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पेपर लीक से जुड़ी PIL पर सुनवाई करते हुए SC ने पूछा, 'अदालतें आखिर क्या और कितना कर सकती हैं?'

सुप्रीम कोर्ट ने प्रतियोगी परीक्षाओं में लगातार हो रहे पेपर लीक के मामलों पर रोक लगाने और छात्रों के हितों की रक्षा के लिए दायर एक जनहित याचिका (PIL) पर विचार करने से अनिच्छा जताई है।

22 जुलाई 2026 को 02:13 am बजे
पेपर लीक से जुड़ी PIL पर सुनवाई करते हुए SC ने पूछा, 'अदालतें आखिर क्या और कितना कर सकती हैं?'

सौजन्य से:- Hindustan

'अदालतें आखिर क्या कर सकती हैं?', पेपर लीक से जुड़ी PIL पर सुनवाई करने से हिचकिचा रहा SC

पेपर लीक पर नई जनहित याचिका (PIL) सुनने से सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल किनारा कर लिया है। अदालत ने पूछा, 'अदालतें आखिर क्या और कितना कर सकती हैं?' पढ़ें मामले की पूरी जानकारी।

सुप्रीम कोर्ट ने प्रतियोगी परीक्षाओं में लगातार हो रहे पेपर लीक के मामलों पर रोक लगाने और छात्रों के हितों की रक्षा के लिए दायर एक जनहित याचिका (PIL) पर फिलहाल विचार करने से अनिच्छा जताई है। मंगलवार को सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया कि इस याचिका का दायरा बहुत ज्यादा व्यापक है।

सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?

जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की पीठ ने इस मामले की सुनवाई की। इस दौरान सीनियर एडवोकेट विकास सिंह ने अदालत से इस याचिका पर गौर करने की अपील की। उन्होंने दलील दी कि NEET और कई अन्य परीक्षाओं के पेपर लीक होने की वजह से 2.5 करोड़ से ज्यादा छात्रों को भारी नुकसान उठाना पड़ा है। इस पर पीठ ने सवाल करते हुए कहा, "अदालत क्या कर सकती है? अदालत आखिर कितना कर सकती है?"

हालांकि, पीठ ने यह भी टिप्पणी की कि वह NEET-UG पेपर लीक मामले की सुनवाई पहले ही कर रही है। अदालत ने इस नई जनहित याचिका पर सुनवाई अगले महीने तक के लिए स्थगित कर दी है।

याचिका में क्या कहा गया है?

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, यह याचिका वकील अश्विनी उपाध्याय की तरफ से दायर की गई है। इसमें साफ तौर पर कहा गया है कि बार-बार होने वाले पेपर लीक ने छात्रों को गंभीर संकट में डाल दिया है।

याचिका की अहम बातें:

- याचिका के मुताबिक, जब पेपर लीक के कारण परीक्षा रद्द होती है, तो छात्रों को अपने जीवन के फैसलों को लेकर आलोचनाओं का सामना करना पड़ता है। एक छात्र परीक्षा की तैयारी में अपना पूरा साल लगा देता है। इसके अलावा, छात्रों को होने वाली आर्थिक तंगी का सीधा असर उनके आत्मसम्मान पर पड़ता है।

- परीक्षाएं आयोजित करते समय छात्रों के प्रति राज्य का कर्तव्य काफी बढ़ जाता है। छात्र सिस्टम पर पूरा भरोसा करते हैं और कोचिंग, स्टडी मटेरियल, यात्रा, किराए जैसे अन्य खर्चों में सालों की कड़ी मेहनत के साथ-साथ एक बड़ी रकम निवेश करते हैं।

- राज्य सरकारें छात्रों और उनके परिवारों को यह विश्वास दिलाती हैं कि परीक्षाएं तय समय पर आयोजित होंगी। लेकिन जब पेपर लीक होता है, तो उनकी सारी उम्मीदें टूट जाती हैं। याचिका में कहा गया है कि यह सीधे तौर पर संविधान के अनुच्छेद 14 के तहत छात्रों के 'समानता के अधिकार' का बड़ा उल्लंघन है।

पुलिस की बर्बरता से जुड़ी याचिका पर तत्काल सुनवाई से अदालत का इनकार

दिल्ली उच्च न्यायालय ने 'कॉकरोच जनता पार्टी' (कॉजपा) के ''संसद चलो'' मार्च में शामिल छात्रों के खिलाफ पुलिस द्वारा ''अत्यधिक बल प्रयोग'' के मामले में दायर याचिका को तत्काल सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने से इनकार कर दिया।

मुख्य न्यायाधीश डी.के. उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस करिया की पीठ ने याचिकाकर्ता से कहा, ''अदालत को इन सब मामलों में नहीं घसीटें।'' पीठ ने कहा कि मामले को बुधवार को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया जाएगा।

याचिकाकर्ता ने मामले में तत्काल सुनवाई का अनुरोध करते हुए पीठ के समक्ष याचिका का उल्लेख किया और कहा कि दिल्ली पुलिस के जवानों ने प्रदर्शनकारियों पर ''बहुत अधिक बल'' का इस्तेमाल किया।

परीक्षा में कथित गड़बड़ियों को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर कॉजपा के ''संसद चलो'' मार्च में सोमवार को हजारों लोग शामिल हुए।

कॉजपा ने दिल्ली पुलिस पर आरोप लगाया कि उसने प्रदर्शनकारियों को संसद तक पहुंचने से रोकने के लिए बहुत अधिक बल का इस्तेमाल किया। पार्टी का आरोप है कि पुलिस की कार्रवाई में कई छात्र घायल हुए और कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि जे. आंग्मो के साथ धक्का-मुक्की की गई। हालांकि, दिल्ली पुलिस ने आंग्मो से दुर्व्यवहार की बात से इनकार किया और इस तरह की रिपोर्ट को ''पूरी तरह से झूठा और गुमराह करने वाला'' बताया।

(इनपुट एजेंसी)

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अमित ने देश के प्रतिष्ठित भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), दिल्ली से हिंदी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा और गुरु जम्भेश्वर विश्वविद्यालय से जनसंचार में मास्टर डिग्री हासिल की है। उन्होंने यूनिसेफ और ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों से हेल्थ जर्नलिज्म का सर्टिफिकेशन भी प्राप्त किया है। एआई-असिस्टेड कंटेंट ऑप्टिमाइजेशन और एडिटोरियल प्लानिंग में उनकी विशेषज्ञता उन्हें आज के आधुनिक न्यूज रूम के लिए एक अनिवार्य स्तंभ बनाती है। पेशेवर जीवन से इतर, अमित एक जुनूनी घुमक्कड़ हैं जिन्हें हार्डकोर ट्रेकिंग और फोटोग्राफी का शौक है, साथ ही वे ऐतिहासिक और वास्तविक जीवन पर आधारित सिनेमा देखने के भी शौकीन हैं।

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