OBC क्रीमी लेयर पर SC में विशेष पीठ के गठन पर विचार, UPSC CSE 2025 के 958 अभ्यर्थियों के सेवा आवंटन का रास्ता होगा साफ? - supreme court to form special bench on obc creamy layer for upsc civil services exam 2025
OBC क्रीमी लेयर पर SC में विशेष पीठ के गठन पर विचार, UPSC CSE 2025 के 958 अभ्यर्थियों के सेवा आवंटन का रास्ता होगा साफ? सुप्रीम कोर्ट सिविल सेवा परीक्षा 2025 के उम्मीदवारों पर ओबीसी क्रीमी-लेयर मानदंड के लागू होने पर स्प…

सौजन्य से:- Jagran
OBC क्रीमी लेयर पर SC में विशेष पीठ के गठन पर विचार, UPSC CSE 2025 के 958 अभ्यर्थियों के सेवा आवंटन का रास्ता होगा साफ?
सुप्रीम कोर्ट सिविल सेवा परीक्षा 2025 के उम्मीदवारों पर ओबीसी क्रीमी-लेयर मानदंड के लागू होने पर स्पष्टीकरण के लिए एक विशेष पीठ गठित करने पर विचार करेगा।
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डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट मंगलवार को एक स्पेशल बेंच बनाने पर विचार करने के लिए सहमत हो गया। यह बेंच केंद्र की उस याचिका पर सुनवाई करेगी, जिसमें सिविल सेवा परीक्षा (सीएसई) 2025 के उम्मीदवारों पर ओबीसी क्रीमी-लेयर क्राइटेरिया संबंधी 11 मार्च के फैसले के लागू होने पर स्पष्टीकरण मांगा गया है।
958 उम्मीदवारों का मामला
कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (डीओपीटी) अब सरकार को निर्देश देने की मांग कर रहा है ताकि वह यूपीएससी द्वारा सीएसई-2025 के लिए अनुशंसित 958 उम्मीदवारों के सेवा आवंटन की प्रक्रिया आगे बढ़ा सके। यह प्रक्रिया 11 मार्च के फैसले से पहले लागू ओबीसी क्रीमी-लेयर निर्धारण के आधार पर होनी है।
अदालत में क्या हुआ?
दिन की कार्यवाही की शुरुआत में केंद्र की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने जस्टिस सूर्य कांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच को बताया कि डीओपीटी ने एक निपटाए जा चुके मामले में जरूरी निर्देशों के लिए मिसलेनियस एप्लीकेशन दायर की है। इसे जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा की अध्यक्षता वाली बेंच के सामने लिस्ट किया जाना चाहिए।
एक याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता संजय हेगड़े ने कहा कि जस्टिस नरसिम्हा और जस्टिस आर. महादेवन की बेंच ने 11 मार्च को आदेश पारित किया था, इसलिए इसी बेंच को सुनवाई करनी चाहिए। सीजेआई ने कहा, 'हमें एक विशेष बेंच बनानी होगी।' उन्होंने बताया कि वे जजों से बात कर बेंच का गठन करेंगे।
रोहित नाथन मामले का संदर्भ
डीओपीटी की यह याचिका 'यूनियन ऑफ इंडिया बनाम रोहित नाथन' मामले से जुड़ी है। इसमें 11 मार्च को अदालत ने माना था कि 14 अक्टूबर 2004 का स्पष्टीकरण पत्र, ओबीसी क्रीमी-लेयर की पहचान तय करने वाले 8 सितंबर 1993 के ऑफिस मेमोरेंडम से ऊपर नहीं हो सकता।
कोर्ट ने यह भी कहा कि सार्वजनिक या निजी क्षेत्र में काम करने वाले माता-पिता की सैलरी या आय अकेले क्रीमी-लेयर से बाहर रखने का आधार नहीं हो सकती। 1993 के मेमोरेंडम के अनुसार पद, श्रेणी और संपत्ति परीक्षण दोनों पर विचार जरूरी है।
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