सरकारी स्कूलों में No Entry का आदेश सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, यूपी-राजस्थान में पत्रकार-YouTubers की एंट्री पर रोक को चुनौती
सरकारी स्कूलों में No Entry का आदेश सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, यूपी-राजस्थान में पत्रकार-YouTubers की एंट्री पर रोक को चुनौती सांकेतिक तस्वीर (AI) UP News: उत्तर प्रदेश और राजस्थान के सरकारी स्कूलों में बाहरी लोगों, यूट्यूबर्…

सौजन्य से:- Prabhat Khabar
सरकारी स्कूलों में No Entry का आदेश सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, यूपी-राजस्थान में पत्रकार-YouTubers की एंट्री पर रोक को चुनौती
सांकेतिक तस्वीर (AI)
UP News: उत्तर प्रदेश और राजस्थान के सरकारी स्कूलों में बाहरी लोगों, यूट्यूबर्स और सोशल मीडिया से जुड़े लोगों के प्रवेश पर रोक के मामले ने अब तूल पकड़ लिया है. इस मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका दायर की गई है. याचिका में सरकारी सर्कुलर को रद्द करने की मांग की गई है.
UP News: उत्तर प्रदेश और राजस्थान के सरकारी स्कूलों में बाहरी लोगों के प्रवेश और बिना अनुमति फोटो-वीडियोग्राफी पर रोक लगाने का मामला अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है. दोनों राज्यों के इस तरह के आदेशों को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दाखिल की गई है. याचिका में संबंधित सर्कुलर को रद्द करने की मांग की गई है.
यूपी में यूट्यूबर्स और सोशल मीडिया से जुड़े लोगों पर भी सख्ती
उत्तर प्रदेश के कई जिलों में सरकारी स्कूलों में बिना अनुमति बाहरी लोगों, यूट्यूबर्स और सोशल मीडिया से जुड़े लोगों के प्रवेश पर रोक लगायी गयी है. अयोध्या में बेसिक शिक्षा विभाग की ओर से जारी निर्देश में बिना सक्षम अधिकारी की अनुमति के स्कूल परिसर में फोटो या वीडियो बनाने पर कार्रवाई की बात कही गयी है. अधिकारियों का तर्क है कि ऐसे लोगों की अनधिकृत गतिविधियों से पढ़ाई प्रभावित होती है और शिक्षकों व विद्यार्थियों की निजता एवं सुरक्षा से जुड़े सवाल पैदा होते हैं. आजमगढ़ समेत यूपी के अन्य जिलों में भी इसी तरह के निर्देश सामने आए हैं. वहां अधिकारियों ने स्कूलों में बिना अनुमति यूट्यूबर्स के प्रवेश और रिकॉर्डिंग पर रोक लगाने की बात कही है.
सुप्रीम कोर्ट में क्या दी गयी दलील?
सुप्रीम कोर्ट में दाखिल जनहित याचिका में कहा गया है कि बाहरी लोगों के प्रवेश और वीडियोग्राफी पर व्यापक रोक लगाने वाले आदेश नागरिकों के मौलिक अधिकारों से टकरा सकते हैं. याचिका में संविधान के अनुच्छेद 14, 19(1)(a), 19(1)(g), 21 और 21-A का हवाला दिया गया है. याचिकाकर्ता ने दोनों राज्यों के संबंधित सर्कुलर को रद्द करने की मांग की है. अब इस मामले में सुप्रीम कोर्ट का रुख महत्वपूर्ण होगा कि सरकारी स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा और निजता सुनिश्चित करने के लिए ऐसे प्रतिबंध किस सीमा तक लगाए जा सकते हैं.
सरकारों का क्या है तर्क?
स्कूलों में बाहरी लोगों की अनधिकृत आवाजाही रोकने के पीछे बच्चों की सुरक्षा, निजता और पढ़ाई का माहौल बनाए रखने को प्रमुख वजह बताया जा रहा है. यूपी में अधिकारियों का कहना है कि कुछ सोशल मीडिया से जुड़े लोग बिना अनुमति स्कूलों में पहुंचकर शिक्षकों और विद्यार्थियों की रिकॉर्डिंग करते हैं, जिससे कक्षाओं में व्यवधान पैदा हो सकता है. दूसरी ओर, इस व्यवस्था को लेकर यह सवाल भी उठ रहा है कि यदि मीडिया या आम लोगों की पहुंच सीमित कर दी गयी, तो सरकारी स्कूलों की समस्याएं और व्यवस्थागत कमियां सामने कैसे आएंगी. यही पहलू अब विवाद का बड़ा हिस्सा बन गया है.
स्कूलों की निगरानी और पारदर्शिता के बीच संतुलन का सवाल
मामले में एक तरफ बच्चों की निजता और सुरक्षा है, तो दूसरी तरफ सरकारी स्कूलों की व्यवस्था में पारदर्शिता और जन निगरानी का मुद्दा है. सुप्रीम कोर्ट में चुनौती के बाद अब बहस इस बात पर केंद्रित होगी कि स्कूल परिसर में अनधिकृत प्रवेश और रिकॉर्डिंग रोकने के लिए सरकार कितनी व्यापक पाबंदी लगा सकती है. फिलहाल सुप्रीम कोर्ट में दाखिल याचिका के बाद इस विवाद ने नया मोड़ ले लिया है. अदालत की आगे की कार्यवाही से यह स्पष्ट होगा कि यूपी और राजस्थान के इन आदेशों को लेकर कानूनी स्थिति क्या बनती है.
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