होमवकीलहाईकोर्ट की वकील को चेतावनी, जनहित याचिका के गलत इस्तेमाल पर गंभीर
वकील

हाईकोर्ट की वकील को चेतावनी, जनहित याचिका के गलत इस्तेमाल पर गंभीर

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जनहित याचिका के गलत इस्तेमाल पर सख्त रुख अपनाया और एक वकील को चेतावनी दी कि ऐसा करना अदालत के अधिकार का गंभीर दुरुपयोग है और भविष्य में ऐसा करने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।

28 जुलाई 2026 को 05:52 pm बजे
हाईकोर्ट की वकील को चेतावनी, जनहित याचिका के गलत इस्तेमाल पर गंभीर

सौजन्य से:- Dainik Bhaskar

- Hindi News

- Local

- Uttar pradesh

- Prayagraj

- Allahabad High Court Slams Lawyer For Misuse Of Public Interest Litigation

जनहित याचिका के गलत इस्तेमाल पर हाईकोर्ट गंभीर:कोर्ट ने कहा- वकील का ऐसा करना 'अदालत के अधिकार का गंभीर दुरुपयोग'

- कॉपी लिंक

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक जनहित याचिका खारिज करते हुए कहा कि वकील होने की बात छिपाकर ऐसी याचिका दाखिल करना, जो असल में किसी क्लाइंट के फ़ायदे के लिए हो, "अदालत के जनहित याचिका अधिकार क्षेत्र का गंभीर दुरुपयोग" है। पेशे से वकील झांसी के याचिकाकर्ता को

चीफ जस्टिस अरुण भंसाली और जस्टिस क्षितिज शैलेंद्र की बेंच ने ऐसे याचिकाकर्ता राकेश मिश्रा की जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया, जिसने खुद को सामाजिक कार्यकर्ता बताया था।

टेंडर में मनमानी का मामला याचिकाकर्ता ने टेंडर देने में कथित मनमानी की जांच जल्द पूरी करने और संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई के लिए निर्देश देने की मांग की थी । उसने विभागीय जांच पूरी होने तक प्रतिवादियों में से एक के रिटायरमेंट के बाद मिलने वाले लाभों को रोकने की भी मांग की।

शुरुआत में ही, बेंच ने गौर किया कि हालांकि याचिकाकर्ता ने रिट याचिका में खुद को जन कल्याणकारी गतिविधियों में सक्रिय रूप से शामिल सामाजिक कार्यकर्ता बताया, लेकिन उसने यह नहीं बताया कि वह एक वकील है। कोर्ट ने पाया कि मुख्यमंत्री को दी गई उसकी अर्जी में उसे साफ तौर पर झांसी में रहने वाले वकील के तौर पर बताया गया, जिसे सुनवाई के दौरान उसके वकील ने भी माना। कोर्ट ने आगे कहा कि जनहित की पूरी सामग्री से पता चलता है कि याचिकाकर्ता 'मेसर्स बाजपेयी ट्रेडर्स' को पहले दिए गए कॉन्ट्रैक्ट को रद्द करने और उसके बाद दो अन्य फर्मों को कॉन्ट्रैक्ट दिए जाने से नाराज़ था।

अर्जी की जांच में असली मकसद सामने आया याचिका के साथ लगी अर्जी की बारीकी से जांच करने के बाद बेंच ने कहा कि याचिकाकर्ता का असली मकसद सामने आ गया। उसने गौर किया कि अर्जी में खास तौर पर बाद की टेंडर प्रक्रिया को रद्द करने और कॉन्ट्रैक्ट 'मेसर्स बाजपेयी ट्रेडर्स' को देने की मांग की गई। साथ ही संबंधित अधिकारी को सस्पेंड करने और उच्च-स्तरीय जांच की भी मांग की गई। इस पहलू पर ज़ोर देते हुए कोर्ट ने कहा: "यह तथ्य कि याचिकाकर्ता एक वकील है। उसने खुद को सोशल एक्टिविस्ट बताकर जनहित में याचिका दाखिल करते हुए किसी खास पार्टी को कॉन्ट्रैक्ट देने की मांग की, असल में जनहित याचिका के अधिकार क्षेत्र का गंभीर दुरुपयोग है।"

बेंच ने इस बात पर भी गौर किया कि 'मेसर्स बाजपेयी ट्रेडर्स' ने पहले भी उसी वकील के ज़रिए रिट याचिकाएं दाखिल करके कॉन्ट्रैक्ट रद्द किए जाने को चुनौती दी, जो मौजूदा जनहित याचिका में पेश हो रहा है। हालांकि पहली याचिका वापस ले ली गई, लेकिन दूसरी याचिका अभी भी लंबित थी, जिसमें डिवीज़न बेंच ने पहले ही निर्देश दिया कि प्राइवेट प्रतिवादी को दिया गया टेंडर उस रिट याचिका के नतीजे के अधीन होगा।

