना आराम से चल सकते हैं।
विज्ञापन
फुटपाथ पर चलना है मौलिक अधिकार
इससे पहले 19 जून को सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम फैसला सुनाया था। शीर्ष अदालत ने कहा था कि साफ और सुरक्षित फुटपाथ पर चलना नागरिकों का मौलिक अधिकार है। यह अधिकार अनुच्छेद 19(1)(d) के तहत मिलने वाली घूमने-फिरने की आजादी और अनुच्छेद 21 के तहत मिलने वाले जीवन के अधिकार का हिस्सा है। कोर्ट ने माना कि फुटपाथ पर पहला अधिकार गाड़ियों का नहीं, बल्कि पैदल चलने वालों का है।
विज्ञापन
Powered by Nyaya 247 News
संबंधित ख़बरें
इसी विषय की और ख़बरें →
सुप्रीम कोर्ट ने ‘वंदे मातरम’ के 6 पदों के गायन पर दंड के प्रश्न को जांचने का आश्वासन दिया

सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के वेतन कटौती व अवमानना आदेश पर रोक लगाई, हिमाचल के बागवानी सचिव को मिली राहत

सुप्रीम कोर्ट ने वैध कारणों से ‘वन्दे मातरम्’ न गाने पर दंड की जाँच को स्वीकृत किया, पर गीत के पदों की संख्या का फैसला संसद के अधिकार में रखा

सुप्रीम कोर्ट ने दवाओं की ऊँची कीमतों को ‘डकैती’ कहा, दवाओं पर मूल्य नियंत्रण की मांग

दिल्ली के 33 लाख मतदाताओं को SIR नोटिस: सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग से स्पष्टीकरण व फ़िल्टरिंग का निर्देश

लोक अदालत ने फरीदाबाद में सड़क दुर्घटना के मुआवजा क्लेम का निपटारा; बीमा कंपनी को 2.5 लाख रुपये देने का आदेश

सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली SIR नोटिसों को ‘मशीन‑जनित’ कहा

सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली के वोटर लिस्ट रिव्यू में ‘लॉजिकल डिस्क्रिपेन्सी’ नोटिस को यांत्रिक बताया
ताज़ा ख़बरें
- सुप्रीम कोर्ट ने कर्नाटक के प्रीमियम FAR योजना पर सरकार को नोटिस जारी किया
- सुप्रीम कोर्ट ने निजी विश्वविद्यालयों को मुनाफ़ा‑उपार्जन संस्था नहीं चलाने की चेतावनी
- रॉडाली बारुआ: 2026 एशियन गेम्स टैक्वांदो टीम में तुरंत प्रवेश के लिए दिल्ली हाई कोर्ट से अपील
- बॉम्बे हाई कोर्ट ने विजय माल्या को कोर्ट दस्तावेज़ ऑनलाइन साझा करने से रोक दिया
- सुप्रीम कोर्ट ने कहा, धार्मिक कारणों से वंदे मातरम् न गाने पर कोई आपराधिक दंड नहीं
- पैत्रिक व स्व-अर्जित संपत्ति में पिता के अधिकार: एक बेटे को सब दे पाना क्या वैध?
- झारखंड हाई कोर्ट ने कहा: बिहार का शराबबंदी कानून यहाँ नहीं लागू, जब्त पिक‑अप वैन को शर्तों के साथ रिहा
- पैतृक बनाम स्व-अर्जित: पिता की सम्पत्ति विभाजन पर सुप्रीम कोर्ट की 2026 तक की दिशा‑निर्देश

