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सोनम रघुवंशी: आजाद या जेल में क्या होगा, सुप्रीम कोर्ट में मेघालय सरकार की याचिका पर शुक्रवार को होगी सुनवाई

सोनम रघुवंशी पर अपने पति राजा रघुवंशी की हत्या का आरोप है। सुप्रीम कोर्ट में मेघालय सरकार ने सोनम की जमानत रद्द करने के लिए याचिका दायर की है। सुनवाई शुक्रवार को होगी।

3 जुलाई 2026 को 06:25 am बजे
सोनम रघुवंशी: आजाद या जेल में क्या होगा, सुप्रीम कोर्ट में मेघालय सरकार की याचिका पर शुक्रवार को होगी सुनवाई

सौजन्य से:- Navbharat Times

Sonam Raghuvanshi Case: सोनम रघुवंशी की जमानत रद्द करवाने मेघालय सरकार सुप्रीम कोर्ट पहुंची है। सुप्रीम कोर्ट में मेघालय सरकार की याचिका स्वीकार कर ली गई है। शुक्रवार को इस पर सुनवाई होगी।

इंदौर: बहुचर्चित इंदौर के ट्रांसपोर्ट कारोबारी राजा रघुवंशी की हत्या के मामले में मेघालय सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में मेघालय हाई कोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी है, जिसमें सोनम रघुवंशी को मिली जमानत को सही ठहराया गया था। सोनम पर मई 2025 में अपने पति राजा रघुवंशी की हनीमून के दौरान हत्या का मुख्य आरोपी होने का आरोप है। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने जस्टिस एमएम सुंदरेश की अध्यक्षता वाली बेंच के सामने राज्य की याचिका का जिक्र करते हुए इसे जल्द सुनवाई के लिए लिस्ट करने की मांग की।

शुक्रवार को है सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई

मेघालय सरकार की याचिका सुप्रीम कोर्ट में स्वीकार कर ली गई है। सुप्रीम कोर्ट तीन जुलाई को इस मसले पर सुनवाई करेगी। इसके साथ ही यह तय हो जाएगा कि सोनम रघुवंशी जेल से बाहर रहेगी या फिर से अंदर जाएगी।

नंबर टाइप करने में हुई थी गलती

एसजी तुषार मेहता ने सुप्रीम कोर्ट से कहा कि सोनम रघुवंशी को केवल इस आधार पर जमानत दे दी गई कि गिरफ्तारी के समय उसे गिरफ्तारी के सभी कारण पूरी तरह उपलब्ध नहीं कराए गए थे। तुषार मेहता ने यह भी कहा कि दस्तावेज में केवल एक कानूनी धारा के नंबर टाइप करने में गलती हुई थी। इतनी छोटी तकनीकी गलती के आधार पर जमानत नहीं मिलनी चाहिए। तुषार मेहता ने कहा कि जमानत बरकरार रहने की सूरत में सोनम के फरार होने की आशंका है, इसलिए मामले की तत्काल सुनवाई की जरूरत है।

हाईकोर्ट से खारिज हो गई है मेघालय सरकार की अपील

मेघालय हाईकोर्ट ने 29 जून को शिलॉन्ग अदालत के उस आदेश को बरकरार रखा था, जिसमें राजा रघुवंशी मर्डर केस की मुख्य आरोपी सोनम रघुवंशी को जमानत दी गई थी। अदालत ने राज्य सरकार की अपील को खारिज कर दिया।

10 जून को सुनवाई के बाद फैसला रख लिया था सुरक्षित

जस्टिस डब्ल्यू. डिएंगडोह की एकल पीठ ने अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश (न्यायिक), शिलॉन्ग के अप्रैल 2026 के आदेश को चुनौती देने वाली राज्य सरकार की याचिका को खारिज कर दिया था। इस आदेश में गिरफ्तारी में गंभीर प्रक्रियात्मक खामियां पाए जाने के बाद सोनम को जमानत दी गई थी। हाईकोर्ट ने 10 जून को दोनों पक्षों की विस्तृत दलीलें सुनने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था।

इस आधार पर मिली थी जमानत

शिलॉन्ग कोर्ट ने सोनम रघुवंशी को जमानत देते समय कहा था कि जांच अधिकारियों ने गिरफ्तारी के आधार सही तरीके से नहीं बताए, जिससे आरोपी के बचाव के अधिकार पर असर पड़ा। कोर्ट ने पाया कि गिरफ्तारी से जुड़े सभी दस्तावेज (जैसे गिरफ्तारी मेमो, चेकलिस्ट, अधिकारों की सूचना और केस डायरी के अंश) में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 403(1) लिखी गई थी, जबकि सही धारा 103(1) होनी चाहिए थी, जो हत्या से संबंधित है।

