सुप्रीम कोर्ट ने जमानत पर जश्न मनाने वाले हत्या आरोपी की बर्खास्तगी का अनुरोध खारिज किया
हत्ये के आरोपी को पाँच बार की याचिकाओं के बाद हाई कोर्ट से जमानत मिली, फिर सोशल मीडिया पर उसने पैसा और प्रभाव से सब कुछ मिल सकता है कहकर जश्न मनाया। इस बयान के आधार पर जमानत रद्द करने की मांग को सुप्रीम कोर्ट ने अस्वीकार कर, कहा कि यह सिर्फ आज़ादी का उत्सव है और इससे यह नहीं सिद्ध होता कि उसने किसी प्रकार का प्रभाव प्रयोग किया।

सौजन्य से:- Hindustan
इस देश में पैसे से सब मिलेगा, जमानत पाकर बोला शख्स; फिर SC ने दिया तगड़ा जवाब
हत्या के एक आरोपी ने जमानत पर बाहर आने के बाद कहा कि पैसा और प्रभाव से कुछ भी हासिल किया जा सकता है। सुप्रीम कोर्ट ने उसकी इस बात को लेकर जमानत कैंसल करने से इनकार कर दिया।
सुप्रीम कोर्ट ने हत्या के एक आरोपी की जमानत याचिका रद्द करने की मांग वाली याचिका खारिज करते हुए कहा कि जेल से बाहर आने के बाद वह जश्न मना रहा था तो इसमें गलत क्या है। दरअसल पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट से हत्या के आरोपी को पांचवीं याचिका पर जमानत मिली थी। इसके बाद उनसे सोशल मीडिया पर एक वीडियो शेयर किया और कहा कि इस देश में पैसे और पावर के दम पर कुछ भी हासिल किया जा सकता है। इसी को बुनियाद बनाकर शिकायतकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट से मांग की कि उसकी जमानत रद्द कर देनी चाहिए। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह तो बस अपनी आजादी का जश्न मना रहा था। उसके बयान से ऐसा तो नहीं लगता कि उसने पैसे के बल पर जमानत हासिल की है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अगर आरोपी के पास पैसा होता तो वह जेल ही क्यों जाता। क्योंकि वकील भी तो फीस लेते हैं।
जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह वजस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका को खारिज करते हुए यह टिप्पणी की। आरोपी ने पहले निचली अदालत में जमानत की कोशिश की थी। याचिका खारिज होने के बाद उसने हाई कोर्ट का रुख किया लेकिन चार बार उसकी याचिका खारिज हुईं। पांचवीं बार उसे जमानत मिल सकी।
सुनवाई से पहले बेंच ने कहा, 'जेल से बाहर आना एक उपलब्धि है। ठीक है अगर उसे आजादी मिली तो वह जश्न मना रहा था। अगर उसके पास पैसा ही होता तो अंदर क्यं गया होता। पैसा ही तो वकील की फीस थी।' कोर्ट ने कहा कि ऐसा नहीं लगता है कि आरोपी ने किसी भी प्रभाव का इस्तेमाल किया था।
क्यों हुई थी जेल
दरअसल यह मामला हरियाणा के बेरला गांव का है। यहां आरोपी का अपने पड़ोसी के साथ जमीन को लेकर विवाद हो गया था। दोनों एक जमीन पर दावा ठोक रह थे। विरोधी जब वहां टिन शेड रखने लगा तो झगड़ा हो गया। अभियोजन के मुताबिक आरोपी ने एक महिला को डंडे से मारा। उसके सिर पर चोट आई। वहीं उसके पति पर कुल्हाड़ी से वार कर दिया। बाद में पति की मौत हो गई।
इसके बाद अक्टूबर 2022 में आरोपी को गिरफ्तार किया गया। 2024 में सेशन कोर्ट से उसकी जमानत याचिका खारिज हो गई। फिर उसने हाई कोर्ट में अपील करना शुरू किया लेकिन चार याचिकाएंल लगातार खारिज हो गईं। अंत में 23 अप्रैल 2026 को हाई कोर्ट से जमानत मिली। इसी के बाद उसने वीडियो पोस्ट किया था। हाई कोर्ट ने कहा था कि आरोपी के खिलाफ जो भी आरोप लगा लगाए गए हैं वे पोस्टमार्टम की रिपोर्ट से मैच नहीं करते। कोर्ट नेक हा कि मरने वाले के शरीर पर धारदार हथियार का कोई निशाननहीं था वहीं मौके से भी कुल्हाड़ी नहीं बल्क डंडा ही मिला था।
आरोपी लगभग साढ़े तीन साल से जेल में था। उसके मामले में 8 गवाहों की कोर्ट में गवाही हो चुकी है। सुप्रीम कोर्ट ने आर्टिकल 21 के तहत उसके मामले में त्वरित सुनवाई का फैसला किया। वहीं शिकायतकर्ता का आरोप था कि उसने जो वीडियो सोशल मीडिया पर डाले उससे लगता है कि जमानत के लिए पैसे और प्रभाव का इस्तेमाल किया इसलिए जमानत रद्द होनी चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हाई कोर्ट के फैसले में दखल नहीं दिया जाएगा।
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