सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार के रुख पर नाराजगी जताई, वीरता पदक मामले में मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के आदेश का पालन करने का आदेश
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार के उस रुख पर नाराजगी जताई, जिसमें मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के एक आदेश का पालन नहीं किया गया, जिसमें एक पूर्व पुलिस अधिकारी को राष्ट्रपति के वीरता पदक से सम्मानित करने का निर्देश दिया गया था।

सौजन्य से:- Jagran
वीरता पदक मामला: सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र के रुख पर जताई नाराजगी
सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व पुलिस अधिकारी विवेक सिंह चौहान को वीरता पदक देने के मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के आदेश का पालन न करने पर केंद्र सरकार के रुख पर नारा ...और पढ़ें
HighLights
- सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र के रुख पर जताई नाराजगी।
- पूर्व पुलिस अधिकारी को वीरता पदक देने का मामला।
- केंद्र को 29 जुलाई तक का अंतिम अवसर।
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को केंद्र सरकार के उस रुख पर नाराजगी जताई, जिसमें मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के एक आदेश का पालन नहीं किया गया, जिसमें एक पूर्व पुलिस अधिकारी को राष्ट्रपति के वीरता पदक से सम्मानित करने का निर्देश दिया गया था।
2003 में ग्वालियर जिले के घाटीगांव पुलिस स्टेशन के एसएचओ रहे विवेक सिंह चौहान ने एक गांव में डकैतों के खिलाफ अभियान का नेतृत्व किया था। इसमें दो डकैत मारे गए थे और चौहान भी घायल हो गए थे।
जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस आर महादेवन की पीठ ने केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन की ओर से दाखिल याचिका पर सुनवाई करते हुए केंद्र को पूर्व पुलिस अधिकारी चौहान को पदक देने के हाई कोर्ट के आदेश का पालन करने के लिए 29 जुलाई तक का समय दिया।
केंद्र की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने पीठ को बताया कि सरकार ने शीर्ष अदालत के 25 मार्च के आदेश के खिलाफ पुनर्विचार याचिका दाखिल की है, जिसमें हाई कोर्ट के आदेश को बरकरार रखा गया था।
मेहता ने कहा, "हमने पुनर्विचार याचिका दाखिल की है। यह अधिकारी के खिलाफ नहीं बल्कि एक सिद्धांत के आधार पर आपत्ति है। अगर अदालत इस पर विचार करती है तो हम रास्ता निकाल सकते हैं। उन्हें अंतत: यह मिल सकता है, लेकिन कोर्ट के आदेश के जरिये नहीं।"
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इस पर जस्टिस नाथ ने मेहता से पूछा, "आप (आदेश का) पालन क्यों नहीं कर सकते। आप इसे मुद्दा क्यों बना रहे हैं।" सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि अगर पुनर्विचार याचिका सफल होती है तो पदक वापस लिया जा सकता है और यह सवाल किसी व्यक्ति के बारे में नहीं बल्कि सिद्धांत को लेकर है।
पूर्व पुलिस अधिकारी की ओर से पेश हुए वकील ने कहा कि उनके मुवक्किल 23 वर्षों से न्याय का इंतजार कर रहे हैं। उन्होंने दलील दी कि अधिकारियों को पहले ही अवमानना का दोषी ठहराया जा चुका है और अब केवल सजा तय की जानी है।
हालांकि पीठ ने केंद्र को अंतिम अवसर दिया। मामले को 29 जुलाई के लिए सूचीबद्ध करने का निर्देश। साथ ही यह स्पष्ट किया कि अब और समय नहीं दिया जाएगा। जबकि मेहता ने दलील दी कि सम्मान दिए जाते हैं और न्यायिक निर्देशों के माध्यम से मांगे नहीं जाते।
(समाचार एजेंसी पीटीआई के इनपुट के साथ)
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