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अब अदालती राशि बैंक FD में रखी जाएगी, नहीं होगी निष्क्रिय

पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है, अदालत में जमा धन अब निष्क्रिय नहीं रहेगा, बल्कि राष्ट्रीयकृत बैंक में ब्याज वाली सावधि जमा में रखी जाएगी। यह निर्देश पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ की सभी निष्पादन अदालतों के लिए जारी किया गया है।

11 जुलाई 2026 को 08:57 am बजे
अब अदालती राशि बैंक FD में रखी जाएगी, नहीं होगी निष्क्रिय

सौजन्य से:- Jagran

पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, अदालत में जमा धन की अब बैंक में कराई जाएगी एफडी

पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने निर्देश दिया है कि अदालतों में निष्पादन के दौरान जमा राशि को अब राष्ट्रीयकृत बैंक में ब्याज वाली सावधि जमा (FD) के रूप ...और पढ़ें

HighLights

- अदालती निष्पादन राशि अब बैंक FD में रखी जाएगी।

- पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़ की अदालतों पर यह नियम लागू।

- न्याय प्रक्रिया से किसी को आर्थिक हानि नहीं होगी।

दयानंद शर्मा, चंडीगढ़। अदालतों में मामलों के निष्पादन (एग्जीक्यूशन) के दौरान जमा होने वाली राशि अब निष्क्रिय नहीं पड़ी रहेगी। पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ की सभी निष्पादन अदालतों को निर्देश दिया है कि ऐसी प्रत्येक राशि को तत्काल किसी राष्ट्रीयकृत बैंक में ब्याज वाली सावधि जमा (फिक्स्ड डिपाजिट) के रूप में रखा जाए।

ॉ हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अदालत की प्रक्रिया के कारण किसी भी पक्ष को आर्थिक नुकसान नहीं होना चाहिए। जस्टिस पंकज जैन ने यह आदेश धन डिक्री से जुड़े एक निष्पादन मामले में दायर सिविल पुनरीक्षण याचिका का निपटारा करते हुए दिया। यह याचिका सफीदों के अतिरिक्त सिविल न्यायाधीश (सीनियर डिवीजन) द्वारा 11 मार्च 2025 को पारित आदेश के खिलाफ दायर की गई थी।

मामले में याचिकाकर्ता डिक्री धारक थे। हाई कोर्ट ने अपने आदेश में कहा, यह अदालत आवश्यक समझती है कि पंजाब, हरियाणा और केंद्र शासित प्रदेश चंडीगढ़ की सभी निष्पादन अदालतों को निर्देश दिया जाए कि निष्पादन कार्यवाही में प्राप्त राशि को निष्क्रिय रखने के बजाय तत्काल राष्ट्रीयकृत बैंक में जमा कराया जाए।

इससे यह सुनिश्चित होगा कि अदालत की कार्रवाई के कारण किसी भी पक्ष को नुकसान न उठाना पड़े। जस्टिस जैन ने आदेश दिया कि निष्पादन कार्यवाही में जमा धनराशि को राष्ट्रीयकृत बैंक में ब्याज वाली फिक्स्ड डिपाजिट में रखा जाए। फिक्स्ड डिपाजिट संबंधित पात्र पक्ष को हस्तांतरित की जाए। संबंधित पक्ष चाहे तो ब्याज निकाल सकता है।

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