सुप्रीम कोर्ट समिति बदले, 'रहस्यमय' PIL दाखिल,3 पूर्व CJI में से कोई एक करें CJP प्रदर्शन में हिंसा की जांच
सुप्रीम कोर्ट की पसंद पर उठाए सवाल सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही 20 जुलाई के सीजेपी संसद चलो मार्च के दौरान प्रदर्शकारियों पर हुई कथित पुलिस कार्रवाई और प्रदर्शनकारियों की ओर से पुलिस के खिलाफ हुई हिंसा की जांच के लिए सुप्रीम…

सौजन्य से:- Navbharat Times
सुप्रीम कोर्ट की पसंद पर उठाए सवाल
सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही 20 जुलाई के सीजेपी संसद चलो मार्च के दौरान प्रदर्शकारियों पर हुई कथित पुलिस कार्रवाई और प्रदर्शनकारियों की ओर से पुलिस के खिलाफ हुई हिंसा की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज आर सुभाष रेड्डी की अगुवाई में जांच समिति गठित की है। हमारे सहयोगी अंग्रेजी अखबार टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट के मुताबिक मंगलवार को एक पीआईएल में सुप्रीम कोर्ट की पसंद पर शक जताते हुए बनाई गई समिति पर स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच की क्षमता पर संदेह जाहिर किया गया है।तीन पूर्व सीजेआई में से एक को अध्यक्ष बनाने की मांग
याचिका में मांग की गई है कि सुप्रीम कोर्ट इस समिति को पुनर्गठित करे और इसकी अध्यक्षता देश के तीन पूर्व चीफ जस्टिस यूयू ललित, संजीव खन्ना या बीआर गवई में से किसी एक को सौंपे।जनहित याचिका में स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच पर जताया संदेह
याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील शैलेंद्र मणि त्रिपाठी और सीनियर एडवोकेट गोपाल शंकरनारायणन ने सीजेआई सूर्यकांत की अगुवाई वाली बेंच को याचिकाकर्ता की मांग के बारे में जानकारी दी। त्रिपाठी ने कहा कि पब्लिक डोमेन में जो सूचना है, उससे पैनल के सदस्यों और केंद्रीय गृहमंत्री समेत सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ लंबे समय से जुड़ाव की जानकारी मिलती है, जिससे स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच प्रभावित हो सकती है।सॉलिसिटर जनरल बोले यह जनहित याचिका 'रहस्यमय'
- सीजेआई सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी मोहना की बेंच में दायर इस याचिका पर आपत्ति जताते हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने इसे 'रहस्यमय' याचिका बताया।
- उन्होंने दलील दी कि जब समिति अपना काम शुरू कर चुकी है, उसके बाद इसके पुनर्गठन की मांग की गई है।
- इसने पूर्व सीजेआई का नाम का प्रस्ताव हेड के रूप में दिया है, जबकि सुप्रीम कोर्ट पहले ही एक रिटायर्ड जज को इसकी अध्यक्षता सौंप चुका है।
- इसपर सुप्रीम कोर्ट के एक और वकील प्रशांत भूषण ने कहा कि समिति के गठन को लेकर गई लोगों को गंभीर संदेह है।
- प्रशांत भूषण पहले ही अपने एक सोशल मीडिया पोस्ट में सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित समिति को 'कमजोर' बता चुके हैं।
- इसपर सॉलिसिटर जनरल ने तुरंत जवाब दिया कि कुछ लोग जहां काम करते हैं, उस संस्थान को लेकर ही उन्हें हमेशा संदेह रहता है।
जांच समिति में इन लोगों को भी शामिल करने की मांग
याचिकाकर्ता ने न सिर्फ जांच समिति में पूर्व सीजेआई को शामिल करने की मांग की है, बल्कि एक रिटायर्ड महिला डीजीपी, एक पूर्व अटॉर्नी जनरल (इस समय देश में सिर्फ दो हैं), एक जांच के अनुभव वाले अधिकारी या नागरिक स्वतंत्रता और जनहित के ट्रैक रिकॉर्ड वाले व्यक्ति को शामिल करने की मांग की गई है। इसमें शुक्ला और बिश्नोई की इस तरह की जांच में विशेषज्ञता पर भी सवाल उठाए गए हैं।सुप्रीम कोर्ट के तीनों पूर्व सीजेआई ने क्या कहा
- पीआईएल में जिन तीन पूर्व सीजेआई का नाम प्रस्तावित किया है, टीओआई ने उन तीनों से संपर्क की कोशिश की है।
- जस्टिस संजीव खन्ना और जस्टिस बीआर गवई ने कहा कि न तो उनसे किसी ने इस बारे में संपर्क किया है और न ही उन्होंने इसके लिए कोई सहमति दी है।
- जस्टिस गवई ने यह भी कहा कि जब एक बार सुप्रीम कोर्ट ने जांच समिति गठित कर दी है तो किसी के द्वारा इसमें बदलाव करने की मांग पूरी तरह से अनुचित है।
- जस्टिस यूयू ललित ने टेलीफोन कॉल या मैसेज में से किसी का जवाब नहीं दिया।
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