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गुंडा दमन कानून को कलकत्ता हाई कोर्ट में चुनौती, तत्काल रोक लगाने की मांग

गुंडा दमन कानून के खिलाफ जनहित याचिका दायर हुई है, जिससे कलकत्ता हाई कोर्ट में मामले की सुनवाई हो सकती है। याचिकाकर्ताओं का दावा है कि कानून संविधान और मानवाधिकारों के खिलाफ है, और उन्होंने इसके क्रियान्वयन को तत्काल रोक लगाने की मांग की है।

13 जुलाई 2026 को 12:14 pm बजे
गुंडा दमन कानून को कलकत्ता हाई कोर्ट में चुनौती, तत्काल रोक लगाने की मांग

सौजन्य से:- Jagran

गुंडा दमन कानून के खिलाफ कलकत्ता हाई कोर्ट में जनहित याचिका, तत्काल रोक लगाने की मांग

कानून लागू होने के पहले ही दिन जनहित याचिका दायर करने की अनुमति, इस सप्ताह सुनवाई संभव है। याचिकाकर्ता ने कानून को संविधान और मानवाधिकारों के विरुद्ध ...और पढ़ें

HighLights

- बंगाल में गुंडा दमन कानून 2026 को चुनौती।

- कलकत्ता हाई कोर्ट में जनहित याचिका दायर।

- संविधान और मानवाधिकारों के उल्लंघन का आरोप।

राज्य ब्यूरो, कोलकाता। बंगाल में सोमवार से लागू हुए पब्लिक सेफ्टी एंड कंट्रोल आफ एंटी-सोशल एक्टिविटीज एक्ट, 2026 (गुंडा दमन कानून) को चुनौती देते हुए कलकत्ता हाई कोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई है। माकपा नेता एवं अधिवक्ता सब्यसाची चटर्जी की अर्जी पर कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश तपोब्रत चक्रवर्ती की खंडपीठ ने जनहित याचिका दाखिल करने की अनुमति दे दी है। मामले पर इसी सप्ताह सुनवाई होने की संभावना है।

यह कानून 29 जून को बंगाल विधानसभा से पारित हुआ था और राज्य सरकार ने इसकी अधिसूचना जारी कर 13 जुलाई से पूरे राज्य में लागू कर दिया। कानून के तहत संगठित अपराध और हिंसक घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए पुलिस तथा जांच एजेंसियों को व्यापक अधिकार दिए गए हैं। साथ ही, सार्वजनिक या निजी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के मामलों में क्षति की वास्तविक राशि से दोगुना तक उदाहरणात्मक क्षतिपूर्ति (जुर्माना) लगाने का भी प्रावधान किया गया है।

याचिकाकर्ता सब्यसाची चटर्जी ने आरोप लगाया है कि यह कानून संविधान और मानवाधिकारों के विपरीत है तथा केवल संदेह के आधार पर किसी व्यक्ति को हिरासत में लेने जैसी व्यवस्था नागरिकों के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करती है। उन्होंने कानून के क्रियान्वयन पर तत्काल रोक लगाने की मांग की है।

उधर, राज्य सरकार का कहना है कि पिछली तृणमूल सरकार के दौरान बढ़ी तस्करी, सिंडिकेट, तौलाबाजी और संगठित अपराध पर प्रभावी नियंत्रण के लिए यह कानून आवश्यक है। सरकार का दावा है कि नए कानून से कानून-व्यवस्था मजबूत होगी और असामाजिक गतिविधियों पर कड़ी कार्रवाई संभव हो सकेगी।

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