MP में सरकारी पदोन्नति में विवाद: सुप्रीम कोर्ट की याचिका के कारण हाई कोर्ट ने सुनवाई टाली
मध्य प्रदेश में सरकारी कर्मचारियों की पदोन्नति में आरक्षण को लेकर विवाद गहरा गया। हाई कोर्ट ने सुनवाई 18 अगस्त तक टाली जिससे अंतिम फैसला सुप्रीम कोर्ट की एसएलपी पर टिक गया है।

सौजन्य से:- Jagran
MP में सरकारी कर्मचारियों पदोन्नति में आरक्षण पर फिर फंसा पेंच, सुप्रीम कोर्ट की SLP पर टिकी हाई कोर्ट की सुनवाई
मध्य प्रदेश में सरकारी कर्मचारियों की पदोन्नति में आरक्षण का विवाद सुप्रीम कोर्ट की लंबित याचिका के कारण गहरा गया है। हाईकोर्ट ने सुनवाई 18 अगस्त तक ट ...और पढ़ें
HighLights
- हाईकोर्ट ने पदोन्नति आरक्षण सुनवाई 18 अगस्त तक टाली।
- सुप्रीम कोर्ट की एसएलपी पर टिका अंतिम फैसला।
- दोनों पक्ष सुप्रीम कोर्ट में जल्द सुनवाई का प्रयास करेंगे।
डिजिटल डेस्क, जबलपुर। प्रदेश में सरकारी कर्मचारियों की पदोन्नति में आरक्षण का विवाद एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट की लंबित याचिका के कारण गहरा गया है। सोमवार को हाई कोर्ट में करीब एक घंटे चली बहस के बाद सुनवाई 18 अगस्त तक टाल दी गई है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि सुप्रीम कोर्ट में लंबित विशेष अनुमति याचिका यानी एसएलपी पर स्थिति स्पष्ट होने के बाद ही रिट अपील पर आगे सुनवाई करना उचित होगा। दोनों पक्ष अब सुप्रीम कोर्ट में संयुक्त आवेदन देकर एसएलपी की जल्द सुनवाई कराने का प्रयास करेंगे।
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने राज्य सरकार से पूछा कि 2025 के नए प्रमोशन नियम लागू करने से पहले सुप्रीम कोर्ट में कोई अनुमति या आवेदन दिया गया था या नहीं। राज्य की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सीएस वैद्यनाथन ने बताया कि कई राज्यों से संबंधित मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित है। याचिकाकर्ताओं की ओर से कहा गया कि 2025 के नियमों की प्रस्तावना में एसएलपी 13954/2016 का उल्लेख है। सुप्रीम कोर्ट ने 12 मई 2016 को यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया था। ऐसे में अंतिम फैसला भविष्य की पदोन्नतियों पर भी असर डालेगा।
सामान्य वर्ग की दलील
सामान्य वर्ग की ओर से कहा गया कि कई विभागों में आरक्षित वर्ग का प्रतिनिधित्व पहले ही पूरा है, फिर भी पदोन्नति में आरक्षण दिया जा रहा है। मेरिट से चयनित आरक्षित वर्ग के कर्मचारियों को पदोन्नति में दोबारा आरक्षित सूची में शामिल करने पर भी आपत्ति जताई गई। सुनवाई में एम. नागराज और जरनैल सिंह के फैसलों का भी उल्लेख हुआ। 18 अगस्त को दोनों पक्ष वीडियो कांफ्रेंसिंग से जुड़ेंगे और सुप्रीम कोर्ट में दायर किए जाने वाले आवेदन की प्रगति बताएंगे। इसके बाद हाई कोर्ट मामले की मेरिट पर सुनवाई की अगली तारीख तय करेगा।
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दोनों पक्षों ने पीठ पर जताया भरोसा
सुनवाई शुरू होने से पहले न्यायमूर्ति विवेक अग्रवाल ने बताया कि सीपी माथुर प्रकरण में वह पूर्व में याचिकाकर्ताओं की ओर से केंद्रीय व राज्य प्रशासनिक अधिकरण, मध्य प्रदेश हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में अधिवक्ता के रूप में पैरवी कर चुके हैं। इस पर राज्य सरकार और याचिकाकर्ताओं से राय ली गई। दोनों पक्षों ने कोई आपत्ति नहीं जताई और पीठ पर भरोसा व्यक्त किया।
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