आदेश हासिल करने को ऐसा किया कोर्ट ने कहा, ऐसा लगता है कि मौजूदा जनहित याचिका कोर्ट की छुट्टियों के दौरान दायर की गई ताकि पिछली कार्यवाही के लंबित होने के बावजूद कोई आदेश प्राप्त किया जा सके। कोर्ट ने आगे कहा कि यह तथ्य कि याचिकाकर्ता ने अपनी अर्जी में मेसर्स बाजपेयी ट्रेडर्स के लिए राहत मांगी, जबकि उनका प्रतिनिधित्व करने वाले वकील पहले रिट याचिकाओं में उसी फर्म के लिए पेश हो चुके थे, यह महज एक संयोग नहीं हो सकता।

कोर्ट ने जनहित याचिका अधिकार क्षेत्र के दुरुपयोग पर कड़ा रुख अपनाते हुए टिप्पणी की: "वकीलों द्वारा अपनी स्थिति छिपाकर और जनहित का दावा करते हुए जनहित याचिका दायर करना, जो असल में उनके मुवक्किलों का हित होता है, जनहित याचिका के अधिकार क्षेत्र की प्रक्रिया का घोर दुरुपयोग है, जिसकी अनुमति नहीं दी जा सकती"। नतीजतन, कोर्ट ने याचिका खारिज कर दी और याचिकाकर्ता को अपना व्यवहार सुधारने की चेतावनी दी। साथ ही यह भी कहा कि भविष्य में ऐसा कोई भी आचरण करने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।

Powered by Nyaya 247 News

संबंधित ख़बरें

इसी विषय की और ख़बरें →
सुप्रीम कोर्ट की वीडियो जानबूझकर सोशल मीडिया पर नहीं होगी वायरल, जानें क्या है कारण?
वकील

सुप्रीम कोर्ट की वीडियो जानबूझकर सोशल मीडिया पर नहीं होगी वायरल, जानें क्या है कारण?

सांसद ने चेहरे की पहचान तकनीक और बायोमेट्रिक निगरानी के इस्तेमाल के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की
वकील

सांसद ने चेहरे की पहचान तकनीक और बायोमेट्रिक निगरानी के इस्तेमाल के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की

सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई में एक बड़ा फैसला: कोर्ट की रिकॉर्डिंग सोशल मीडिया पर नहीं होगी वायरल
वकील

सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई में एक बड़ा फैसला: कोर्ट की रिकॉर्डिंग सोशल मीडिया पर नहीं होगी वायरल

SC बुधवार को 49 याचिकाओं पर फैसला सुनाएगा, परियोजनाओं के लिए पूर्वव्यापी हरित मंजूरी विवाद पर फैसला
वकील

SC बुधवार को 49 याचिकाओं पर फैसला सुनाएगा, परियोजनाओं के लिए पूर्वव्यापी हरित मंजूरी विवाद पर फैसला

69000 शिक्षक भर्ती मामला: सुप्रीम कोर्ट ने दोनों पक्षों से मांगे सुझाव
वकील

69000 शिक्षक भर्ती मामला: सुप्रीम कोर्ट ने दोनों पक्षों से मांगे सुझाव

सुप्रीम कोर्ट ने तत्काल सुनवाई तंत्र याचिका को खारिज किया, कहा - ई-फाइलिंग से कभी भी पहुंचा जा सकता है
वकील

सुप्रीम कोर्ट ने तत्काल सुनवाई तंत्र याचिका को खारिज किया, कहा - ई-फाइलिंग से कभी भी पहुंचा जा सकता है

सुप्रीम कोर्ट की बड़ी टिप्पणी, छात्र प्रदर्शन पर पुलिस को कहा, 'शांतिपूर्ण प्रदर्शन का हक़ नहीं छीन सकती'
वकील

सुप्रीम कोर्ट की बड़ी टिप्पणी, छात्र प्रदर्शन पर पुलिस को कहा, 'शांतिपूर्ण प्रदर्शन का हक़ नहीं छीन सकती'

सुप्रीम कोर्ट में ट्रांसजेंडर अधिवक्ता द्वारा 2026 संशोधन चुनौती: व्यक्तियों पर प्रतिबंधित करने के निम्नलिखित प्रावधानों की आलोचना
वकील

सुप्रीम कोर्ट में ट्रांसजेंडर अधिवक्ता द्वारा 2026 संशोधन चुनौती: व्यक्तियों पर प्रतिबंधित करने के निम्नलिखित प्रावधानों की आलोचना

ताज़ा ख़बरें