सुप्रीम कोर्ट ने आर्डी ग्रुप विवाद पर महत्वपूर्ण फैसला दिया, मध्यस्थता समझौता लागू करें
सुप्रीम कोर्ट ने आर्डी ग्रुप विवाद से जुड़े पक्षों को मध्यस्थता समझौते को लागू करने का निर्देश दिया है। यह विवाद वर्षों से व्यापक मुकदमेबाजी का विषय रहा है। इसमें मुख्य रूप से अशोक वर्मा की बेटियां शेफाली वर्मा और शिबानी वर्मा कपूर शामिल थीं।

सौजन्य से:- Amar Ujala
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Supreme Court: आर्डी ग्रुप विवाद से जुड़े पक्ष मध्यस्थता समझौता लागू करें, सुप्रीम कोर्ट की पीठ के अहम निर्देश
न्यूज डेस्क, अमर उजाला।
Published by: Jyoti Bhaskar
Updated Mon, 08 Jun 2026 02:04 PM IST
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सुप्रीम कोर्ट ने दिवंगत रियल एस्टेट डेवलपर अशोक वर्मा के परिवार से जुड़े वर्षों पुराने प्राथमिकी दर्ज को समाप्त करने का निर्देश दिया है। न्यायालय ने आर्डी ग्रुप और संबंधित पारिवारिक संपत्तियों से जुड़े विवादों में हुए मध्यस्थता समझौते को लागू करने का आदेश दिया। न्यायमूर्ति जेके माहेश्वरी और न्यायमूर्ति अतुल एस चंदुरकर की पीठ ने मध्यस्थता प्रक्रिया में हुई प्रगति पर ध्यान दिया। पीठ ने पक्षों को अदालत की निगरानी में हुई मध्यस्थता कार्यवाही के दौरान हुए समझौते को लागू करने का निर्देश दिया।
कैसे हुआ सौहार्दपूर्ण समाधान?
यह विवाद वर्षों से व्यापक मुकदमेबाजी का विषय रहा है। इसमें मुख्य रूप से अशोक वर्मा की बेटियां शेफाली वर्मा और शिबानी वर्मा कपूर शामिल थीं। विवाद पारिवारिक व्यापारिक हितों, रियल एस्टेट संपत्तियों और आर्डी ग्रुप से जुड़ी संपत्तियों से संबंधित था। यह सफलता पूर्व सुप्रीम कोर्ट न्यायाधीश कुरियन जोसेफ की देखरेख में हुई मध्यस्थता प्रक्रिया के माध्यम से मिली। न्यायालय ने पक्षों के बीच सौहार्दपूर्ण समाधान की सुविधा के लिए उन्हें नियुक्त किया था।
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सहमत शर्तों को आगे बढ़ाने का निर्देश
इस साल की शुरुआत में सुप्रीम कोर्ट के समक्ष कार्यवाही के अनुसार, न्यायाधीश कुरियन जोसेफ ने एक अंतरिम रिपोर्ट प्रस्तुत की। रिपोर्ट में बताया गया कि पक्षों ने मध्यस्थता के माध्यम से अपने प्रमुख विवादों को सफलतापूर्वक सुलझा लिया है। रिपोर्ट में 5 फरवरी, 2026 को एक अंतिम और बाध्यकारी समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर होने का भी उल्लेख किया गया। मध्यस्थ ने न्यायालय को सूचित किया कि एक व्यापक समझौता ढांचा तैयार करने और कार्यान्वयन प्रक्रिया पूरी करने के लिए अतिरिक्त समय की आवश्यकता होगी। रिपोर्ट पर ध्यान देते हुए, सुप्रीम कोर्ट ने समझौते के कार्यान्वयन के लिए समय दिया। न्यायालय ने पक्षों को सहमत शर्तों को आगे बढ़ाने का निर्देश दिया।
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सबसे चर्चित पारिवारिक व्यापार विवादों में महत्वपूर्ण सफलता
इस घटनाक्रम को आर्डी ग्रुप से जुड़े सबसे चर्चित पारिवारिक व्यापार विवादों में एक बड़ी सफलता माना जा रहा है। इस मुकदमेबाजी ने कई मंचों पर कार्रवाई को जन्म दिया था। इसमें दशकों से जमा हुई मूल्यवान पारिवारिक संपत्तियों के स्वामित्व, प्रबंधन और उत्तराधिकार से संबंधित मुद्दे शामिल थे।
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इसका मतलब क्या है
सुप्रीम कोर्ट के इस निर्देश से आर्डी ग्रुप और उसके संबंधित पारिवारिक मामलों में मध्यस्थता समझौते को लागू करने का जोखिम बढ़ गया है। यह मध्यस्थता प्रक्रिया को सफल बनाने का पहला बड़ा कदम हो सकता है जिससे सभी पक्षों का मूलभूत अधिकार और प्रतिष्ठा संरक्षित रह सकती है। सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश से यह भी स्पष्ट होता है कि मध्यस्थता परिस्थिति में भी एक मजबूत न्यायपालिका की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण है। सुप्रीम कोर्ट के स्वीकार्य मध्यस्थता समझौते से सभी पक्षों के लिए जो फायदा हो सकता है, वो यह है कि अदालत की निगरानी के तहत हुई मध्यस्थता कार्यवाही के दौरान पक्षकारों द्वारा हुए समझौते को मान्यता प्राप्त हो सकती है। इसका प्रभाव होगा कि पक्ष अपने बीच हुए समझौता के तहत किए गए फैसलों को लेकर विवादित नहीं बनेंगे और मध्यस्थता प्रक्रिया को सफलता मिलेगी।
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