सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया, आरोपपत्र की कॉपी न देने पर स्वत: जमानत का आधार नहीं
सुप्रीम कोर्ट ने स्वत: जमानत के नियम पर बड़ा फैसला सुनाया है। शीर्ष अदालत ने कहा कि आरोपपात्र को आरोपपत्र की कॉपी न देने से स्वत: जमानत का अधिकार नहीं मिलता है।

सौजन्य से:- Jagran
आरोपपत्र की कॉपी न मिलने पर स्वत: जमानत नहीं, सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि आरोपी को आरोपपत्र की कॉपी न देना स्वत: जमानत का आधार नहीं हो सकता। ...और पढ़ें
HighLights
- सुप्रीम कोर्ट ने स्वत: जमानत के नियम पर अहम फैसला सुनाया।
- आरोपी को चार्जशीट कॉपी न देना जमानत का आधार नहीं।
- बॉम्बे हाई कोर्ट के आदेश को शीर्ष अदालत ने सही ठहराया।
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को फैसला सुनाया कि किसी आरोपित को आरोपपत्र की कॉपी नहीं देना स्वत: जमानत का आधार नहीं हो सकता। जस्टिस संजय करोल और एन कोटिश्वर सिंह की पीठ ने बांबे हाई कोर्ट के एक आदेश को सही ठहराते हुए यह बात कही। हाई कोर्ट ने चार्जशीट की कॉपी नहीं मिलने के आधार पर स्वत: जमानत की मांग को खारिज कर दिया था।
शीर्ष अदालत ने कहा कि भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) के तहत चार्जशीट की अतिरिक्त कॉपी जमा नहीं करने से आरोपपत्र ही अमान्य नहीं हो जाएगा। जैसा पहले सीआरपीसी के तहत होता था, बीएनएसएस के तहत भी स्थिति वैसी ही रहेगी।
स्वत: जमानत का अधिकार तब मिलता है जब 60 या 90 दिनों के अंदर चार्जशीट दाखिल नहीं की जाती है। एक बार जब तय समय के अंदर बीएनएसएस की धारा 193(3) के तहत चार्जशीट दाखिल कर दी जाती है, तो स्वत: जमानत का अधिकार खत्म हो जाता है।
सुप्रीम कोर्ट सीबीआई द्वारा दर्ज लगभग 3.81 करोड़ रुपये के साइबर फ्रॉड मामले में गिरफ्तार आरोपित की याचिका पर सुनवाई कर रहा था। इस मामले में आरोपित ने बॉम्बे हाई कोर्ट में स्वत: जमानत के लिए अर्जी दी थी। उसका तर्क था कि भले ही तय समय-सीमा के भीतर चार्जशीट दाखिल कर दी गई थी, लेकिन उसे इसकी कॉपी नहीं दी गई थी।
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(समाचार एजेंसी पीटीआई के इनपुट के साथ)
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