टाइपिंग की गलती बताया

अभियोजन पक्ष ने इसे केवल टाइपिंग की गलती बताया, लेकिन अदालत ने कहा कि यही गलती सभी दस्तावेजों में लगातार पाई गई और आरोपी को औपचारिक रूप से 'हत्या के आरोप' की जानकारी नहीं दी गई थी। राज्य सरकार ने हाई कोर्ट में दलील दी कि यह केवल प्रक्रियात्मक गलती थी और इससे आरोपी को कोई वास्तविक नुकसान नहीं हुआ।

हत्या के आरोप की नहीं थी जानकारी

सरकारी पक्ष ने कहा कि सोनम को हत्या के आरोप की जानकारी थी, क्योंकि उसने गिरफ्तारी के दस्तावेजों पर हस्ताक्षर किए थे, वह मजिस्ट्रेट के सामने पेश हुई थी और उसके पास वकील भी था। लेकिन हाईकोर्ट ने राज्य सरकार की दलील को स्वीकार नहीं किया और शिलॉन्ग कोर्ट का आदेश बरकरार रखते हुए सोनम को जमानत पर रहने की अनुमति दे दी।

मई में हुई थी राजा की हत्या

यह मामला इंदौर के व्यवसायी राजा रघुवंशी की हत्या से जुड़ा है, जो मई 2025 में अपनी पत्नी सोनम के साथ हनीमून पर मेघालय गए थे। दोनों सोहरा (चेरापूंजी) यात्रा के दौरान लापता हो गए थे। बाद में राजा का शव वीसावडोंग फॉल्स के पास एक गहरी खाई से बरामद हुआ, जिसमें कई चोटों के निशान थे। पुलिस जांच में आरोप लगाया गया कि सोनम ने अपने कथित प्रेमी और अन्य लोगों के साथ मिलकर राजा की हत्या की साजिश रची थी। इसके बाद सोनम को गिरफ्तार किया गया और अन्य आरोपियों को भी अलग-अलग राज्यों से पकड़ा गया। जांच पूरी होने के बाद पुलिस ने अदालत में चार्जशीट दाखिल कर दी है और मामला फिलहाल ट्रायल में है।

लेखक के बारे मेंमुनेश्वर कुमारमुनेश्वर कुमार नवभारत टाइम्स ऑनलाइन में प्रिंसिपल डिजिटल कंटेट प्रोड्यूसर (प्रमुख संवाददाता) हैं । वह मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ को कवर करते हैं। इसके अलावे दूसरे राज्यों की राजनीति की खबरें कवर कर देते हैं। पत्रकारिता की शुरुआत टीवी रिपोर्टिंग से हुई है। बीते 10 सालों से डिजिटल मीडिया में हूं। पत्रकारिता के क्षेत्र में कुल 15 सालों का अनुभव है। चार साल तक टीवी में रिपोर्टिंग और डेस्क पर काम किया। साल 2020 से नवभारत टाइम्स ऑनलाइन में कार्यरत हूं। मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ की राजनीति, सामाजिक और अपराध की खबरें कवर करता हूं। डेस्क के साथ-साथ ग्राउंड रिपोर्टिंग भी करता हूं। मध्य प्रदेश में दो लोकसभा चुनाव, विधानसभा चुनाव और नगर निकाय चुनाव को कवर किया। साथ ही कई बड़े इवेंट में ग्राउंड जीरो पर मौजूदगी रही है। टीवी और डिजिटल के बिहार में विधानसभा चुनाव को ग्राउंड से कवर किया हूं।

इसके साथ ही बिहार, राजस्थान, तेलंगाना और मध्य प्रदेश में रहकर टीवी और डिजिटल पत्रकारिता के अलग-अलग गुर सीखे है। एमपी में रहते हुए सीएम मोहन यादव से लेकर पूर्व सीएम शिवराज सिंह चौहान तक का इंटरव्यू किया हूं। इसके साथ ही एमपी के बड़े मंत्रियों, सेलिब्रिटी और अधिकारियों के इंटरव्यू किए हैं। इसके साथ ही अन्य राज्यों में भी इंटरव्यू किए। अन्ना आंदोलन के दौरान अन्ना हजारे का इंटरव्यू किया। मध्य प्रदेश में कमलनाथ की सरकार गिरने के पूरे प्रकरण को ग्राउंड जीरो से कवर किया।

विशेषता: पॉलिटिक्ल और अपराध की खबरों में विशेष दिलचस्पी है। बड़े घटनाक्रमों पर अलग-अलग एंगलों से खबरें लिखना। ओपिनियन लिखना।

पत्रकारिता का अनुभव: पत्रकारिता में कुल 15 सालों का अनुभव है। इसकी शुरुआत महुआ न्यूज टीवी चैनल से हुई थी। फिर अलग-अलग टीवी चैनलों में काम करते हुए। ईनाडु इंडिया में पहुंचे जो अब ईटीवी भारत है। वहां लंबे समय तक रहने के बाद राजस्थान पत्रिका भोपाल में पहुंचे। पत्रिका में एक करीब एक साल तक रहने के बाद नवभारत टाइम्स ऑनलाइन में कार्यरत हूं।... और पढ़ें

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